ईरान ने खाड़ी देशों की तेल रिफाइनरी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमले तेज किए हैं। ओमान ने अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की चेतावनी दी। तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और तेल कीमतों में वृद्धि का खतरा बढ़ा है।
Oil Crisis: दक्षिण पार्स में ऊर्जा संयंत्रों पर इजरायली हमलों के बाद खाड़ी देशों में ईरानी हमले तेज हो गए हैं। ईरान ने खाड़ी देशों की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाना शुरू किया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है।
ईरान के इस कदम के बाद ओमान ने अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है और अन्य देशों से नागरिक संयंत्रों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को निशाना बनाने से बचने का आग्रह किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद राजनयिक प्रयास तेज हैं, लेकिन हिंसा और हमले लगातार बढ़ रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल का प्रस्ताव
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सांसदों ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल और कर लगाने का प्रस्ताव रखा है। सांसद सोमायेह रफीई ने कहा कि अगर होर्मुज का इस्तेमाल पारगमन, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए सुरक्षित मार्ग के रूप में किया जाता है, तो देश को इस उपयोग के लिए टोल का भुगतान करना होगा।
यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और वैश्विक तेल सप्लाई के लिए चिंताजनक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह योजना लागू होती है, तो समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है।
ईरान के हमलों का असर
तेहरान ने गुरुवार को खाड़ी देशों में तेल और गैस रिफाइनरियों पर हमले किए। इन हमलों से सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। तेल अवीव और खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी धमाके की आवाजें सुनाई दीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के इस कदम से केवल क्षेत्रीय तनाव ही नहीं बढ़ा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। दक्षिण पार्स प्राकृतिक गैस क्षेत्र, जो ईरान और कतर के साझा क्षेत्र में स्थित है, इस हमले का मुख्य लक्ष्य रहा।
ओमान ने किया आगाह
ओमान ने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना जरूरी है। ओमान ने अन्य देशों से आग्रह किया है कि वे नागरिक अवसंरचना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को निशाना न बनाएं। ओमान पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है।
ओमान की इस चेतावनी को क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सभी देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन किया, तो खाड़ी में ऊर्जा संकट और वैश्विक तेल कीमतों पर असर कम हो सकता है।
सऊदी अरब में हालात
सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह पर गुरुवार को तेल लोडिंग रोक दी गई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, शहर के ऊपर से गुजर रही एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवाई सुरक्षा प्रणाली द्वारा रोका गया। इसी दौरान SAMREF रिफाइनरी में एक ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रिफाइनरी की क्षति का आकलन अभी किया जा रहा है। यानबू बंदरगाह खाड़ी अरब तेल के प्रमुख निर्यात मार्गों में से एक है। यहां पर आपात स्थिति से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यदि निर्यात रुकता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है।
वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव से वैश्विक ऊर्जा संकट बढ़ सकता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल और कर लागू होता है, तो तेल और गैस के परिवहन की लागत बढ़ जाएगी। इसके अलावा रिफाइनरियों और ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की वजह से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी।
इस संकट के बीच, दुनिया के प्रमुख देशों और ऊर्जा निर्यातक देशों की नजर खाड़ी पर बनी हुई है। यदि हालात बिगड़े, तो भारत सहित अन्य देशों के लिए तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि और सप्लाई की अनिश्चितता बढ़ सकती है।









