SpaceX Starship Flight 14: पहली बार कक्षा में पहुंचा विशाल रॉकेट, 26 Starlink V3 सैटेलाइट भी तैनात

SpaceX Starship Flight 14: विशाल Starship रॉकेट ने पहली बार सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचकर 26 Starlink V3 सैटेलाइट तैनात किए। जानें मिशन की खास बातें और इसकी

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने सोमवार को अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की। कंपनी का विशाल स्टारशिप अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचा और इस मिशन के दौरान 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक V3 उपग्रहों को भी सफलतापूर्वक तैनात किया गया।

टेक न्यूज़: स्पेसएक्स के विशाल स्टारशिप रॉकेट ने 28 सितंबर को अपनी 14वीं परीक्षण उड़ान के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। एलन मस्क की कंपनी के इस मिशन में स्टारशिप को पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने के साथ-साथ नई पीढ़ी के 26 Starlink V3 सैटेलाइट तैनात करने का लक्ष्य रखा गया। भारतीय समयानुसार शाम 6:16 बजे शुरू हुई इस उड़ान को स्पेसएक्स के भविष्य के चंद्रमा और मंगल अभियानों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पहली बार ऑर्बिटल मिशन में आगे बढ़ा Starship

Starship-Super Heavy सिस्टम स्पेसएक्स का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी लॉन्च सिस्टम है। इस परीक्षण में स्टारशिप के ऊपरी चरण को पृथ्वी की लगभग 275 किलोमीटर ऊंची कक्षा में भेजने की योजना थी। मिशन प्रोफाइल के अनुसार अंतरिक्षयान को करीब छह बार पृथ्वी की परिक्रमा करने के बाद प्रशांत महासागर में चिली के पश्चिमी तट के पास नियंत्रित स्प्लैशडाउन करना था।

उड़ान के दौरान सभी परिस्थितियां पूरी तरह सामान्य नहीं रहीं। स्टारशिप के छह Raptor Vacuum इंजनों में से एक में समस्या आई और इंजन बंद हो गया। इसके बावजूद मिशन टीम ने उपलब्ध आंकड़ों और बाकी इंजनों के प्रदर्शन का आकलन करने के बाद उड़ान जारी रखी। यह घटना स्टारशिप की जटिल प्रणोदन प्रणाली और परीक्षण उड़ानों में आने वाली तकनीकी चुनौतियों को भी सामने लाती है।

26 Starlink V3 सैटेलाइट की तैनाती

इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में नई पीढ़ी के Starlink V3 सैटेलाइटों की तैनाती शामिल है। स्पेसएक्स इन सैटेलाइटों को अपने वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए विकसित कर रहा है। नई पीढ़ी के सैटेलाइटों में पहले के संस्करणों की तुलना में ज्यादा पावर और डेटा क्षमता का लक्ष्य रखा गया है।

कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट अपने सोलर एरे और संचार एंटीना तैनात करेंगे। इसके बाद वे रेडियो फ्रीक्वेंसी और लेजर लिंक के जरिए ग्राउंड सिस्टम तथा Starlink नेटवर्क से जुड़ने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। आवश्यक परीक्षण और ऑर्बिटल एडजस्टमेंट पूरे होने के बाद इनके नेटवर्क में शामिल होने की उम्मीद है।

हीट शील्ड की भी होगी जांच

मिशन में तकनीकी परीक्षणों के साथ डेटा जुटाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। तीन Starlink V3 सैटेलाइटों पर अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों का इस्तेमाल स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें लेने के लिए किया जाना है। स्टारशिप के लिए वातावरण में दोबारा प्रवेश करना सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौतियों में से एक है। इसलिए हीट शील्ड की स्थिति से जुड़ी तस्वीरें और अन्य डेटा भविष्य की उड़ानों के डिजाइन और सुरक्षा सुधार में उपयोगी हो सकते हैं।

407 फीट ऊंचा है Starship-Super Heavy

Starship-Super Heavy सिस्टम की ऊंचाई करीब 124.4 मीटर यानी लगभग 407 फीट है। इसके दो प्रमुख हिस्से हैं—Super Heavy बूस्टर और Starship ऊपरी चरण। दोनों को भविष्य में तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। स्पेसएक्स का दीर्घकालिक लक्ष्य ऐसा लॉन्च सिस्टम तैयार करना है जिसमें रॉकेट के प्रमुख हिस्सों को बार-बार उड़ाया जा सके। कंपनी के अनुसार इससे अंतरिक्ष अभियानों की लागत कम करने और लॉन्च की आवृत्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

चंद्रमा और मंगल मिशन पर नजर

Starship कार्यक्रम केवल Starlink सैटेलाइट लॉन्च करने तक सीमित नहीं है। स्पेसएक्स इसे भविष्य के मानव और कार्गो मिशनों के लिए भी विकसित कर रहा है। कंपनी की दीर्घकालिक योजना में चंद्रमा और मंगल तक अंतरिक्षयान पहुंचाने की क्षमता विकसित करना शामिल है। इस दिशा में पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य लॉन्च सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

हालांकि इसके लिए नियमित और विश्वसनीय ऑर्बिटल उड़ानों, सुरक्षित री-एंट्री और दोनों चरणों की सफल रिकवरी जैसी कई तकनीकी चुनौतियों को लगातार हल करना होगा।

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