Vande Mataram Row: कांग्रेस के दो अंतरे गाने के फैसले पर घमासान, उद्धव गुट बोला- ‘हमारा स्टैंड साफ है’

Vande Mataram Row: कांग्रेस के सिर्फ दो अंतरे गाने के फैसले पर सियासी घमासान तेज हो गया है। उद्धव गुट ने कहा- ‘हमारा स्टैंड साफ है’, जानें पूरा विवाद।

कांग्रेस के वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने के फैसले पर बीजेपी लगातार निशाना साध रही है। इस बीच उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे की भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

Vande Mataram Controversy: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस के फैसले ने भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने 19 अगस्त 2026 की बैठक में अपने 1937 के प्रस्ताव पर कायम रहने का फैसला किया है। पार्टी के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि उसका रुख ऐतिहासिक निर्णय और उस समय के राष्ट्रीय नेतृत्व की सहमति पर आधारित है।

कांग्रेस के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने भी इस विवाद में अपनी अलग आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनका मुख्य सवाल यह है कि जिस समय ‘वंदे मातरम्’ से संबंधित विधेयक संसद में आ रहा था, उस दौरान प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सदन में क्यों मौजूद नहीं थे।

आदित्य ठाकरे ने कांग्रेस के फैसले पर क्या कहा?

आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी का ‘वंदे मातरम्’ को लेकर रुख स्पष्ट है। उन्होंने विवाद को गीत के कितने अंतरे गाए जाएं, इससे आगे ले जाते हुए संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उनके अनुसार, अगर सरकार इस विषय को इतना महत्वपूर्ण मानती है तो विधेयक पर चर्चा और निर्णय के दौरान शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होनी चाहिए थी। उन्होंने बीजेपी से यह भी सवाल किया कि पार्टी का स्वतंत्रता आंदोलन और ‘वंदे मातरम्’ से ऐतिहासिक संबंध किस रूप में रहा है।

आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रगीत के मुद्दे को इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। हालांकि, उनकी टिप्पणी शिवसेना (यूबीटी) के राजनीतिक रुख को दर्शाती है और इस पर बीजेपी की ओर से अलग प्रतिक्रिया सामने आई है।

बीजेपी ने कांग्रेस पर बोला हमला

कांग्रेस के फैसले के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी का तर्क है कि 1937 का राजनीतिक संदर्भ आज के भारत पर लागू नहीं किया जा सकता। बीजेपी नेताओं ने कहा कि देश अब 2026 में है और मौजूदा व्यवस्था तथा कानून के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया प्रोटोकॉल तय किया गया है।

बीजेपी सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कांग्रेस के दो अंतरे गाने के फैसले को तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को ऐतिहासिक परिस्थितियों के बजाय वर्तमान भारत की व्यवस्था और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार की ओर से ‘वंदे मातरम्’ के आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रस्तुतीकरण को लेकर नया प्रोटोकॉल लागू किया गया है। इसी के बाद कांग्रेस के रुख ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।

कांग्रेस का ऐतिहासिक तर्क क्या है?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने CWC के फैसले की पृष्ठभूमि समझाते हुए 1937 के प्रस्ताव का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, उस समय कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ के इस्तेमाल को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया था। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय उस दौर के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं की चर्चा और कवि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद लिया गया था।

कांग्रेस के अनुसार, उस समय यह तय किया गया था कि सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों में गीत के शुरुआती दो अंतरे गाए जाएं। पार्टी इसी ऐतिहासिक निर्णय को आज भी अपना आधिकारिक रुख मानती है। जयराम रमेश ने कहा कि हाल की CWC बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के प्रस्ताव के कुछ हिस्से पढ़कर सुनाए और पार्टी ने अपने पुराने रुख को दोहराया।

इमरान मसूद ने भी रखा कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस का सम्मान हमेशा रहा है। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर और सरदार पटेल जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए पार्टी के ऐतिहासिक रुख का बचाव किया। मसूद की टिप्पणी उस व्यापक राजनीतिक बहस के बीच आई है, जिसमें राष्ट्रगीत के सम्मान, उसके गायन और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वह राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े होंगे, लेकिन इसे गाना उनकी व्यक्तिगत संवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता का विषय है।

Leave a comment