FY2026 में IPO बाजार ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 112 कंपनियों के जरिए ₹1.8 लाख करोड़ जुटाए। सेकेंडरी बाजार की कमजोरी के बावजूद प्राइमरी मार्केट मजबूत रहा, हालांकि लिस्टिंग गेन और रिटेल निवेशकों की भागीदारी में गिरावट देखी गई।
IPO Update: वित्त वर्ष 2026 में भारत के IPO बाजार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। सेकेंडरी बाजार में उतार-चढ़ाव और कमजोरी के बावजूद प्राथमिक बाजार (primary market) ने शानदार प्रदर्शन किया। इस दौरान 112 कंपनियों ने IPO के जरिए करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले साल के 1.62 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड से भी ज्यादा है। यह लगातार दूसरा साल है जब IPO बाजार ने नया रिकॉर्ड बनाया है, जो भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती को दर्शाता है।
सेकेंडरी बाजार की कमजोरी के बीच मजबूती
वित्त वर्ष 2026 में सेकेंडरी बाजार (secondary market) में काफी अस्थिरता देखने को मिली। निफ्टी 50 में 5.1 प्रतिशत और सेंसेक्स में 7.1 प्रतिशत की गिरावट आई। यह प्रदर्शन वित्त वर्ष 2020 के बाद सबसे कमजोर रहा। इसके बावजूद IPO बाजार का मजबूत बने रहना इस बात का संकेत है कि निवेशकों का भरोसा प्राथमिक बाजार में बना हुआ है।
लगातार दूसरे साल रिकॉर्ड
पहली बार ऐसा हुआ है जब IPO के जरिए फंड जुटाने का आंकड़ा लगातार दो साल तक रिकॉर्ड स्तर पर रहा है। आमतौर पर एक मजबूत साल के बाद IPO गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, लेकिन इस बार ट्रेंड पूरी तरह अलग रहा। यह बदलाव भारतीय बाजार के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।
आखिरी तिमाही में आई सुस्ती
हालांकि पूरे साल का प्रदर्शन मजबूत रहा, लेकिन आखिरी तिमाही में IPO गतिविधियों में गिरावट देखी गई। इस दौरान केवल 18,772 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसी समय बाजार में भी गिरावट रही और निफ्टी में करीब 15 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज हुई। इससे निवेशकों का मूड थोड़ा प्रभावित हुआ।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions), कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया। इन कारणों से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को सहारा दिया, जिससे गिरावट ज्यादा गहरी नहीं हुई।
घरेलू निवेश की बढ़ती ताकत
IPO बाजार के मजबूत प्रदर्शन का एक बड़ा कारण घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है। यह दर्शाता है कि भारतीय बाजार अब विदेशी निवेश पर पहले जितना निर्भर नहीं रहा। घरेलू पूंजी (domestic capital) की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे बाजार को स्थिरता मिल रही है।
लिस्टिंग गेन में गिरावट
IPO बाजार में रिकॉर्ड फंड जुटाने के बावजूद लिस्टिंग के समय मिलने वाला रिटर्न (listing gain) घटा है। औसतन लिस्टिंग गेन 30 प्रतिशत से घटकर केवल 8 प्रतिशत रह गया है। इसके अलावा केवल 31 प्रतिशत IPO ही ऐसे रहे, जिन्होंने लिस्टिंग के समय 10 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न दिया। इससे निवेशकों का उत्साह थोड़ा कम हुआ है।
निवेशकों का बदलता नजरिया
कम रिटर्न के कारण निवेशक अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं। पहले जहां IPO में तेजी से निवेश होता था, अब निवेशक कंपनियों के फंडामेंटल्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यही कारण है कि oversubscription में भी गिरावट आई है।
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार, 10 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन पाने वाले IPO की संख्या वित्त वर्ष 2025 में 72 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 56 प्रतिशत रह गई है। यह दर्शाता है कि निवेशक अब चुनिंदा IPO में ही पैसा लगा रहे हैं।
रिटेल निवेशकों की भागीदारी घटी
रिटेल निवेशकों की भागीदारी में भी कमी आई है। औसतन आवेदन संख्या 21.3 लाख से घटकर 13 लाख रह गई है। इसका मतलब है कि छोटे निवेशक अब पहले की तुलना में ज्यादा सोच-समझकर IPO में निवेश कर रहे हैं।
IPO पाइपलाइन मजबूत
भले ही बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन IPO की पाइपलाइन अभी भी मजबूत है। प्राइम डेटाबेस के अनुसार, 144 कंपनियों को सेबी (SEBI) से मंजूरी मिल चुकी है, जो करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं। इसके अलावा 63 कंपनियों के IPO प्रस्ताव, जिनकी कुल वैल्यू 1.37 लाख करोड़ रुपये है, अभी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
कंपनियों का ‘wait and watch’ रुख
कई कंपनियां मौजूदा बाजार हालात को देखते हुए अपने IPO को टाल रही हैं। वे अस्थिर बाजार में लिस्टिंग से बचना चाहती हैं। यह ‘wait and watch’ रणनीति दर्शाती है कि कंपनियां सही समय का इंतजार कर रही हैं ताकि उन्हें बेहतर वैल्यूएशन मिल सके।











