टाटा ग्रुप की लीडरशिप में बदलाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच अब तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है। एन चंद्रशेखरन के टाटा सन्स के चेयरमैन पद पर मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने के फैसले पर टाटा ट्रस्ट ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है।
Tata Sons Chairman Succession: टाटा समूह की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही है। N. Chandrasekaran ने मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद टाटा सन्स के चेयरमैन पद के लिए आगे कार्यकाल नहीं लेने का फैसला किया है। इसके बाद Tata Trusts ने पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए उनके निर्णय का सम्मान किया और नए उत्तराधिकारी की तलाश के लिए चयन प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया।
टाटा ट्रस्ट्स के बयान के अनुसार, चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को ट्रस्ट के नॉमिनी निदेशकों को ईमेल भेजकर अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति की इच्छा न होने की जानकारी दी। उनके वर्तमान कार्यकाल की अवधि 20 फरवरी 2027 तक है। ऐसे में समूह के पास अगले शीर्ष नेतृत्व को चुनने और सुचारु बदलाव सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त समय है।
चंद्रशेखरन के योगदान की Tata Trusts ने की सराहना
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन के फैसले का सम्मान करते हुए टाटा सन्स और व्यापक टाटा समूह के लिए उनके योगदान की सराहना की। बयान में कहा गया कि उनके नेतृत्व के दौरान समूह ने महत्वपूर्ण बदलाव, विस्तार और विकास के दौर देखे। चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 में टाटा सन्स के चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल के दौरान समूह ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी रणनीति को आगे बढ़ाया और कई प्रमुख व्यावसायिक परियोजनाओं पर काम किया।
टाटा समूह भारत के सबसे बड़े और विविध कारोबारी समूहों में से एक है। ऑटोमोबाइल, स्टील, आईटी, उपभोक्ता उत्पाद, होटल, विमानन और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में इसकी कंपनियों की मौजूदगी है। ऐसे में टाटा सन्स के चेयरमैन के उत्तराधिकारी का चयन भारतीय कॉरपोरेट जगत के साथ-साथ वैश्विक निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

नए Tata Sons Chairman की तलाश के लिए बनेगी चयन समिति
चंद्रशेखरन के फैसले के बाद नए चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होने की दिशा में कदम उठाया गया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने एक चयन समिति (Selection Committee) बनाने का प्रस्ताव पारित किया है। यह समिति टाटा सन्स के संगठनात्मक नियमों और प्रावधानों के अनुसार संभावित उम्मीदवारों की पहचान कर नए चेयरमैन के लिए सिफारिश करेगी। इसके बाद संबंधित कॉरपोरेट प्रक्रिया के तहत नियुक्ति पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि नेतृत्व परिवर्तन समयबद्ध, व्यवस्थित और सुचारु तरीके से हो, इसके लिए वह टाटा सन्स के साथ पूरा सहयोग करेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में से एक की रणनीतिक दिशा और संचालन में निरंतरता बनी रहे।
N Chandrasekaran ने आगे कार्यकाल नहीं लेने का फैसला क्यों किया?
चंद्रशेखरन ने अपने फैसले के पीछे दूसरे कार्यकाल के विस्तार को लेकर बनी स्थिति का उल्लेख किया था। रिपोर्ट के अनुसार, पांच साल के एक और कार्यकाल के प्रस्ताव को आवश्यक स्तर पर सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल सका। उनके अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स ने कार्यकाल बढ़ाने का समर्थन किया था। इसके अलावा, टाटा सन्स की नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी तथा बोर्ड ने भी प्रस्ताव के पक्ष में सिफारिश की थी। हालांकि, बोर्ड स्तर पर पूर्ण सहमति नहीं बन पाने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
कई महीनों तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बाद चंद्रशेखरन ने दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया से स्वयं को अलग करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उन्होंने बोर्ड से समय रहते उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया है।










