Som Pradosh Vrat 2026 30 मार्च को मनाया जाएगा, जिसका धार्मिक महत्व खास माना जाता है। प्रदोष काल में पूजा, शिव मंत्र जाप, शिवलिंग पर विशेष अर्पण, नटराज स्तुति और दान करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
Som Pradosh Vrat: 30 मार्च को चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के अवसर पर देशभर में सोम प्रदोष व्रत मनाया जाएगा, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु प्रदोष काल में पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करते हैं ताकि शिव कृपा प्राप्त हो सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार के दिन पड़ने से इस व्रत का महत्व बढ़ जाता है और यह मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
प्रदोष काल में पूजा का सही समय और महत्व
सोम प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में ही करने का विशेष महत्व बताया गया है। 30 मार्च को यह शुभ मुहूर्त करीब 2 घंटे 19 मिनट का रहेगा, जो साधना और उपासना के लिए पर्याप्त समय देता है। इस दौरान की गई पूजा को कई गुना अधिक फल देने वाला माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसलिए इस समय का सही उपयोग करना जरूरी माना गया है।

शिव मंत्र जाप से बढ़ेगी आध्यात्मिक शक्ति
सोम प्रदोष व्रत के दौरान शिव मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। “ॐ नमः शिवाय” से लेकर महामृत्युंजय मंत्र तक, ये मंत्र मन को शांति देते हैं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार नियमित और श्रद्धा से किया गया मंत्र जाप व्यक्ति की मानसिक स्थिति को मजबूत करता है और जीवन में संतुलन लाता है। प्रदोष व्रत के दिन इन मंत्रों का जाप करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शिवलिंग पर ये चीजें चढ़ाना माना जाता है शुभ
इस दिन सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करने के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करना पूजा की शुरुआत मानी जाती है। इसके बाद चंदन, बेलपत्र, धतूरा, गन्ने का रस और शहद अर्पित करना शुभ माना गया है।
हालांकि पूजा के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। जैसे तुलसी, शंख, केतकी और केवड़ा के फूलों का प्रयोग शिव पूजा में वर्जित माना गया है। इन नियमों का पालन करने से पूजा का पूर्ण फल मिलता है।
नटराज स्तुति और दान का विशेष महत्व
सोम प्रदोष व्रत पर नटराज स्तुति का पाठ करने की भी परंपरा है। यह स्तुति भगवान शिव के तांडव रूप की महिमा का वर्णन करती है और भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
इसके अलावा, इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, सफेद वस्त्र और मौसमी फलों का दान करते हैं। मान्यता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।








