ओडिशा CM मोहन चरण माझी ने SIR को पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रक्रिया बताते हुए कांग्रेस पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने 13 करोड़ नामों, Form 6 और मतदाता डेटाबेस से जुड़े आरोपों को खारिज किया और चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया।
भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का बचाव करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने SIR को पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रक्रिया बताया और आरोप लगाया कि चुनावी हार के बाद कांग्रेस देश में “अराजकता” का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। रविवार को राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों से बातचीत में माझी ने उन आरोपों को खारिज किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों की अनदेखी करते हुए एकतरफा फैसले लिए। उन्होंने इस आरोप को “पूरी तरह गलत और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया। हालांकि, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हाल में राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हुई है। आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा था कि देशभर में SIR लागू करने का 24 जून 2025 का आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था।
कांग्रेस पर संवैधानिक संस्था को बदनाम करने का आरोप
माझी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोगों को गुमराह कर देश में चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी लाभ के लिए निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है; कांग्रेस की ओर से इस बयान पर अलग प्रतिक्रिया इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है।
माझी ने यह भी कहा कि चुनावी नतीजे किसी राजनीतिक दल के पक्ष में होने पर प्रक्रिया को सही और हार होने पर लोकतंत्र को खतरे में बताना उचित नहीं है।
13 करोड़ नाम हटाने के आरोप पर माझी का जवाब
SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने के आरोप पर माझी ने अलग-अलग श्रेणियों का आंकड़ा सामने रखा।
उनके मुताबिक, इनमें:
- 2.8 करोड़ मतदाता मृत पाए गए;
- 3 करोड़ मतदाता अनुपस्थित थे;
- 6.3 करोड़ मतदाता दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके थे;
- करीब 1 करोड़ नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे।
ये आंकड़े मुख्यमंत्री ने अपने बयान में दिए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, SIR के अंतिम चरण वाले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंतिम मतदाता आंकड़े अभी पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएंगे।
इसलिए अलग-अलग चरणों में हटाए गए नामों और अंतिम मतदाता सूची में बदलाव के आंकड़ों को एक ही अंतिम संख्या के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
Form 6 पर भी मुख्यमंत्री ने दी सफाई
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव को लेकर भी सवाल उठे हैं। माझी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि Form 6 में कोई अनियमित बदलाव नहीं किया गया है और प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
चुनाव आयोग ने भी हाल में स्पष्ट किया था कि मूल Form 6 में बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, SIR के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र यानी Annexure D जोड़ा गया है।
26 सितंबर को आयोग ने कहा कि SIR से संबंधित Form 6 की घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है और गैर-SIR अवधि में संबंधित नियमों के तहत लागू फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे।
Gen-Z मतदाताओं का भी किया जिक्र
माझी ने युवा मतदाताओं के पंजीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में 18 से 28 वर्ष की उम्र के 17.38 करोड़ Gen-Z मतदाता हैं।
उन्होंने दावा किया कि हर महीने करीब 50,000 युवा मतदाता सूची में शामिल किए जा रहे हैं और Form 6 में कोई अनियमितता नहीं है।
चुनाव आयोग की मौजूदा मतदाता सेवा प्रणाली में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र नागरिक नए मतदाता के रूप में Form 6 के जरिए पंजीकरण कर सकते हैं। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर SIR-2026 के लिए भी Form 6 और संबंधित घोषणा-पत्र की सुविधा उपलब्ध है।
बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका का जिक्र
माझी ने कहा कि राजनीतिक दलों ने SIR प्रक्रिया में अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए हैं। उनके मुताबिक, इन एजेंटों को मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अधिकार है।
उनका तर्क है कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से प्रक्रिया में निगरानी और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर बना रहता है।
चुनाव आयोग ने भी 26 सितंबर को कहा था कि SIR से संबंधित दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी है। आयोग ने कुछ श्रेणियों के मतदाताओं के लिए विशेष सहायता और नामांकन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
मतदाता डेटाबेस केंद्रीकृत होने के आरोप को नकारा
मतदाता डेटा के केंद्रीकरण के आरोपों को भी ओडिशा के मुख्यमंत्री ने खारिज किया।
उन्होंने कहा कि राज्यों में मतदाता सूचियों का प्रबंधन अभी भी Chief Electoral Officer (CEO) और Electoral Registration Officer (ERO) के स्तर पर किया जाता है। उनके मुताबिक, ERO के कानूनी और प्रक्रियात्मक अधिकारों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
माझी ने कहा कि बदलाव केवल प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से संबंधित है, जिसमें ECI-NET और ERO-NET मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने भी कहा है कि फील्ड अधिकारियों को ECINET में उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुरूप भूमिका-आधारित पहुंच दी गई है। साथ ही, आयोग ने ECINET की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाने और उसमें IIT या IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करने का फैसला किया है।
CEC की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों को बताया राजनीतिक
मुख्यमंत्री माझी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को भी खारिज किया।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। चुनाव आयोग ने भी 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा था कि SIR से जुड़े विभिन्न आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किए गए थे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। हालांकि, आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में SIR आदेशों को सर्वसम्मत बताया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
माझी ने SIR की वैधता के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के रुख का भी उल्लेख किया। चुनाव आयोग के अनुसार, देशभर में SIR का आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था और इसे 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बरकरार रखा गया।
हालांकि, SIR से जुड़े कुछ पहलुओं पर न्यायिक निगरानी और सवाल जारी हैं। सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR के दौरान जारी कुछ नोटिसों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और मतदाताओं के लिए WhatsApp और ईमेल के जरिए जवाब देने जैसे विकल्पों का सुझाव दिया था।
केरल कांग्रेस नेता के बयान का किया उल्लेख
माझी ने कांग्रेस के भीतर SIR को लेकर अलग-अलग विचारों का भी हवाला दिया। उन्होंने केरल के कांग्रेस नेता और राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने SIR का समर्थन किया है और पिछली वाम सरकारों के दौरान मतदाता सूचियों में फर्जी मतदाताओं की मौजूदगी की बात स्वीकार की थी।
माझी ने इस उदाहरण का इस्तेमाल कांग्रेस के मौजूदा विरोध पर सवाल उठाने के लिए किया। हालांकि, किसी नेता के पुराने या व्यक्तिगत बयान को कांग्रेस की आधिकारिक राष्ट्रीय स्थिति के बराबर नहीं माना जा सकता।
2023 के कानून का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 2023 के कानून के बाद चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता को शामिल किया गया है।
उनके अनुसार, इससे नियुक्ति प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक भागीदारी वाली हुई है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर 2023 के कानून में बदलाव देश में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और नियुक्ति प्रक्रिया पर व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है।
SIR पर राजनीतिक बहस जारी
SIR को लेकर इस समय दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। दूसरी ओर, विपक्षी दल प्रक्रिया, डेटा प्रबंधन, Form 6 और मतदाता नामों में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
ओडिशा के मुख्यमंत्री ने अब आयोग की प्रक्रिया का बचाव करते हुए कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बताया है। वहीं, चुनाव आयोग ने हालिया बैठकों में SIR प्रक्रिया, ECINET की समीक्षा और मतदाता दावों-आपत्तियों को लेकर कई कदम घोषित किए हैं।
आने वाले दिनों में SIR से जुड़े अंतिम मतदाता आंकड़े, दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया और अदालतों में लंबित मामलों के परिणाम इस विवाद के अगले चरण को प्रभावित कर सकते हैं।











