सोलन में डेढ़ साल बाद एक साथ आए पानी के हजारों रुपये के बिल किसी को 26 हजार का बिल

सोलन में जलशक्ति विभाग ने करीब डेढ़ साल बाद मई 2024 से मार्च 2026 तक के पानी के बिल एक साथ जारी किए। लोगों को 10 से 26 हजार रुपये तक के बिल मिले।
सोलन में डेढ़ साल बाद एक साथ आए पानी के हजारों रुपये के बिल किसी को 26 हजार का बिल
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हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर में जलशक्ति विभाग की ओर से करीब डेढ़ साल के अंतराल के बाद एक साथ पानी के बिल जारी किए जाने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। लंबे समय से नियमित बिल नहीं मिलने के बाद जब लोगों के घर हजारों रुपये की राशि वाले बिल पहुंचे तो कई परिवारों के सामने एकमुश्त भुगतान की चिंता खड़ी हो गई। लोगों का कहना है कि विभाग की ओर से मई 2024 से मार्च 2026 तक की अवधि के बिल अब एक साथ भेजे गए हैं और भुगतान की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 रखी गई है। ऐसे में उपभोक्ताओं को कम समय में बड़ी राशि जमा करने का दबाव महसूस हो रहा है।

सोलन के विकास मोहल्ला सहित कई इलाकों के लोगों ने इस मामले पर नाराजगी जताई है। उपभोक्ताओं के अनुसार, कई परिवारों को 10 हजार से 15 हजार रुपये तक के पानी के बिल मिले हैं। वहीं एक उपभोक्ता ने बताया कि उसके नाम करीब 26 हजार रुपये का बिल जारी किया गया है। सामान्य तौर पर पानी का बिल नियमित अंतराल पर आने से परिवार अपनी आय और घरेलू खर्च के हिसाब से उसका भुगतान कर सकते हैं, लेकिन लंबे अंतराल के बाद कई महीनों की राशि एक साथ आने से लोगों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

लोगों का कहना है कि पानी जैसी जरूरी सेवा का बिल लंबे समय तक जारी नहीं हुआ तो इसमें उपभोक्ताओं की कोई भूमिका नहीं है। अब जब विभाग ने पुराने समय का बिल एक साथ जारी किया है, तो हजारों रुपये की राशि एकमुश्त जमा करना कई परिवारों के लिए मुश्किल हो सकता है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि बिल नियमित रूप से जारी किए जाते तो इतनी बड़ी राशि एक साथ जमा करने की स्थिति नहीं बनती। इसी वजह से लोग विभाग से बिलों के भुगतान में राहत देने की मांग कर रहे हैं।

विकास मोहल्ला कल्याण समिति ने भी इस मामले को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। समिति के प्रधान कंवर मनोहर सिंह ने सरकार और संबंधित विभाग से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। समिति का कहना है कि लंबे समय तक बिल नहीं भेजे जाने के बाद अचानक हजारों रुपये के बिल जारी करने से आम परिवारों के घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है। समिति की ओर से मांग की गई है कि लोगों को इतनी बड़ी राशि एक साथ जमा करवाने के बजाय किश्तों में भुगतान करने की सुविधा दी जाए।

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि परिवारों के रोजमर्रा के खर्च पहले से तय होते हैं। बच्चों की स्कूल फीस, घर का राशन, बिजली का बिल, दवाइयां और अन्य जरूरी खर्चों के बीच अचानक 10 से 15 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना आसान नहीं है। जिन उपभोक्ताओं के बिल इससे भी अधिक आए हैं, उनके लिए परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि विभाग को उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भुगतान के लिए पर्याप्त समय और किस्तों का विकल्प देना चाहिए।

लोगों की नाराजगी केवल बिल की राशि को लेकर नहीं है, बल्कि बिल जारी करने में हुई देरी को लेकर भी है। उपभोक्ताओं का तर्क है कि यदि मई 2024 से मार्च 2026 तक की अवधि का भुगतान नियमित रूप से अलग-अलग बिलों में किया जाता तो प्रत्येक महीने या निर्धारित अवधि के हिसाब से राशि जमा की जा सकती थी। लेकिन अब लंबे अंतराल के बाद पूरा बकाया एक साथ सामने आने से उपभोक्ताओं को अपनी आर्थिक योजना बदलनी पड़ रही है।

जलशक्ति विभाग की ऑनलाइन बिलिंग व्यवस्था में अलग-अलग जलापूर्ति क्षेत्रों के बिल पीरियड और भुगतान की तारीखें दर्ज की जाती हैं। विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर भी अलग-अलग सेक्शन के पानी के बिलों की अवधि और देय तिथियां प्रदर्शित होती हैं। इससे यह स्पष्ट है कि विभाग के स्तर पर जल बिलिंग की ऑनलाइन व्यवस्था मौजूद है, हालांकि सोलन के इस मामले में उपभोक्ताओं ने लंबे समय तक बिल न मिलने और फिर एक साथ राशि आने पर सवाल उठाए हैं।

सोलन शहर में पानी की आपूर्ति से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए बिल केवल भुगतान का दस्तावेज नहीं है, बल्कि हर महीने के घरेलू बजट का हिस्सा भी होता है। जब बिल समय पर आता है तो परिवार उसी के अनुसार भुगतान की व्यवस्था कर लेते हैं। लेकिन डेढ़ साल तक नियमित बिल नहीं आने के बाद अचानक हजारों रुपये की देनदारी सामने आने से लोगों के सामने आर्थिक प्रबंधन की समस्या पैदा हुई है। खासकर मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों के लिए एक साथ इतनी राशि जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

विकास मोहल्ला कल्याण समिति और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि विभाग इस मामले में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए व्यावहारिक व्यवस्था बनाए। लोगों का कहना है कि जिन उपभोक्ताओं को 10, 15 या उससे अधिक हजार रुपये के बिल मिले हैं, उनसे पूरी राशि एक ही बार में लेने के बजाय किस्तों में भुगतान की अनुमति दी जाए। इससे विभाग का बकाया भी जमा हो सकेगा और लोगों पर अचानक आर्थिक दबाव भी नहीं पड़ेगा।

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि विभाग यह स्पष्ट करे कि बिल जारी होने में इतनी लंबी देरी क्यों हुई। उपभोक्ता यह जानना चाहते हैं कि क्या बिलिंग प्रक्रिया में तकनीकी समस्या थी, कर्मचारियों की कमी थी या किसी अन्य प्रशासनिक कारण से नियमित बिल जारी नहीं हो सके। लोगों के अनुसार, यदि देरी विभागीय स्तर पर हुई है तो उसका पूरा आर्थिक भार उपभोक्ताओं पर एक साथ डालना उचित नहीं होगा। फिलहाल इस संबंध में विभाग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण की जानकारी सामने नहीं आई है।

पानी का बिल लंबे समय तक जमा नहीं होने पर उपभोक्ताओं के खाते में राशि जमा होती रहती है। यदि कई महीनों की राशि एक साथ जोड़ दी जाए तो अंतिम बिल स्वाभाविक रूप से बड़ा दिखाई दे सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए बिल की अवधि, मीटर रीडिंग और निर्धारित शुल्क की जानकारी समझना भी जरूरी हो जाता है। जिन लोगों को बिल की राशि में कोई आपत्ति है, वे विभाग से बिल का विवरण और संबंधित अवधि की जानकारी मांग सकते हैं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी मांग यही है कि उपभोक्ताओं को एकमुश्त भुगतान के बजाय किस्तों में भुगतान का विकल्प मिले। स्थानीय समिति ने सरकार से हस्तक्षेप करने और जलशक्ति विभाग को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। समिति का कहना है कि विभागीय देरी के कारण पैदा हुए आर्थिक बोझ को देखते हुए लोगों को भुगतान के लिए राहत मिलनी चाहिए।

सोलन के लोगों का कहना है कि पानी रोजमर्रा की सबसे जरूरी सुविधाओं में शामिल है और इसका बिल भी समय पर तथा व्यवस्थित तरीके से जारी होना चाहिए। लंबे समय तक बिल नहीं आने के बाद अचानक भारी राशि के बिल पहुंचने से उपभोक्ताओं में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जलशक्ति विभाग और सरकार उनकी मांग पर क्या कदम उठाते हैं और क्या हजारों रुपये की इस राशि को किश्तों में जमा करने की सुविधा दी जाती है। फिलहाल स्थानीय स्तर पर उपभोक्ताओं ने एकमुश्त भुगतान के बजाय राहत और किस्तों की व्यवस्था की मांग को प्रमुखता से उठाया है।

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