ब्लैक सी में भारतीय नाविकों वाले लाइबेरियाई तेल टैंकर पर समुद्री ड्रोन हमला हुआ। जहाज में आग लगने के बाद सभी 23 भारतीय नाविक सुरक्षित बचाए गए। 48 घंटे में भारतीय क्रू वाले तीन जहाजों पर हमलों से समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
मॉस्को: रूस के ब्लैक सी तट के पास एक तेल टैंकर पर समुद्री ड्रोन से हमला किए जाने के बाद जहाज में आग लग गई। लाइबेरिया के झंडे वाले इस टैंकर पर 23 लोगों का चालक दल सवार था और सभी भारतीय नागरिक थे। हमले के बाद सभी 23 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह घटना ऐसे समय हुई है जब पिछले 48 घंटे में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हमले की यह तीसरी घटना है। इससे पहले 5 और 6 अक्टूबर को ब्लैक सी और होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय क्रू वाले दो अन्य जहाजों को निशाना बनाया गया था। इन घटनाओं में 11 भारतीय घायल हुए थे।
ब्लैक सी में तेल टैंकर पर समुद्री ड्रोन से हमला
रूस के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, ब्लैक सी में रूस के रिसॉर्ट शहर सोची के पास एक तेल टैंकर को समुद्री ड्रोन ने निशाना बनाया। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और समुद्र में कच्चा तेल जलने लगा।
आग और धुएं का असर सोची के कुछ हिस्सों तक दिखाई दिया, जहां आसमान काले धुएं से ढक गया। घटना ने ब्लैक सी में बढ़ते समुद्री सुरक्षा संकट को एक बार फिर सामने ला दिया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमला यूक्रेन की ओर से किए जाने की आशंका है। हालांकि, इस हमले की जिम्मेदारी से संबंधित अंतिम आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में शामिल था
हमले का शिकार हुआ जहाज एफ्रामैक्स रियो लाइबेरिया के झंडे के तहत संचालित हो रहा था। द कीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में शामिल था।
जहाज को रूस के कथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा बताया गया था। रूस का शैडो फ्लीट उन टैंकरों और अन्य जहाजों के नेटवर्क को कहा जाता है, जिन पर पश्चिमी प्रतिबंधों से बचते हुए रूस के तेल और अन्य सामान के निर्यात में मदद करने का आरोप है।
यूक्रेन ने फरवरी में इस जहाज पर प्रतिबंध लगाए थे। उसका कहना था कि ऐसे जहाजों का नेटवर्क रूस को महत्वपूर्ण ऊर्जा आय बनाए रखने में मदद करता है और इसी आय से रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वित्तपोषित करता है।
5 और 6 अक्टूबर को भी भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हमले
पिछले दो दिनों में भारतीय नाविकों वाले जहाजों से जुड़ी दो अन्य गंभीर घटनाएं हुई थीं। 6 अक्टूबर को होर्मुज स्ट्रेट में पनामा के झंडे वाले व्यापारिक जहाज एमटी ऑन पीस पर हमला किया गया। इस जहाज पर कुल 17 भारतीय नागरिक सवार थे। हमले में 11 भारतीय घायल हो गए। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी बड़े सुरक्षा संकट का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
इससे एक दिन पहले, 5 अक्टूबर को ब्लैक सी में एमवी रोयाद मम्मदोव नाम के जहाज पर हमला हुआ था। यह जहाज रोमानिया के पास हमले के बाद डूब गया। जहाज पर तीन भारतीय नाविक सवार थे। घटना में दो विदेशी नागरिकों की मौत हुई, जबकि चालक दल के 11 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया था कि जहाज पर रूसी ड्रोन से हमला हुआ।
इस तरह केवल 48 घंटे के भीतर भारतीय नाविकों वाले तीन जहाजों से जुड़ी हमले की घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
ब्लैक सी बना रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रमुख समुद्री मोर्चा
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ब्लैक सी तेजी से संघर्ष के महत्वपूर्ण मोर्चों में बदल गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले करीब दो महीनों में रूस और यूक्रेन की ओर से 300 से अधिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।
इन जहाजों में अनाज ले जाने वाले पोत, तेल टैंकर और अन्य मालवाहक जहाज शामिल हैं। लगातार हमलों से इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। जहाज संचालक और मालिक सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं। इसका सीधा असर माल ढुलाई की लागत पर पड़ रहा है और समुद्री परिवहन महंगा हो रहा है।
वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर बढ़ सकता है दबाव
ब्लैक सी में समुद्री व्यापार बाधित होने का असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है। दोनों देश वैश्विक अनाज बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के करीब 30 प्रतिशत गेहूं निर्यात में योगदान करते हैं। दोनों देशों का बड़ी मात्रा में अनाज ब्लैक सी के समुद्री मार्गों से दूसरे देशों तक पहुंचता है।
यदि जहाजों पर हमले लंबे समय तक जारी रहते हैं और समुद्री मार्गों से अनाज की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इससे गेहूं और मक्का जैसी प्रमुख कृषि जिंसों की कीमतों में तेजी का जोखिम भी बढ़ सकता है।
रूस के अनाज निर्यात में आई बड़ी गिरावट
आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रूस का अनाज निर्यात 59 लाख टन से घटकर 17 लाख टन रह गया था। यह करीब 71 प्रतिशत की गिरावट है। सितंबर में भी रूस के अनाज निर्यात में करीब 50 प्रतिशत गिरावट का अनुमान है और यह लगभग 24.5 लाख टन रह सकता है।

रूसी अनाज की खरीद करने वाले देशों की संख्या भी 43 से घटकर 16 रह गई है। वहीं, रूस से अनाज भेजने वाले बंदरगाहों की संख्या 47 से घटकर 10 रह गई है। देश के सबसे बड़े बंदरगाह नोवोरोसिस्क से अनाज की शिपमेंट 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गई है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि बंदरगाहों और समुद्री जहाजों पर बढ़ते हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर पड़ रहा है। दोनों देशों के गोदामों में अनाज मौजूद होने के बावजूद उसे खरीदार देशों तक पहुंचाने में बाधाएं बढ़ रही हैं।
गेहूं की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत की तेजी
समुद्री आपूर्ति मार्गों में बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय कृषि जिंस बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले एक साल में गेहूं की कीमतें करीब 30 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं।
यदि ब्लैक सी में जहाजों पर हमले और समुद्री मार्गों की असुरक्षा जारी रहती है, तो आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और बढ़ सकता है। इससे आयात पर निर्भर देशों के लिए खाद्य सुरक्षा और कीमतों को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूक्रेन ने सड़क और रेल से निर्यात बढ़ाया
समुद्री मार्ग प्रभावित होने के बाद यूक्रेन ने अनाज के निर्यात के लिए सड़क और रेल नेटवर्क का इस्तेमाल बढ़ाया है। हालांकि, इन माध्यमों की क्षमता ब्लैक सी के बंदरगाहों की तुलना में काफी कम है।
यूक्रेन डेन्यूब नदी के रास्ते भी सीमित मात्रा में अनाज भेज रहा है। लेकिन जलस्तर और परिवहन क्षमता जैसी सीमाओं के कारण यह रास्ता समुद्री मार्ग से होने वाले बड़े पैमाने के निर्यात की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है।
इसका मतलब है कि यदि ब्लैक सी में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो यूक्रेन के लिए अपने पारंपरिक समुद्री निर्यात स्तर को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
मक्का की वैश्विक आपूर्ति पर भी खतरा
ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर केवल गेहूं तक सीमित नहीं है। मक्का की वैश्विक आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
2025-26 में यूक्रेन ने 2.3 करोड़ टन मक्का निर्यात किया था। यह दुनिया के कुल मक्का निर्यात का करीब 12 प्रतिशत था।
यदि समुद्री मार्गों पर हमले और सुरक्षा जोखिम लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो यूक्रेन के मक्का निर्यात पर भी असर पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता घटने और कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी बनी बड़ी चिंता
48 घंटे के भीतर भारतीय क्रू वाले तीन जहाजों से जुड़ी घटनाओं ने समुद्री व्यापार के साथ-साथ भारतीय नाविकों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है।
ब्लैक सी और होर्मुज स्ट्रेट दोनों ही वैश्विक समुद्री व्यापार के महत्वपूर्ण मार्ग हैं। एक तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ब्लैक सी में जोखिम बढ़ा है, तो दूसरी ओर होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी हमले का असर ऊर्जा और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर पड़ सकता है।
इन घटनाओं के बीच जहाजों की सुरक्षा, समुद्री बीमा, माल ढुलाई लागत और वैश्विक खाद्य एवं ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है। यदि समुद्री हमले जारी रहते हैं, तो इसका असर क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़कर वैश्विक व्यापार और वस्तुओं की कीमतों तक पहुंच सकता है।











