सोनभद्र समेत उत्तर प्रदेश की छह सरकारी बिजली उत्पादन इकाइयां कोयला भीगने और तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं। इससे 2535 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है और बढ़ती मांग के बीच बिजली आपूर्ति बनाए रखना चुनौती बन गया है।
ओबरा: सोनभद्र सहित उत्तर प्रदेश की सरकारी बिजली परियोजनाओं में उत्पादन प्रभावित होने से बिजली प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। कोयला भीगने, तकनीकी खराबी और बारिश से जुड़ी अन्य समस्याओं के कारण छह उत्पादन इकाइयां बंद हैं, जिससे कुल 2535 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है।
छह सरकारी बिजली इकाइयां बंद होने से उत्पादन पर असर
उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बदल रही है। ऐसे समय में सरकारी क्षेत्र की कई उत्पादन इकाइयों के बंद होने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। सोनभद्र के ओबरा समेत प्रदेश की विभिन्न ताप विद्युत परियोजनाओं की छह इकाइयां फिलहाल बंद हैं, जिसके कारण कुल 2535 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। सरकारी बिजली परियोजनाओं से अपेक्षाकृत कम लागत पर बिजली उपलब्ध होती है, इसलिए इन इकाइयों का बंद होना ऊर्जा प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

बीते 2 जुलाई से 4 अगस्त के बीच अलग-अलग कारणों से कई सरकारी इकाइयों में उत्पादन बाधित होता रहा। कुछ इकाइयों से बीच-बीच में उत्पादन दोबारा शुरू किया गया, लेकिन बुधवार सुबह तक घाटमपुर, जवाहरपुर, हरदुआगंज और ओबरा की छह इकाइयां बंद होने के कारण उत्पादन पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका।
बारिश और भीगा कोयला बन रहा बड़ी समस्या
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार मानसून के दौरान बिजली परियोजनाओं को मिलने वाला कोयला अक्सर भीग जाता है। भीगा हुआ कोयला बॉयलर में प्रभावी ढंग से नहीं जल पाता, जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। कई बार लो फ्लेम की स्थिति बनने के कारण इकाइयों को पूरी क्षमता से चलाना संभव नहीं हो पाता।
इसके अलावा बारिश के मौसम में शीतलन के लिए उपयोग किए जाने वाले पानी में सिल्ट की मात्रा बढ़ जाती है। अधिक सिल्ट होने से कूलिंग सिस्टम और अन्य उपकरणों के संचालन पर असर पड़ता है, जिससे तकनीकी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। यही वजह है कि मानसून के दौरान ताप विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन प्रभावित होने की घटनाएं अधिक देखने को मिलती हैं।
किन परियोजनाओं की इकाइयां हैं बंद
बुधवार सुबह तक हरदुआगंज ताप विद्युत परियोजना की इकाई संख्या 9 से 2 जुलाई से उत्पादन बंद है। वहीं ओबरा 'सी' परियोजना की पहली इकाई 9 जुलाई से डीसीएस (Distributed Control System) फेल होने के कारण बंद पड़ी है। इसके अलावा हरदुआगंज की इकाई संख्या 7, घाटमपुर की इकाई संख्या 1, जवाहरपुर की इकाई संख्या 1 और ओबरा 'बी' परियोजना की इकाई संख्या 9 से भी बिजली उत्पादन ठप है।
इन सभी इकाइयों में तकनीकी सुधार और आवश्यक मरम्मत का कार्य जारी है। बिजली उत्पादन कंपनियां इन्हें जल्द दोबारा चालू करने के प्रयास में जुटी हैं ताकि उत्पादन क्षमता सामान्य हो सके।
उत्पादन बहाल करने के प्रयास जारी
बिजली विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार बंद इकाइयों में मरम्मत और तकनीकी खामियों को दूर करने का काम तेजी से किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इनमें से कुछ इकाइयों से अगले एक-दो दिनों में दोबारा बिजली उत्पादन शुरू हो सकता है। उत्पादन बहाल होने के बाद प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और बेहतर तरीके से संतुलित किया जा सकेगा। हालांकि, यदि बारिश का असर और तकनीकी चुनौतियां बनी रहती हैं, तो बिजली उत्पादन पर दबाव कुछ समय तक जारी रह सकता है।










