SIR के दौरान बीएलओ की मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को दिए निर्देश

SIR अभियान के दौरान बीएलओ की हुई मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई और सभी राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं। जानिए कोर्ट ने क्या कहा और सुरक्षा के लिए

देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) की कार्य स्थितियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

नई दिल्ली: देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की लगातार हो रही मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि वे बीएलओ पर काम का अत्यधिक दबाव कम करें, उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति की जिम्मेदारी लें और जो कर्मचारी ड्यूटी से छूट चाहते हैं, उन्हें तुरंत राहत दी जाए।

यह निर्देश तमिल अभिनेता विजय की राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में बीएलओ पर भारी दबाव बनाया जा रहा है, जिससे कई कर्मचारियों ने आत्महत्या तक कर ली है।

राज्य सरकारें होंगी जिम्मेदार: सुप्रीम कोर्ट

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीएलओ राज्य सरकार के कर्मचारी हैं और उनकी कार्य स्थितियों, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए राज्य सरकारें पूरी तरह जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि 10,000 कर्मचारी तैनात किए गए हैं, तो जरूरत पड़ने पर 30,000 तक कर्मचारी लगाए जाएं ताकि किसी एक पर अत्यधिक बोझ न पड़े। न्यायालय ने यह भी कहा कि अत्यधिक दबाव में काम कर रहे कर्मचारियों की मानसिक स्थिति को नजरअंदाज करना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जो बीएलओ गंभीर बीमारी, पारिवारिक परिस्थितियों या मानसिक तनाव के कारण ड्यूटी से छूट का अनुरोध कर रहे हैं, उन्हें राहत दी जाए और उनके स्थान पर किसी अन्य कर्मचारी को तैनात किया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी कर्मचारी को उचित कारण के बावजूद राहत नहीं दी जाती और उसे जबरन काम कराया जाता है, तो वह कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है।

SIR के दौरान बीएलओ की मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को दिए निर्देश

टीवीके के आरोप: धमकी देकर कराया जा रहा काम

याचिकाकर्ता पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने की धमकी देकर बीएलओ से जबरन काम कराया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि कई राज्यों में बीएलओ के परिवार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, कई स्थानों पर बच्चे अनाथ हो गए हैं और कई परिवार टूट गए हैं।

टीवीके ने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश में ही 50 से अधिक बीएलओ के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों में डर का माहौल बना हुआ है।

चुनाव आयोग ने आरोपों को बताया निराधार

इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि याचिका में लगाए गए सभी आरोप तथ्यहीन और भ्रामक हैं। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में किसी भी स्तर पर दबाव या धमकी की नीति नहीं अपनाई जा रही है। चुनाव आयोग ने यह भी तर्क दिया कि यदि पुनरीक्षण कार्य में देरी होती है, तो इससे आगामी चुनावों की समय-सीमा और पारदर्शिता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सीधे तौर पर बीएलओ की मौतों का जिम्मेदार ठहराने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बीएलओ राज्य सरकारों के अधीन काम करते हैं, इसलिए उनके कार्य-प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की ही है।

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