स्कॉटलैंड तट के पास अमेरिकी कार्रवाई, मरीनेरा टैंकर की जब्ती से भड़का रूस

स्कॉटलैंड तट के पास अमेरिकी कार्रवाई, मरीनेरा टैंकर की जब्ती से भड़का रूस

नॉर्थ अटलांटिक में अमेरिका ने रूसी झंडे वाले तेल टैंकर मरीनेरा को जब्त किया। अमेरिका ने इसे वेनेजुएला प्रतिबंध उल्लंघन बताया, जबकि रूस ने कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

World News: अमेरिका और रूस के बीच तनाव एक बार फिर खुले समंदर तक पहुंच गया है। नॉर्थ अटलांटिक महासागर में अमेरिकी सेना और होमलैंड सिक्योरिटी ने रूस के झंडे वाले एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। इस टैंकर का नाम मरीनेरा बताया गया है। यह घटना स्कॉटलैंड के तट के पास हुई, लेकिन इसकी जड़ें वेनेजुएला तक जाती हैं। इस कार्रवाई के बाद वाशिंगटन से लेकर मॉस्को तक हलचल तेज हो गई है और इसे आने वाले दिनों में बड़े geopolitical conflict की शुरुआत माना जा रहा है।

कोहरे और बर्फीली हवाओं के बीच हाई वोल्टेज ऑपरेशन

अटलांटिक महासागर के बीचों-बीच घना कोहरा और बर्फीली हवाएं थीं। माहौल किसी थ्रिलर फिल्म जैसा लग रहा था, लेकिन यह कोई फिल्मी सीन नहीं बल्कि हकीकत थी। हफ्तों तक चले पीछा करने के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने आखिरकार रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को घेर लिया।

अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सुरक्षा एजेंसियों ने इस ऑपरेशन को बेहद सटीक तरीके से अंजाम दिया। जैसे ही टैंकर को अपने कब्जे में लिया गया, यह साफ हो गया कि यह सिर्फ एक जहाज की जब्ती नहीं है, बल्कि अमेरिका की तरफ से रूस और वेनेजुएला दोनों को दिया गया एक कड़ा संदेश है।

वेनेजुएला से शुरू हुई मरीनेरा की कहानी

इस जहाज का नाम पहले बेला वन था। यह लंबे समय से अमेरिकी एजेंसियों की नजर में था। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज वेनेजुएला पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों यानी sanctions को तोड़ते हुए वहां से तेल की तस्करी कर रहा था।

वेनेजुएला पर अमेरिका ने तेल व्यापार को लेकर कड़ी नाकेबंदी यानी blockade लागू कर रखी है। हाल ही में अमेरिका ने वहां एक बड़ा military operation भी चलाया था। इसके बाद से ही उन जहाजों पर खास नजर रखी जा रही थी, जो वेनेजुएला का तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे।

नाम बदला, झंडा बदला, फिर भी नहीं बच पाया

बेला वन जून 2024 से ही अमेरिका की blacklist में था। अमेरिकी कार्रवाई से बचने के लिए इस जहाज ने चालाकी दिखाई। इसका नाम बदलकर मरीनेरा कर दिया गया और इसके साथ ही झंडा भी बदल दिया गया।

सबसे अहम बात यह रही कि जहाज पर रूस का झंडा लगा दिया गया। माना जा रहा था कि रूसी ध्वज होने की वजह से अमेरिका सीधे कार्रवाई करने से हिचकेगा। लेकिन अमेरिकी एजेंसियों ने साफ कर दिया कि वे sanctions लागू करने में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेंगे।

स्कॉटलैंड के पास हुआ निर्णायक मोड़

मरीनेरा वेनेजुएला के पास से निकलकर उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ा। अमेरिकी कोस्ट गार्ड लगातार इसका पीछा कर रहा था। आखिरकार स्कॉटलैंड के तट के पास ठंडे और उथल-पुथल भरे समुद्र में अमेरिकी अधिकारियों ने जहाज को घेर लिया और जब्त कर लिया।

इस ऑपरेशन के बाद अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेक्सेथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वेनेजुएला के तेल पर लगी नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चाहे दुनिया का कोई भी कोना हो, अमेरिका अपने प्रतिबंधों को लागू करने से पीछे नहीं हटेगा।

रूस का तीखा विरोध

अमेरिका की इस कार्रवाई से रूस बुरी तरह भड़क गया है। रूस ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया है। एक वरिष्ठ रूसी सांसद ने इस कदम को सीधे तौर पर समुद्री डकैती करार दिया। रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला से तेल निर्यात रोकने के प्रयासों के तहत अमेरिकी नौसेना बलों ने आइसलैंड के पास मरीनेरा पर चढ़ाई की। इसके बाद जहाज से संपर्क टूट गया।

संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का जिक्र

रूस ने 1982 के United Nations Convention on the Law of the Sea का हवाला दिया है। रूस का कहना है कि खुले समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता लागू होती है और किसी भी देश को दूसरे देश के विधिवत पंजीकृत जहाज के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।

समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से मांग की है कि जहाज पर मौजूद रूसी चालक दल के सदस्यों के साथ मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी जल्द से जल्द सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।

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