वैज्ञानिकों ने ऐसा लाइट-चार्ज्ड एयर प्यूरीफायर फिल्टर विकसित किया है, जो धूप और LED लाइट से दोबारा चार्ज हो सकता है। इसे पानी से धोकर फिर इस्तेमाल किया जा सकता है और भविष्य में इसी तकनीक से रीयूजेबल N95 मास्क बनाए जा सकते हैं।
Tech: Rechargeable Air Purifier, Solar Air Purifier, LED Light, Air Pollution: बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच वैज्ञानिकों ने ऐसा नया एयर प्यूरीफायर फिल्टर विकसित किया है, जिसे चार्ज करने के लिए पारंपरिक बिजली की जरूरत नहीं पड़ती। यह सूरज की रोशनी और सामान्य LED लाइट से चार्ज होकर हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों को पकड़ने में मदद करता है।
धूप और LED लाइट से चार्ज होता है फिल्टर
बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सामान्य एयर प्यूरीफायर में बिजली की खपत और फिल्टर बदलने का खर्च लोगों के लिए बड़ी चुनौती रहता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने एक नई लाइट-चार्ज्ड फिल्ट्रेशन तकनीक विकसित की है।

चीन की जिलिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसा फिल्टर तैयार किया है, जो सूरज की रोशनी के साथ-साथ घर में इस्तेमाल होने वाली LED लाइट से भी दोबारा चार्ज हो सकता है। इस शोध के नतीजे वैज्ञानिक जर्नल Chem में प्रकाशित हुए हैं। इस तकनीक की खासियत यह है कि फिल्टर को बार-बार बदलने के बजाय पानी से धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
पॉलिप्रोपाइलीन झिल्ली पर खास कोटिंग
इस नए सिस्टम में पॉलिप्रोपाइलीन की एक झिल्ली का इस्तेमाल किया गया है, जिस पर विशेष सामग्री की कोटिंग की गई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक रोशनी और गर्मी मिलने पर यह कोटिंग इलेक्ट्रिक चार्ज पैदा करती है। यह चार्ज हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों को फिल्टर की ओर आकर्षित करने में मदद करता है।
इस तरह फिल्टर हवा से प्रदूषण फैलाने वाले छोटे कणों को पकड़ने में सक्षम होता है। खास बात यह है कि इसके लिए लगातार बाहरी बिजली की आपूर्ति की जरूरत नहीं होती। धूप या इनडोर LED लाइट के संपर्क में रखने से फिल्टर दोबारा चार्ज किया जा सकता है।
लंबे समय तक बनी रही सफाई क्षमता
रिसर्च में फिल्टर की लंबे समय तक काम करने की क्षमता का भी परीक्षण किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने के इस्तेमाल के बाद फिल्टर ने करीब 99 प्रतिशत सफाई क्षमता बरकरार रखी। इसके बाद अगले दो महीनों तक भी इसकी प्रभावशीलता करीब 95 प्रतिशत रही।
इसका मतलब है कि फिल्टर को लंबे समय तक इस्तेमाल करने की संभावना है। जब इसमें धूल और दूसरे कण जमा हो जाएं तो इसे पानी से धोया जा सकता है। सफाई के बाद इसे दोबारा धूप या LED लाइट के संपर्क में रखकर चार्ज किया जा सकता है।
N95 मास्क में भी हो सकता है इस्तेमाल
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में केवल एयर प्यूरीफायर तक सीमित नहीं रहेगा। वैज्ञानिकों ने इसी फिल्टर तकनीक का इस्तेमाल करके फेस मास्क, खिड़कियों की जालियों और कुछ बायोलॉजिकल उपकरणों के प्रोटोटाइप भी तैयार किए हैं।
खास तौर पर इस तकनीक से ऐसे N95 फेस मास्क विकसित किए जा सकते हैं, जिन्हें धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। इससे डिस्पोजेबल मास्क पर निर्भरता और फिल्ट्रेशन उत्पादों से बनने वाले कचरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की तैयारी
शोधकर्ताओं का अगला लक्ष्य फिल्टर की सेल्फ-क्लीनिंग क्षमता को और बेहतर बनाना है। इसके बाद तकनीक को बड़े स्तर पर तैयार करने और अलग-अलग परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता जांचने पर काम किया जा सकता है।
अगर यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है तो कम बिजली वाले या ऑफ-ग्रिड इलाकों में एयर फिल्ट्रेशन के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है। हालांकि, बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले इसकी वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावशीलता, टिकाऊपन और सुरक्षा का विस्तृत परीक्षण जरूरी होगा।









