अजमेर के नसीराबाद में विवाहिता की गला घोंटकर हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया। पुलिस जांच में सच्चाई सामने आई। दहेज के लिए 10 लाख की मांग को लेकर पति समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले के नसीराबाद क्षेत्र में एक विवाहिता की संदिग्ध मौत के मामले ने अब एक गंभीर हत्या का रूप ले लिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि महिला ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसकी गला घोंटकर हत्या की गई थी और बाद में उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
इस मामले में पुलिस ने पति, सास, ससुर और ननद को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों पर दहेज हत्या और साक्ष्य छिपाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कैसे सामने आया पूरा मामला?
यह घटना 28 मई को सामने आई थी, जब नसीराबाद के काली माई मोहल्ला से पुलिस को सूचना मिली कि 24 वर्षीय विवाहिता सोनिया की मौत फांसी लगाने से हुई है।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया। प्रारंभिक रूप से मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा था, लेकिन मृतका के परिवार ने इसे संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की।
पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच से हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल (Forensic Science Laboratory) और एमओबी (Mobile Crime Unit) की टीम को जांच में शामिल किया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि महिला की मौत फांसी से नहीं, बल्कि गला घोंटकर हत्या करने से हुई थी। इसके बाद शव को लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी।
यह खुलासा होने के बाद पुलिस ने मामले को दहेज हत्या में बदल दिया और जांच तेज कर दी।
दहेज के लिए प्रताड़ना और लगातार दबाव के आरोप
मृतका के पिता ने पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि उनकी बेटी सोनिया की शादी 22 नवंबर 2024 को जयंत नामक युवक से हुई थी, जो नसीराबाद के काली माई मोहल्ला का निवासी है।
शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा सोनिया को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा था। परिवार का आरोप है कि उससे लगातार 10 लाख रुपये नकद लाने की मांग की जाती थी।
इसके अलावा, संतान न होने को लेकर भी उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था और लगातार ताने दिए जाते थे।
मौत से पहले हुई थी फोन पर बातचीत
पिता के अनुसार, घटना वाले दिन 28 मई की दोपहर करीब 2 बजे उनकी बेटी से फोन पर बातचीत हुई थी। उस समय वह पूरी तरह सामान्य और ठीक स्थिति में थी।
लेकिन शाम को पुलिस ने सूचना दी कि सोनिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और उन्होंने तत्काल नसीराबाद पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

इन सभी पर दहेज हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जांच अधिकारी का बयान
जांच अधिकारी सत्यप्रकाश ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा था, लेकिन फॉरेंसिक साक्ष्यों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने सच्चाई उजागर कर दी।
उन्होंने कहा कि आरोपियों ने हत्या के बाद पूरे मामले को आत्महत्या के रूप में दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन वैज्ञानिक जांच में उनकी यह साजिश विफल हो गई।
दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा पर फिर सवाल
यह मामला एक बार फिर दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा की गंभीरता को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा अक्सर घरेलू स्तर पर दबा दी जाती है और कई बार इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जाती है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि दहेज से जुड़े अपराध आज भी समाज में गंभीर समस्या बने हुए हैं और इसके खिलाफ सख्त सामाजिक और कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और अन्य फॉरेंसिक सबूतों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी या यह किसी तत्काल विवाद का परिणाम था।
न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी कार्रवाई
चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब मामले की सुनवाई दहेज हत्या और हत्या के गंभीर धाराओं के तहत होगी।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषियों को आजीवन कारावास या कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।












