South Zonal Council Meeting: परिसीमन और जल विवाद पर दक्षिणी राज्यों की चिंता, अमित शाह के सुझाव पर बनी सहमति

South Zonal Council Meeting में परिसीमन और जल विवाद समेत दक्षिणी राज्यों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अमित शाह के सुझावों पर राज्यों के बीच सहमति बनी।

दक्षिण भारत के राज्यों ने अंतरराज्यीय जल विवादों को बातचीत और आपसी सहमति के जरिए जल्द सुलझाने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सुझाव का समर्थन किया है।

South Zonal Council Meeting 2026: दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में अंतरराज्यीय जल विवाद, लोकसभा सीटों के परिसीमन, बुनियादी ढांचे और राज्यों के बीच सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों ने अंतरराज्यीय जल विवादों को बातचीत और नियमित समन्वय के जरिए सुलझाने के सुझाव का समर्थन किया।

बैठक में दक्षिणी राज्यों ने परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं भी सामने रखीं। खासतौर पर कर्नाटक और तमिलनाडु की ओर से लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या को लंबे समय तक बनाए रखने की मांग उठाई गई। दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से उन राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर नुकसान हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और विकास के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन किया है।

अमित शाह ने जल विवादों के समाधान पर दिया जोर

दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में अमित शाह ने राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे नदी जल विवादों को जल्द सुलझाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपने हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यदि किसी विवाद के कारण वर्षों तक पानी का उपयोग नहीं हो पाता और जल समुद्र में बह जाता है, तो इससे किसी भी राज्य को वास्तविक लाभ नहीं मिलता।

गृह मंत्री ने राज्यों से बातचीत, संयुक्त बैठकों और आपसी समन्वय के जरिए विवादों का समाधान तलाशने का आग्रह किया। उनका जोर सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने पर रहा, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग व्यापक राष्ट्रीय हित में किया जा सके।

नदियों को जोड़ने की योजना पर जोर

अमित शाह ने देश में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत पर भी चर्चा की। उन्होंने ब्रह्मपुत्र से लेकर कावेरी और गोदावरी तक प्रमुख नदियों को जोड़ने की संभावनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ऐसी दीर्घकालिक योजनाओं से देश को भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिल सकती है और कई क्षेत्रों में जलमार्गों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। उन्होंने उत्तर भारत में पुराने अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान का उदाहरण देते हुए राज्यों के बीच संवाद और समझौते को प्रभावी रास्ता बताया।

परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता

बैठक में लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या आधारित सीट पुनर्वितरण से उनकी संसद में मौजूदा हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। कर्नाटक और तमिलनाडु की ओर से लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग रखी गई। 

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कथित तौर पर एक प्रस्ताव के जरिए केंद्र से 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के लिए प्रस्तावित आरक्षण को मौजूदा लोकसभा सीटों के भीतर लागू करने का सुझाव भी रखा। यह मुद्दा दक्षिणी राज्यों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व और जनसंख्या नीति से जुड़ा संवेदनशील विषय बन चुका है।

मेकेदातु परियोजना पर कर्नाटक का आश्वासन

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु को मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर आश्वासन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े किसी भी कदम में तमिलनाडु और पुडुचेरी के हितों का ध्यान रखा जाएगा। हालांकि, बैठक में कावेरी जल बंटवारे से जुड़े विवाद पर विस्तार से चर्चा नहीं हुई। तमिलनाडु की ओर से स्पष्ट किया गया कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण से संबंधित मामलों को इस बैठक के एजेंडे में नहीं उठाया गया।

आंध्र प्रदेश ने बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। इसके तहत आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले संभावित रेल नेटवर्क की बात सामने आई। उन्होंने अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले ट्रांजिट नेटवर्क का भी सुझाव दिया। ऐसे प्रोजेक्ट दक्षिण भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा और व्यापार को गति दे सकते हैं।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने परिसंपत्तियों तथा देनदारियों के बंटवारे से जुड़े लंबित मामलों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई।

केरल और तेलंगाना ने उठाए जल संबंधी मुद्दे

केरल की ओर से मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा उठाया गया। राज्य नेतृत्व ने स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमारका ने कृष्णा नदी के पानी पर राज्य के अधिकारों की सुरक्षा की मांग रखी। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग की अपील भी की।

पुडुचेरी ने सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से तमिलनाडु, के साथ सहयोग बढ़ाने की मांग की। साथ ही एकीकृत सतही जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

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