छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) के रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में किए गए अध्ययन में स्मार्ट मीटर से बिजली खपत बढ़ने के दावों को खारिज किया गया है। सर्वे के अनुसार जुलाई 2026 में अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
रायपुर: स्मार्ट मीटर को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने तीन प्रमुख शहरों में बिजली खपत का तुलनात्मक अध्ययन किया है। मई, जून और जुलाई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली की खपत नहीं बढ़ती, बल्कि जुलाई में अधिकांश उपभोक्ताओं की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के अध्ययन में क्या सामने आया
स्मार्ट मीटर को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच CSPDCL ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली खपत का विस्तृत विश्लेषण कराया। अध्ययन का उद्देश्य यह जानना था कि क्या स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली की खपत वास्तव में बढ़ रही है या नहीं।

रायपुर में 3.11 लाख से अधिक घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इसमें 1 जून से 26 जून 2026 के दौरान कुल बिजली खपत लगभग 10.85 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी, जबकि 1 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के बीच यह घटकर 7.77 करोड़ यूनिट रह गई। यानी जुलाई में कुल खपत में लगभग 28 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
इसी तरह 400 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले 1.21 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के विश्लेषण में भी बिजली खपत में करीब 44 प्रतिशत की कमी सामने आई। कंपनी का कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि बिजली बिल का आधार वास्तविक खपत है, न कि स्मार्ट मीटर।
दुर्ग और बिलासपुर में भी घटी बिजली खपत
दुर्ग शहर में 400 यूनिट से अधिक मासिक खपत वाले 240 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में जुलाई 2026 के दौरान कुल खपत 76,257 यूनिट रही, जबकि जून में यह 1,65,411 यूनिट और मई में 1,75,451 यूनिट थी। इस तरह जुलाई में बिजली खपत में लगभग 53 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
वहीं बिलासपुर सिटी सर्किल के 9,717 उपभोक्ताओं के आंकड़ों के अनुसार मई में औसत खपत 524 यूनिट, जून में 596 यूनिट और जुलाई में घटकर 312 यूनिट रह गई। यानी जुलाई के दौरान औसत बिजली खपत में करीब 43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कंपनी का कहना है कि मई और जून में गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और अन्य बिजली उपकरणों का अधिक उपयोग हुआ, जबकि जुलाई में मौसम बदलने के साथ खपत स्वाभाविक रूप से कम हो गई। यही कारण है कि सामान्य मीटर वाले कई उपभोक्ताओं की खपत में भी इसी अवधि के दौरान कमी देखी गई।
भ्रम दूर करने के लिए कंपनी ने दी ये जानकारी
CSPDCL ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर केवल वास्तविक बिजली खपत को रिकॉर्ड करते हैं और उससे खपत अपने आप नहीं बढ़ती। कंपनी के अनुसार अब तक लगाए गए 4,500 चेक मीटरों में दर्ज रीडिंग और स्मार्ट मीटर की रीडिंग समान पाई गई है, जिससे मीटरों की सटीकता की पुष्टि होती है।
बिजली कंपनी ने यह भी बताया कि स्वीकृत भार से लगातार अधिक बिजली उपयोग करने पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब यह राशि वर्ष में केवल एक बार दिसंबर माह के बिल (जो जनवरी में जारी होगा) में जोड़ी जाएगी।
उपभोक्ता 'मोर बिजली' ऐप और स्मार्ट मीटर पोर्टल के माध्यम से अपनी दैनिक तथा प्रत्येक आधे घंटे की बिजली खपत की जानकारी देख सकते हैं। वहीं बिजली बिल या स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी शिकायत या संदेह के समाधान के लिए टोल-फ्री नंबर 1912 पर संपर्क किया जा सकता है।
कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें। CSPDCL का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराई जाती रहेगी, ताकि स्मार्ट मीटर को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम दूर किया जा सके।











