संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए नए गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव, भारत ने जताया सहयोग का भरोसा

UN Security Council News: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नए गैर-स्थायी सदस्यों के चुनाव के बाद भारत ने सभी निर्वाचित देशों को बधाई देते हुए सहयोग और वैश्विक

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2027-28 कार्यकाल के लिए Austria, Kyrgyzstan, Portugal, Trinidad and Tobago और Zimbabwe को United Nations Security Council (यूएनएससी) के गैर-स्थायी सदस्य के रूप में चुना है। इन देशों का कार्यकाल 2027 से 2028 तक रहेगा।

World News: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2027-28 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच नए गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव कर लिया है। इस चुनाव में ऑस्ट्रिया, किर्गिस्तान, पुर्तगाल, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा जिम्बाब्वे को सुरक्षा परिषद की सदस्यता मिली है। इन देशों का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होकर 31 दिसंबर 2028 तक चलेगा।

नए सदस्यों के चयन के बाद भारत ने सभी विजयी देशों को बधाई दी और वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देशों द्वारा गोपनीय मतदान के माध्यम से संपन्न हुआ।

भारत ने दी शुभकामनाएं

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने नव-निर्वाचित देशों को बधाई देते हुए कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनके साथ निकट सहयोग की अपेक्षा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद वैश्विक चुनौतियों से निपटने में केंद्रीय भूमिका निभाती है और नए सदस्य इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुधारों और सुरक्षा परिषद में अधिक प्रतिनिधित्व की वकालत करता रहा है। ऐसे में नए सदस्यों के साथ सहयोग को भारत अपनी बहुपक्षीय कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।

कौन-कौन से देश बने नए सदस्य?

इस चुनाव में विभिन्न क्षेत्रीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों को चुना गया। यूरोपीय समूह से ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल ने सफलता हासिल की। एशिया-प्रशांत क्षेत्र से किर्गिस्तान को पहली बार सुरक्षा परिषद की सदस्यता मिली, जो उसके लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। अफ्रीकी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व जिम्बाब्वे करेगा, जबकि लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र से त्रिनिदाद और टोबैगो को परिषद में स्थान मिला है। इन देशों को अंतरराष्ट्रीय शांति, संघर्ष समाधान, मानवीय सहायता और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की जिम्मेदारी मिलेगी।

जर्मनी को लगा अप्रत्याशित झटका

इस चुनाव का सबसे चर्चित परिणाम जर्मनी की हार रही। पश्चिमी यूरोपीय और अन्य राज्यों के समूह में जर्मनी सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट हासिल करने में सफल नहीं हो सका। ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल ने अपेक्षाकृत अधिक समर्थन प्राप्त करते हुए सीटें जीत लीं। विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम जर्मनी की विदेश नीति और उसकी हालिया वैश्विक कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर भी चर्चा को जन्म दे सकता है। 

जर्मनी लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करने वाले देशों में शामिल रहा है, इसलिए यह हार उसके लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत मानी जा रही है।

किर्गिस्तान के लिए ऐतिहासिक अवसर

किर्गिस्तान की जीत विशेष रूप से उल्लेखनीय रही क्योंकि यह पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य बनेगा। मध्य एशिया के इस देश के लिए यह अवसर वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा परिषद में किर्गिस्तान की मौजूदगी मध्य एशिया के क्षेत्रीय मुद्दों और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को अधिक प्रमुखता दिलाने में मदद कर सकती है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को विश्व शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी दी गई है। परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें पांच स्थायी सदस्य और 10 गैर-स्थायी सदस्य शामिल हैं। गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है। सुरक्षा परिषद युद्ध, संघर्ष, प्रतिबंध, शांति मिशनों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने वाली सबसे प्रभावशाली वैश्विक संस्था मानी जाती है। इसलिए इसके सदस्य देशों का चयन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में विशेष महत्व रखता है।

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