टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील अपनी 25 साल पुरानी साझेदारी को खत्म करते हुए जर्मनी की कंपनी मार्ट्रेड की हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। दोनों कंपनियों ने वर्ष 2001 में एक संयुक्त शिपिंग वेंचर की शुरुआत की थी, जो अब नए बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
बिजनेस न्यूज़: भारत की अग्रणी स्टील निर्माता कंपनी टाटा स्टील ने अपने वैश्विक कारोबार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला लिया है। कंपनी ने जर्मनी की शिपिंग एवं लॉजिस्टिक्स कंपनी मार्ट्रेड (Martrade) के साथ लगभग 25 वर्षों से चल रहे संयुक्त उद्यम (Joint Venture) को समाप्त करने की घोषणा की है। इस समझौते के तहत टाटा स्टील जर्मन साझेदार की हिस्सेदारी खरीदकर संयुक्त उद्यम में अपनी भागीदारी को और मजबूत करेगी।
कंपनी के अनुसार, इस सौदे के बाद टाटा स्टील की हिस्सेदारी बढ़कर 74 प्रतिशत हो जाएगी, जबकि जापान की प्रमुख शिपिंग कंपनी एनवाईके (NYK Line) की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी यथावत बनी रहेगी। यह कदम टाटा स्टील की वैश्विक लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
₹335 करोड़ में खरीदी जाएगी मार्ट्रेड की हिस्सेदारी
टाटा स्टील ने जानकारी दी है कि वह मार्ट्रेड समूह की इकाई IQ Martrade Holding and Management से TM International Logistics Limited (TMILL) के लगभग 41.4 लाख इक्विटी शेयर खरीदेगी। इस सौदे का कुल मूल्य लगभग 335 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। लेनदेन पूरा होने के बाद मार्ट्रेड संयुक्त उद्यम से पूरी तरह बाहर हो जाएगी और 26 जुलाई 2001 को हस्ताक्षरित संयुक्त उद्यम समझौता समाप्त हो जाएगा। यह साझेदारी उस दौर में शुरू हुई थी जब टाटा स्टील अपने वैश्विक विस्तार की दिशा में शुरुआती कदम उठा रही थी।
कच्चे माल और स्टील परिवहन में निभाई अहम भूमिका
TM International Logistics पिछले दो दशकों से अधिक समय से टाटा स्टील के लिए समुद्री परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रदान कर रही है। यह संयुक्त उद्यम लौह अयस्क, कोयला और अन्य कच्चे माल को विभिन्न देशों से भारत तक पहुंचाने के साथ-साथ तैयार स्टील उत्पादों के निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिस्सेदारी बढ़ाने से टाटा स्टील को लॉजिस्टिक्स संचालन पर अधिक नियंत्रण मिलेगा, जिससे लागत प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता और दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

वैश्विक रणनीति के अनुरूप बड़ा कदम
टाटा स्टील पिछले कुछ वर्षों से अपने मुख्य व्यवसायों को मजबूत करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी ने यूरोप, एशिया और अन्य बाजारों में अपनी गतिविधियों का पुनर्गठन किया है। ऐसे में संयुक्त उद्यम में अधिक नियंत्रण हासिल करना उसकी दीर्घकालिक कारोबारी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्टील उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सप्लाई चेन चुनौतियों के बीच कंपनियां अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी और लचीला बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। टाटा स्टील का यह फैसला उसी प्रवृत्ति को दर्शाता है।
नीलाचल इस्पात निगम के विस्तार को भी मिली मंजूरी
इस महत्वपूर्ण सौदे के साथ ही टाटा स्टील के बोर्ड ने एक और बड़े निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी ओडिशा स्थित नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 33,873 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना के तहत संयंत्र की क्षमता को बढ़ाकर 4.8 मिलियन टन प्रति वर्ष किया जाएगा। नीलाचल इस्पात निगम को टाटा स्टील ने भारत सरकार की विनिवेश प्रक्रिया के तहत अधिग्रहित किया था।
अब इसे चरणबद्ध तरीके से टाटा स्टील के व्यापक परिचालन ढांचे में शामिल किया जा रहा है। कंपनी का मानना है कि इस विस्तार से उसके लॉन्ग प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो को मजबूती मिलेगी और बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन
वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर भी टाटा स्टील ने सकारात्मक नतीजे दर्ज किए हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) सालाना आधार पर 19 प्रतिशत बढ़कर 2,385 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी अवधि में परिचालन से प्राप्त राजस्व (Revenue from Operations) 15 प्रतिशत बढ़कर 60,412 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी ने जून तिमाही के दौरान पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर 3,579 करोड़ रुपये का निवेश भी किया, जो उसकी विस्तार और आधुनिकीकरण योजनाओं को दर्शाता है।











