Supreme Court Hybrid Hearing: CJI सूर्यकांत की वर्चुअल सुनवाई में माइक हुआ म्यूट, प्रक्रिया पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट की हाइब्रिड सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत का माइक अचानक म्यूट हो गया, जिसके बाद वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था और अर्जेंट मेंशनिंग प्रक्रिया को लेकर

सुप्रीम कोर्ट में हाइब्रिड सुनवाई व्यवस्था शुरू होने के बाद पहली बार कोर्टरूम नंबर 1 में एक तकनीकी समस्या सामने आई, जब वकीलों द्वारा जरूरी मामलों का उल्लेख किए जाने के दौरान वर्चुअल लिंक की आवाज अचानक म्यूट हो गई।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में हाइब्रिड सुनवाई व्यवस्था के दौरान एक असामान्य घटना सामने आई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली कोर्टरूम नंबर-1 की सुबह की वर्चुअल सुनवाई में ऑडियो अचानक म्यूट हो गया। यह घटना उस समय हुई जब वकील जरूरी मामलों (Urgent Matters) का उल्लेख कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुबह बेंच के बैठने के बाद मामलों की मेंशनिंग एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इस दौरान वकील उन मामलों को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध करते हैं, जिनमें तात्कालिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई जाती है। हालांकि, हाइब्रिड व्यवस्था में पहली बार ऐसी स्थिति सामने आई जब वर्चुअल लिंक पर आवाज उपलब्ध नहीं रही।

सुबह की मेंशनिंग प्रक्रिया के दौरान हुई तकनीकी समस्या

सुप्रीम कोर्ट में सामान्य रूप से सुबह 10:30 बजे बेंच की कार्यवाही शुरू होने से पहले या शुरुआत में अर्जेंट मामलों का उल्लेख किया जाता है। यह प्रक्रिया लगभग 10 से 15 मिनट तक चलती है। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश मामलों की गंभीरता को देखते हुए तय करते हैं कि उन्हें तत्काल सूचीबद्ध किया जाए या नियमित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने भी कई वकील अपने मामलों को तत्काल सुनवाई के लिए प्रस्तुत कर रहे थे। इसी दौरान वर्चुअल सुनवाई से जुड़ा ऑडियो म्यूट हो गया, जिससे ऑनलाइन जुड़े लोगों को कार्यवाही सुनने में परेशानी हुई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि म्यूट की स्थिति तकनीकी कारणों से उत्पन्न हुई या किसी अन्य वजह से, लेकिन इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट की हाइब्रिड सुनवाई प्रणाली और डिजिटल व्यवस्था पर फिर से ध्यान आकर्षित किया है।

अर्जेंट मेंशनिंग पर CJI सूर्यकांत पहले भी दे चुके हैं टिप्पणी

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब CJI सूर्यकांत हाल ही में अर्जेंट मेंशनिंग की प्रक्रिया को लेकर अपनी टिप्पणियों के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने कहा था कि मामलों का उल्लेख करना सीधे तौर पर न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा नहीं, बल्कि अदालत के प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी प्रक्रिया है। CJI ने यह भी कहा था कि केवल मेंशनिंग के दौरान की गई बातों को न्यायिक आदेश या नियमित सुनवाई की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, अर्जेंट मामलों की सूची तैयार करना अदालत के प्रबंधन और कार्य प्रणाली से संबंधित विषय है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले पर भी हुई थी चर्चा

हाल ही में एक मामले के उल्लेख के दौरान CJI सूर्यकांत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मुद्दे पर तत्काल सुनवाई की मांग पर प्रतिक्रिया दी थी। उस समय उन्होंने वकील से कहा था कि अदालत का समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने मामले की सुनवाई से पूरी तरह इनकार नहीं किया था, बल्कि तत्काल प्रक्रिया के तहत उसे लेने पर अपनी आपत्ति जताई थी।

CJI सूर्यकांत ने कई मौकों पर कहा है कि जरूरी मामलों की लिस्टिंग के लिए वकीलों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। उन्होंने मौखिक रूप से मेंशनिंग करने के बजाय लिखित मेंशनिंग स्लिप के माध्यम से अनुरोध करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि इससे अदालत की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित रहेगी और सभी मामलों को उचित तरीके से प्राथमिकता दी जा सकेगी।

उन्होंने पहले भी स्पष्ट किया था कि केवल अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में ही तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार की जानी चाहिए। एक सुनवाई के दौरान उन्होंने टिप्पणी की थी कि हर मामले को उसी दिन सूचीबद्ध करना संभव नहीं है, जब तक कोई असाधारण आपात स्थिति न हो।

सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल सुनवाई का बढ़ता इस्तेमाल

कोविड-19 महामारी के बाद सुप्रीम कोर्ट सहित देश की अदालतों में हाइब्रिड और वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था का विस्तार हुआ है। इससे देशभर के वकीलों और पक्षकारों को अदालतों तक पहुंच आसान हुई है। हालांकि, तकनीकी समस्याएं समय-समय पर चुनौती भी पेश करती रही हैं। ऑडियो म्यूट जैसी घटनाएं डिजिटल न्याय व्यवस्था में मजबूत तकनीकी बुनियादी ढांचे और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

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