छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2010 के ताड़मेटला माओवादी हमले मामले में सभी आरोपितों को बरी रखने का फैसला बरकरार रखा। कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी और जांच एजेंसियों की विफलता पर गंभीर टिप्पणी भी की।
Bilaspur: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सुकमा के चर्चित ताड़मेटला माओवादी हमला मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए सभी आरोपितों को बरी रखने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए थे। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और सबूत जुटाने में हुई कमियों पर कड़ी टिप्पणी की।
हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रखा कायम
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने ताड़मेटला माओवादी हमला मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दक्षिण बस्तर के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश करने में असफल रहा। इसी आधार पर राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया गया।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह बेहद दुखद है कि इतने बड़े हमले के बावजूद जांच एजेंसियां वास्तविक आरोपितों की पहचान और मजबूत साक्ष्य जुटाने में सफल नहीं हो सकीं।
जांच एजेंसियों की भूमिका पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने भी जांच में कई कमियों का जिक्र किया। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि, हाई कोर्ट ने माना कि उपलब्ध सबूत आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
कोर्ट ने भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच को लेकर भी अहम निर्देश दिए। बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में फोरेंसिक साक्ष्य समय पर और वैज्ञानिक तरीके से जुटाए जाने चाहिए, ताकि जांच और अभियोजन प्रक्रिया मजबूत हो सके।
2010 में हुआ था बड़ा माओवादी हमला
यह मामला 6 अप्रैल 2010 का है, जब सुकमा जिले के ताड़मेटला इलाके में सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन और पुलिस बल की संयुक्त टीम पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 76 जवानों की जान गई थी और इसे देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है।
मामले में गिरफ्तार आरोपितों को दक्षिण बस्तर की अदालत ने 2013 में साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।









