जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुरू, NEET पेपर लीक पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और CBSE गड़बड़ियो के विरोध मे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक ने NEET पेपर लीक और CBSE गड़बड़ियों के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि आंदोलन में छात्रों, किसानों और कई संगठनों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।

नई दिल्ली: शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। यह कदम मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET से जुड़े कथित पेपर लीक विवाद और शिक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन का हिस्सा है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही है, जिसने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार आंदोलन जारी रखा है। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

भूख हड़ताल के साथ आंदोलन ने लिया नया मोड़

रविवार को जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक ने दो मिनट का मौन रखकर अपने अनिश्चितकालीन अनशन की शुरुआत की। उनके साथ कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी मौजूद रहे।

अनशन शुरू करने से पहले दोनों नेताओं ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और अहिंसक आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और नागरिक समाज के सदस्य प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। आंदोलनकारियों का कहना है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं।

NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल

प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और विभिन्न परीक्षा प्रक्रियाओं में सामने आई अनियमितताओं को लेकर है।

प्रदर्शनकारी दावा कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े कई मामलों की जांच संबंधित एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत चल रही है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

कॉकरोच जनता पार्टी पिछले कई दिनों से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा मंत्रालय को परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। संगठन का दावा है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक छात्रों का विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं हो सकेगा। वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रदर्शन में छात्रों और किसानों की भागीदारी

जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि विभिन्न किसान संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। आयोजकों का कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दे केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे समाज और देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसी कारण विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है।

सोनम वांगचुक की भूमिका और सामाजिक सक्रियता

सोनम वांगचुक लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर भी कई आंदोलन किए। इन्हीं आंदोलनों के दौरान उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, लद्दाख आंदोलन के दौरान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। उस समय सरकार ने उन पर कानून-व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप लगाए थे, जबकि वांगचुक और उनके समर्थकों ने इन आरोपों से असहमति जताई थी।

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बयानबाजी

आंदोलन के दौरान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि कुछ समूह जानबूझकर शिक्षा व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार ऐसे तत्वों पर नजर रख रही है।

इसके जवाब में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि आंदोलन में शामिल लोग करदाता नागरिक हैं और वे शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से आंदोलनकारियों के प्रति सम्मानजनक संवाद की अपील भी की।

कॉकरोच जनता पार्टी कैसे चर्चा में आई

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का गठन इस वर्ष उस समय चर्चा में आया, जब न्यायपालिका की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर इस नाम से अभियान शुरू किया गया।

इसके बाद संगठन ने शिक्षा सुधार, परीक्षा पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर डिजिटल अभियान चलाया। सोशल मीडिया पर संगठन को बड़ी संख्या में समर्थक मिलने का दावा किया गया। हालांकि, संगठन किसी पारंपरिक राजनीतिक दल की तरह चुनावी गतिविधियों में सक्रिय नहीं है और स्वयं को एक जन-अभियान के रूप में प्रस्तुत करता है।

शिक्षा सुधार पर राष्ट्रीय बहस

विशेषज्ञों का मानना है कि NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने भारत की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही पर व्यापक बहस शुरू कर दी है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने, तकनीकी निगरानी बढ़ाने और लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक सुधार आवश्यक हैं। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि छात्रों का विश्वास बनाए रखने के लिए समयबद्ध जांच और पारदर्शी कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होगी।

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