अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका जल्द होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रण में ले सकता है। उन्होंने ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही। ट्रंप ने परमाणु हथियार रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को अपने नियंत्रण में ले सकता है। ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी बड़ा दावा किया और कहा कि देश की नौसेना, वायुसेना और सैन्य नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक, ईरान के पास अब सीमित संख्या में मिसाइल और ड्रोन ही बचे हैं। ट्रंप ने यह बयान अमेरिकी रेडियो नेटवर्क 77 WABC को दिए एक इंटरव्यू के दौरान दिया। उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। ट्रंप के मुताबिक, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी।
हालांकि, ट्रंप के दावों और ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन बयानों को अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा बयान
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के ऊर्जा कारोबार के लिए इस समुद्री मार्ग का विशेष महत्व है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन इसी रास्ते से होता है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रण में लेने की स्थिति में हो सकता है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य और आर्थिक तनाव काफी बढ़ा हुआ है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। इस समुद्री मार्ग में तनाव बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इंटरव्यू में दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के सैन्य नेतृत्व को बड़ा झटका लगा है।
ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब कुछ मिसाइल और ड्रोन ही बचे हैं। हालांकि, उन्होंने ईरान की मौजूदा सैन्य क्षमता का कोई स्वतंत्र या विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया।
ईरान की सैन्य ताकत को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच अंतर हो सकता है। ऐसे में सैन्य नुकसान और हथियारों की उपलब्धता से संबंधित किसी भी दावे का आकलन स्वतंत्र स्रोतों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना जरूरी है।
परमाणु हथियार पर अमेरिका का सख्त रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अमेरिकी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
ट्रंप ने कहा कि अगर भविष्य में ईरान की ओर से परमाणु हथियार विकसित करने का खतरा पैदा होता है तो अमेरिका फिर से कड़ा कदम उठा सकता है। इस बयान से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सैन्य विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहा है।
ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। तेहरान परमाणु हथियार बनाने के आरोपों से इनकार करता रहा है। इसी मुद्दे को लेकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।
ईरान से बातचीत को लेकर ट्रंप ने जताई मुश्किल
ट्रंप ने ईरान के साथ भविष्य में बातचीत की संभावनाओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान के कई बड़े नेता अब मौजूद नहीं हैं, जिसके कारण किसी नए समझौते पर बातचीत करना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान में प्रमुख फैसले कौन ले रहा है। उनका संकेत ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में हुए संभावित बदलावों की ओर था।
अगर दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ नेतृत्व और निर्णय लेने की व्यवस्था में भी बदलाव आता है, तो किसी संभावित कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना और अधिक जटिल हो सकता है।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी ट्रंप का दावा
ट्रंप ने ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने कहा कि ईरान आर्थिक संकट से गुजर रहा है और देश में महंगाई काफी अधिक है। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, ईरान को अपनी सेना को वेतन देने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिका लंबे समय से ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करता रहा है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था और उसके रणनीतिक कार्यक्रमों पर दबाव बढ़ाना रहा है।
हालांकि, ईरान का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद वह अपनी अर्थव्यवस्था और रणनीतिक नीतियों को जारी रखने में सक्षम है।
ईरान की मदद करने वालों को भी अमेरिकी चेतावनी
ट्रंप का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ईरान को आर्थिक मदद या समर्थन देने वाले देशों और संस्थाओं को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि दुनिया के देशों को यह तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ खड़े हैं या ईरान के साथ। इस बयान से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन केवल ईरान को ही नहीं, बल्कि उसके संभावित आर्थिक सहयोगियों को भी दबाव में लाने की रणनीति अपना रहा है।
ऐसी किसी भी कार्रवाई का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विभिन्न देशों के ईरान के साथ आर्थिक संबंधों पर पड़ सकता है।
ईरान ने अमेरिकी दबाव को किया खारिज
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव की रणनीति को खारिज किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी नीति को बेअसर बताया है।
ईरानी पक्ष का कहना है कि देश दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और केवल आर्थिक दबाव के जरिए ईरान को झुकाया नहीं जा सकता। तेहरान के मुताबिक, अमेरिकी दबाव की नीति पहले भी अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर सकी है और भविष्य में भी इसके सफल होने की संभावना कम है।
ईरान का यह रुख बताता है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशना आसान नहीं होगा।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से के लिए यह समुद्री मार्ग प्रमुख रास्ता है।
अगर इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है या समुद्री यातायात बाधित होता है, तो वैश्विक बाजारों में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। तेल आयात पर निर्भर एशियाई और यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
इसी कारण होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी सैन्य गतिविधि पर दुनिया भर की नजर रहती है। अमेरिका द्वारा इस क्षेत्र पर नियंत्रण की बात किए जाने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
ट्रंप के ताजा बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ अमेरिका सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ाने की बात कर रहा है, वहीं ईरान प्रतिबंधों के सामने नहीं झुकने का संदेश दे रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश भविष्य में बातचीत की मेज पर लौटेंगे या तनाव और सैन्य टकराव की दिशा में आगे बढ़ेंगे। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी सैन्य कदम का प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा से आगे बढ़कर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल ट्रंप के बयान ने ईरान, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच तनाव को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में अमेरिकी नीति, ईरान की प्रतिक्रिया और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।











