Sugar Price Hike: चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी, अरविंद केजरीवाल ने केंद्र पर साधा निशाना

Sugar Price Hike: चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बीच अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। सरकार ने बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए

देशभर में चीनी की कीमतों में लगातार तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। महज 17 दिनों के भीतर चीनी के दाम करीब 19 रुपये तक बढ़ गए हैं, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है।

नई दिल्ली: भारत में चीनी की कीमतों में तेज उछाल ने महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अगस्त में थोक बाजार में चीनी के भाव तेजी से बढ़े हैं और आगामी त्योहारी सीजन से पहले आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और एथनॉल उत्पादन नीति को महंगाई की मौजूदा स्थिति से जोड़ते हुए तीखी टिप्पणी की।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि गन्ने से एथनॉल बनाने पर जोर देने के कारण चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और अब कमी दूर करने के लिए विदेश से चीनी खरीदने की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने इसे सरकार की नीतिगत विफलता बताया। हालांकि, एथनॉल उत्पादन और चीनी कीमतों के बीच संबंध को लेकर उद्योग तथा बाजार विशेषज्ञों के आकलन में कई कारक शामिल हैं और केवल एक कारण को जिम्मेदार ठहराना पूरी तस्वीर नहीं देता।

चीनी की कीमतों में क्यों आया उछाल?

चीनी बाजार में मौजूदा तेजी के पीछे घरेलू आपूर्ति, गन्ने से एथनॉल उत्पादन की ओर बढ़ता डायवर्जन, कम शुरुआती स्टॉक, त्योहारी मांग और फसल से जुड़े जोखिम जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के प्रमुख बाजारों में थोक चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर कीमतों में करीब 20 फीसदी तक की तेजी आई है।

भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के उपलब्ध आंकड़ों में 17 अगस्त 2026 को अखिल भारतीय औसत खुदरा चीनी कीमत करीब 51.68 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। इसी दिन अखिल भारतीय औसत थोक कीमत करीब 4,780 रुपये प्रति क्विंटल रही। ये आंकड़े देशभर के औसत हैं, इसलिए स्थानीय मंडियों और शहरों में वास्तविक कीमत अलग हो सकती है।

एक साल में खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी

उपभोक्ता मामलों के आंकड़ों के अनुसार चीनी की खुदरा कीमतों में सालाना आधार पर भी वृद्धि देखी गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में 18 अगस्त के आसपास औसत खुदरा कीमत को एक साल पहले की तुलना में करीब 13 फीसदी अधिक बताया गया है। महंगाई का यह असर घरेलू बजट से लेकर मिठाई, बिस्किट, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की लागत तक दिखाई दे सकता है।

त्योहारी सीजन में चीनी की मांग आम तौर पर बढ़ जाती है। इस साल भी गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों से पहले मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे आपूर्ति और कीमत पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

एथनॉल नीति पर क्यों हो रही बहस?

भारत ने पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने के उद्देश्य से गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया है। इसका एक फायदा ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना है, लेकिन चीनी उद्योग के संदर्भ में यह सवाल उठता रहा है कि गन्ने का कितना हिस्सा चीनी उत्पादन और कितना एथनॉल के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

मौजूदा कीमतों में तेजी के बीच बाजार विशेषज्ञों ने चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए नीतिगत विकल्पों पर चर्चा शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार सीमित मात्रा में शुल्क-मुक्त चीनी आयात और गन्ने के एथनॉल डायवर्जन से जुड़े उपायों पर विचार कर रही है।

सरकार ने थोक खरीदारों पर स्टॉक सीमा भी लगाई

बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र ने थोक उपभोक्ताओं के चीनी भंडारण पर नई पाबंदियां लागू करने का फैसला किया है। 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू होने वाले नियम के तहत महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े खरीदार सीमित अवधि का स्टॉक ही रख सकेंगे। सरकार का उद्देश्य जमाखोरी रोकना और बाजार में आपूर्ति बनाए रखना है।

इस कदम का असर बिस्किट और कन्फेक्शनरी कंपनियों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, पेय पदार्थ निर्माताओं और बड़े मिठाई कारोबारियों जैसे संस्थागत खरीदारों पर पड़ेगा।

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