Bitcoin Price: क्या फिर लौटेगी बिटकॉइन में तेजी? शेयर बाजार से क्रिप्टो में आ सकता है पैसा

Bitcoin Price: सितंबर में बिटकॉइन की कीमत में मजबूती देखने को मिली है। 28 सितंबर को BTC करीब ₹80.4 लाख पर कारोबार कर रहा था। एक्सपर्ट्स की नजर ETF निवेश,

निवेश के बाजार में पिछले कुछ समय से बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शेयर बाजार लगातार दबाव में है और इसमें लगातार सातवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है। साल 2020 के बाद यह शेयर बाजार में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट बताई जा रही है।

Bitcoin Crypto Return: वैश्विक वित्तीय बाजार में इस समय निवेशकों का ध्यान एक बार फिर बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी की ओर जा रहा है। एक तरफ शेयर बाजारों में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है, वहीं बिटकॉइन हाल की गिरावट से कुछ हद तक उबरता नजर आया है। इस बदलाव के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या शेयर बाजार में जोखिम से परेशान कुछ निवेशक दोबारा क्रिप्टो एसेट्स की ओर रुख कर सकते हैं।

बिटकॉइन हाल के दिनों में 87,000 डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। हालांकि इसके बाद कीमत में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली। शनिवार सुबह करीब 11 बजे बिटकॉइन लगभग 83,900 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। पिछले एक सप्ताह में इसकी कीमत में 3.50 फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि एक महीने के दौरान इसमें 6 फीसदी से ज्यादा की तेजी रही।

87 हजार डॉलर के बाद क्यों कमजोर हुआ बिटकॉइन?

बिटकॉइन में हालिया तेजी के बावजूद इसकी कीमत पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर बना हुआ है। अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों को प्रभावित किया है। सितंबर का अमेरिकी कंपोजिट PMI 58.4 पर पहुंच गया, जो जुलाई 2021 के बाद का सबसे मजबूत स्तर बताया गया। मजबूत कारोबारी गतिविधियों के साथ कंपनियों की इनपुट और परिवहन लागत में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ीं।

इसके बाद अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी बढ़ी। आम तौर पर जब बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बाजार में दबाव बढ़ता है, तो बिना नियमित आय वाली जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर असर पड़ सकता है। बिटकॉइन पर भी इसी तरह का दबाव देखा गया। इसके अलावा, फ्यूचर्स मार्केट में बड़े पैमाने पर पोजीशन लिक्विडेट होने से कीमत में अचानक उतार-चढ़ाव आया।

बिटकॉइन में पहले तेजी की वजह क्या रही?

हाल की रिकवरी के पीछे कई कारकों का योगदान बताया गया है। बिटकॉइन ने लंबे अंतराल के बाद अपने 50-वीक मूविंग एवरेज के ऊपर साप्ताहिक क्लोजिंग दर्ज की। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से वैश्विक महंगाई के दबाव में कमी की उम्मीद बनी। अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF में निवेश प्रवाह भी क्रिप्टो बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहा है। संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से बिटकॉइन की मांग को समर्थन मिल सकता है।

इसी दौरान शॉर्ट पोजीशन लेने वाले ट्रेडर्स के बड़े सौदों के लिक्विडेट होने से भी बाजार में जबरन खरीदारी का दबाव बना, जिससे बिटकॉइन की कीमत में तेजी तेज हुई।

क्या बिटकॉइन में दोबारा बड़ा उछाल आ सकता है?

बिटकॉइन के भविष्य के प्रदर्शन को लेकर बाजार में अलग-अलग राय हैं। क्रिप्टो इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ बिटकॉइन के ऐतिहासिक प्राइस साइकल का हवाला देते हुए इसकी कीमत में समय-समय पर आने वाली बड़ी तेजी की ओर ध्यान दिलाते हैं। वजीरएक्स के संस्थापक निश्चल शेट्टी के अनुसार, बिटकॉइन के पिछले बाजार चक्रों में लगभग चार साल के अंतराल पर महत्वपूर्ण तेजी देखने को मिली है। हालांकि, ऐतिहासिक पैटर्न भविष्य की कीमत की गारंटी नहीं देता।

2021 में बिटकॉइन ने उस समय का रिकॉर्ड स्तर बनाया था। इसके बाद 2025 में भी क्रिप्टोकरेंसी ने नया रिकॉर्ड बनाया और कीमत 1.20 लाख डॉलर के ऊपर पहुंची। इसी चक्र के आधार पर कुछ बाजार प्रतिभागी 2028-29 के आसपास एक और बड़े तेजी के दौर की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, यह महज ऐतिहासिक पैटर्न पर आधारित अनुमान है। 

बिटकॉइन की कीमत भविष्य में किस दिशा में जाएगी, यह वैश्विक ब्याज दरों, ETF में निवेश, संस्थागत मांग, नियामकीय बदलाव और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

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