सूरत के सरकारी स्कूल में करंट लगने से 9वीं के छात्र की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

सूरत में सरकारी स्कूल की छत पर करंट लगने से 9वीं के छात्र की मौत हो गई। सुरक्षा में लापरवाही के आरोपों के बीच जांच शुरू, पीटी शिक्षक को सेवा से हटाया गया।

गुजरात के सूरत में एक सरकारी स्कूल की छत पर पीटी के दौरान करंट लगने से 14 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। घटना के बाद स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं, जबकि प्रशासन ने जांच शुरू कर संबंधित शिक्षक को सेवा से हटा दिया है।

सूरत: गुजरात के सूरत शहर के मानदरवाजा क्षेत्र स्थित सुमन सरकारी स्कूल में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। स्कूल की छत पर शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) के दौरान बिजली के करंट की चपेट में आने से 14 वर्षीय छात्र अब्दुल रहमान की मौत हो गई। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हादसे के बाद छात्र के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और प्रारंभिक कार्रवाई के तहत पीटी शिक्षक को सेवा से हटा दिया गया है।

मैदान व्यस्त होने पर छात्रों को छत पर ले जाया गया

स्कूल प्रशासन के अनुसार, जिस समय पीटी की कक्षा होनी थी, उस दौरान स्कूल का मैदान खाली नहीं था। एक ही परिसर में संचालित तीन स्कूलों के छात्र वहां मिड-डे मील ग्रहण कर रहे थे। इसी कारण पीटी शिक्षक छात्रों को स्कूल की छत पर व्यायाम कराने ले गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छत पर मौजूद एक लोहे के पाइप में बिजली का करंट दौड़ रहा था। पीटी के दौरान छात्र अब्दुल रहमान का पैर फिसल गया और वह सीधे उस पाइप के संपर्क में आ गया। करंट लगने से वह मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गया।

छात्रों और शिक्षकों ने बचाने का किया प्रयास

प्रत्यक्षदर्शी छात्रों के अनुसार, करंट लगने के बाद अब्दुल कुछ समय तक तड़पता रहा और फिर बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद एक शिक्षक ने लकड़ी की सहायता से उसे करंट वाले पाइप से अलग किया ताकि बिजली का संपर्क टूट सके। इसके बाद शिक्षक ने छात्र को प्राथमिक उपचार देने और सीपीआर देने का प्रयास किया। स्कूल के प्रिंसिपल तुरंत अपनी कार से उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि छात्र के शरीर पर करंट लगने के स्पष्ट निशान पाए गए, जिससे उसकी मृत्यु बिजली के झटके के कारण होने की पुष्टि हुई।

खुली बिजली वायरिंग बनी हादसे की वजह

घटना के बाद नगर निगम के विद्युत विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि छत पर लगे लोहे के पाइप के भीतर से गुजरने वाला बिजली का तार खुला हुआ था।

बताया गया कि बिजली की वायरिंग पूरी तरह सुरक्षित तरीके से नहीं की गई थी। खुले तार के कारण पूरा धातु का पाइप करंट की चपेट में था। जांच के दौरान एक तकनीशियन ने जब पाइप की जांच की, तो उसे भी बिजली का झटका लगा। इससे स्पष्ट हुआ कि पाइप में वास्तव में करंट मौजूद था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बरसात के दौरान छत पर पानी जमा होता, तो स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती थी क्योंकि पानी के माध्यम से करंट पूरे क्षेत्र में फैल सकता था।

स्कूल परिसर की सुरक्षा पर उठे गंभीर प्रश्न

इस हादसे ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि छत पर बिजली से जुड़ा ढांचा मौजूद था, तो छात्रों को वहां शारीरिक गतिविधियां कराने की अनुमति क्यों दी गई। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि बिजली की वायरिंग का नियमित निरीक्षण हुआ था या नहीं और क्या संबंधित विभागों ने सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में विद्युत व्यवस्था, भवन सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों का समय-समय पर निरीक्षण आवश्यक है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक छात्र अब्दुल रहमान का परिवार आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उसके पिता सलीम शेख ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं और अब इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अस्पताल परिसर में परिजनों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि स्कूल परिसर सुरक्षित होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।

प्रशासन ने शुरू की जांच

स्कूल प्रशासन ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसे की असली वजह क्या थी और किन स्तरों पर लापरवाही हुई। प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई के तहत जून 2025 से कार्यरत पीटी शिक्षक शेख बहाउद्दीन अजीमुद्दीन को सेवा से हटा दिया गया है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच केवल शिक्षक की भूमिका तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था, भवन प्रबंधन और विद्युत प्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी।

स्कूल सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

यह घटना एक बार फिर इस आवश्यकता को रेखांकित करती है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि सभी स्कूलों में नियमित विद्युत सुरक्षा ऑडिट, भवन निरीक्षण, आपातकालीन निकासी योजना और शिक्षकों के लिए प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए।
इसके साथ ही छात्रों को भी बिजली से जुड़े खतरों और आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित व्यवहार के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।

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