सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) निवेशकों को इस अक्टूबर में शानदार रिटर्न मिला है, कुछ बॉन्ड्स ने 325% तक का मुनाफा दिया। RBI की 2017-18 सीरीज IV का मोचन मूल्य ₹12,704 प्रति ग्राम रहा। 8 साल तक होल्ड करने पर इस लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन एक्सचेंज पर बेचने या वार्षिक ब्याज पर टैक्स देना जरूरी है।
Sovereign Gold Bonds: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) निवेशकों को इस अक्टूबर में शानदार रिटर्न मिला है, कुछ बॉन्ड्स ने 325% तक का मुनाफा दिया। RBI की 2017-18 सीरीज IV का मोचन मूल्य ₹12,704 प्रति ग्राम रहा। 8 साल तक होल्ड करने पर इस लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन एक्सचेंज पर बेचने या वार्षिक ब्याज पर टैक्स देना जरूरी है।
आरबीआई के बॉन्ड्स से निवेशकों को बड़ा मुनाफा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर साल कई चरणों में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करता है। इन बॉन्ड्स की कीमत सोने के दाम पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए, SGB 2017-18 सीरीज़ IV को 23 अक्टूबर 2017 को ₹2,987 प्रति ग्राम की दर से जारी किया गया था। अब जब यह आठ साल बाद मैच्योर हुआ, तो निवेशकों को ₹12,704 प्रति ग्राम का मोचन मूल्य मिला। यानी निवेशकों को करीब 325 प्रतिशत तक का रिटर्न मिला।
इसी तरह SGB 2017-18 सीरीज़ V के निवेशकों को ₹2,971 की तुलना में ₹11,992 प्रति ग्राम मिले। इसका मतलब यह हुआ कि इस बॉन्ड ने करीब 303 प्रतिशत का फायदा दिया। इसके अलावा, SGB 2018-19 सीरीज़ II और SGB 2019-20 सीरीज़ VI ने क्रमशः 304 प्रतिशत और 217 प्रतिशत का रिटर्न दिया। यहां तक कि 2020 की सीरीज़, जो केवल पांच साल पुरानी है, उसने भी लगभग 166 प्रतिशत का मुनाफा दिया।
यह आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई है। पिछले पांच सालों में सोने का भाव करीब 150 प्रतिशत तक बढ़ा है, और यही वजह है कि गोल्ड बॉन्ड्स में निवेश करने वालों को शानदार कमाई हुई है।
टैक्स के नियमों को लेकर बढ़ा भ्रम
अक्सर निवेशकों के मन में यह सवाल रहता है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से हुई कमाई पर टैक्स देना पड़ता है या नहीं। दरअसल, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने बॉन्ड को कब और कैसे बेचा है। अगर आप अपने बॉन्ड को उसकी पूरी आठ साल की अवधि तक रखते हैं और इसे सीधे RBI के माध्यम से मैच्योरिटी पर रिडीम करते हैं, तो आपको इस पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना होता। यानी सोने की कीमत बढ़ने से जो मुनाफा होता है, वह पूरी तरह टैक्स फ्री माना जाता है।
यह नियम तब भी लागू होता है जब आप बॉन्ड को पांच साल बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर जल्दी भुना लेते हैं, बशर्ते यह रिडेम्पशन RBI के माध्यम से ही किया गया हो।
स्टॉक एक्सचेंज पर बेचने पर टैक्स देना जरूरी
अगर कोई निवेशक अपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले स्टॉक एक्सचेंज पर बेच देता है, तो टैक्स देना अनिवार्य हो जाता है। यदि यह बिक्री खरीद के 12 महीने के भीतर की गई है, तो यह लाभ अल्पकालिक (Short Term) माना जाएगा और उस पर टैक्स निवेशक के आयकर स्लैब के अनुसार लगेगा।
अगर बिक्री 12 महीने के बाद होती है, तो यह दीर्घकालिक (Long Term) लाभ माना जाएगा। ऐसे मामलों में निवेशकों को अपने लाभ पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होता है, जिसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता। यह प्रावधान बजट 2024 के बाद से लागू किया गया है।
ब्याज पर भी लगता है टैक्स
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स पर निवेशकों को हर साल 2.5 प्रतिशत का ब्याज मिलता है। यह ब्याज हर छह महीने में निवेशक के बैंक खाते में जमा किया जाता है। हालांकि यह ब्याज टैक्स फ्री नहीं है। इसे “अन्य स्रोतों से आय” (Income from Other Sources) के रूप में गिना जाता है और निवेशकों को इस पर अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है। इस ब्याज पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं काटा जाता, लेकिन आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इसे शामिल करना जरूरी होता है।
कैसे काम करता है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड असल में सोने में निवेश का एक सरकारी और सुरक्षित तरीका है। इसमें निवेशक को असली सोना खरीदने या रखने की जरूरत नहीं पड़ती। बॉन्ड की कीमत सोने के बाजार मूल्य के अनुसार तय होती है।
इन बॉन्ड्स की अवधि आठ साल की होती है और निवेशक चाहें तो पांच साल बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर इसे भुना सकते हैं। रिडेम्पशन मूल्य उस समय के सोने के औसत बाजार मूल्य पर आधारित होता है। इस योजना को सरकार ने 2015 में शुरू किया था ताकि लोग भौतिक सोने की बजाय डिजिटल सोने में निवेश करें।








