I4C ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के लिए फेक आइडेंटिटी और ब्लैकमेलिंग के खतरे की चेतावनी दी है। पैरेंट्स को बच्चों को पर्सनल डेटा साझा न करने और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है।
सरकार की नई वॉर्निंग
गृह मंत्रालय की साइबर सिक्योरिटी विंग I4C ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर नई चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी प्रोफाइल और झूठी उम्र दिखाकर बच्चों से संपर्क कर रहे हैं।
वे धीरे-धीरे बच्चों के साथ ट्रस्ट बनाते हैं और निजी बातें शुरू कर देते हैं। इसके बाद “सीक्रेट रहेगा” कहकर बच्चे से फोटो या वीडियो मांगते हैं। इसके जरिए बच्चों को ब्लैकमेल करना उनका मकसद होता है।
कौन-कौन से खतरे हैं
I4C के मुताबिक, बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कई नए तरह के स्कैम का सामना करना पड़ रहा है। हैकर्स बच्चों को टारगेट करते हैं, सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से उनका भरोसा जीतते हैं और फिर निजी डेटा या संवेदनशील कंटेंट हासिल करते हैं।

साइबर अपराधियों का मुख्य उद्देश्य बच्चों की पर्सनल फोटो, वीडियो या अन्य जानकारी का गलत इस्तेमाल करना है। इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि उनका मानसिक स्वास्थ्य भी खतरे में पड़ सकता है।
पैरेंट्स और बच्चों को क्या सावधानियां रखनी चाहिए
I4C ने पैरेंट्स को सलाह दी है कि वे बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रहने की शिक्षा दें। उन्हें समझाएं कि किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया पर अपनी उम्र, स्कूल, पता या फोन नंबर साझा न करें।
यदि कोई व्यक्ति “सीक्रेट रहेगा” कहकर फोटो या वीडियो मांगता है, तो उसे तुरंत ब्लॉक कर दें। बच्चों को यह भी बताएं कि अगर उन्हें कोई चीज़ अनकंफर्टेबल लगे, तो तुरंत किसी बड़े या माता-पिता को बताएं।
ब्लैकमेल और रिपोर्टिंग के उपाय
गृह मंत्रालय ने कहा कि कई बार साइबर अपराधी बच्चों पर इमोशनल प्रेशर डालकर उन्हें चुप रहने के लिए कहते हैं। ऐसे में पैरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों के साथ खुलकर बात करें और उन्हें साइबर सुरक्षा के नियम समझाएं।
यदि किसी भी तरह का ऑनलाइन ब्लैकमेल या खतरा सामने आए, तो बच्चे या पैरेंट्स तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकते हैं। इससे समय रहते कार्रवाई हो सकती है और बच्चों को किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सकता है।









