गोरखपुर में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए उस वीडियो की सच्चाई सामने आ गई है, जिसमें सड़क पर एक युवक को कथित दरोगा की जूते से पिटाई करते हुए दिखाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और अधिवक्ता समुदाय से जुड़े लोगों के बीच हलचल मच गई थी, क्योंकि वीडियो में एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में बाइक पर दिखाई दे रहा था और दूसरा युवक खुद को अधिवक्ता की तरह पेश करते हुए उससे विवाद करता नजर आ रहा था। जांच शुरू हुई तो पूरा मामला ही अलग निकला। पुलिस के अनुसार वीडियो में दिखाई दे रहा कथित पुलिसकर्मी पुलिस विभाग का कर्मचारी नहीं है और वकील की ड्रेस में दिख रहा युवक भी वास्तविक अधिवक्ता नहीं है। पुलिस का कहना है कि दोनों ने सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज बढ़ाने के लिए इस पूरी घटना को शूट किया था।
मामला गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र का है। रविवार को सोशल मीडिया पर करीब 2 मिनट 55 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में सड़क पर एक बाइक सवार व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई देता है। इसी दौरान काली सदरी और सफेद शर्ट पहने एक युवक वहां पहुंचता है और कथित पुलिसकर्मी से बहस करने लगता है। देखते ही देखते दोनों के बीच विवाद बढ़ता है और हाथापाई शुरू हो जाती है। वीडियो में युवक वर्दी पहने व्यक्ति को जूते से मारता हुआ नजर आता है। आसपास मौजूद कुछ लोग दोनों के बीच बचाव करते भी दिखाई देते हैं। वीडियो देखने वाले कई लोगों को लगा कि वास्तव में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच सड़क पर विवाद हुआ है।
वीडियो में युवक कथित दरोगा से अपने पिता को थाने ले जाने को लेकर सवाल करता दिखाई देता है। वह पूछता है कि उसके पिता को थाने में क्यों बैठाया गया था। जवाब में वर्दी पहना व्यक्ति कहता है कि जब युवक घर पर नहीं मिला तो उसके पिता को थाने ले जाना पड़ा। इसके बाद बातचीत तेजी से विवाद में बदल जाती है और दोनों सड़क पर ही एक-दूसरे से उलझ जाते हैं। इसी दौरान युवक जूते से वर्दीधारी व्यक्ति की पिटाई करता नजर आता है। वीडियो में आसपास खड़े कुछ लोगों को बीच-बचाव करते हुए भी दिखाया गया है।
वीडियो में कुछ ऐसे संवाद भी हैं, जिनसे इसे वास्तविक घटना दिखाने की कोशिश की गई। इसमें सांसद को फोन करने और कथित पुलिसकर्मी का ट्रांसफर कराने जैसी बातें भी सुनाई देती हैं। एक जगह वीडियो बनाने की बात भी सामने आती है। इन्हीं संवादों और घटनाक्रम के कारण वीडियो देखने वालों को लगा कि मामला वास्तव में किसी पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच हुआ विवाद है। सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से शेयर होने लगा और पुलिस तक भी इसकी जानकारी पहुंची।
वीडियो वायरल होने के बाद गोरखपुर पुलिस ने इसकी गंभीरता से जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान और उनके पुलिस या अधिवक्ता होने की जानकारी का सत्यापन कराया। जांच में सामने आया कि वर्दी पहनकर वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति पुलिस विभाग में तैनात नहीं है। इसी तरह अधिवक्ता के रूप में नजर आ रहा युवक भी वास्तविक वकील नहीं पाया गया। इसके बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना वास्तविक पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच हुई मारपीट नहीं थी।
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि शाहपुर क्षेत्र से संबंधित वायरल वीडियो की जांच कराई गई थी। जांच में वीडियो बनावटी पाया गया। उनके अनुसार वीडियो में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के रूप में दिखाई दे रहे दोनों व्यक्ति वास्तविक पुलिसकर्मी या अधिवक्ता नहीं हैं। पुलिस का कहना है कि वीडियो को सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज हासिल करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि इस तरह के वीडियो से पुलिस और अधिवक्ता समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है, इसलिए मामले में कार्रवाई की जा रही है।
जांच के बाद पुलिस ने मामले में दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। शाहपुर थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो किसने बनाया, इसे शूट करने में और कौन लोग शामिल थे तथा इसे सोशल मीडिया पर किस तरह प्रसारित किया गया। वीडियो के पीछे केवल मनोरंजन और व्यूज हासिल करना उद्देश्य था या इसके साथ किसी अन्य तरह की मंशा भी जुड़ी थी, इसकी जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के मामले में यह घटना एक बार फिर बताती है कि किसी वीडियो को देखकर तुरंत उसे वास्तविक घटना मान लेना सही नहीं होता। वीडियो में पुलिस की वर्दी दिखाई देने भर से यह जरूरी नहीं कि व्यक्ति वास्तव में पुलिसकर्मी हो। इसी तरह किसी व्यक्ति के अधिवक्ता जैसी ड्रेस पहन लेने से उसके वास्तविक वकील होने की पुष्टि नहीं होती। गोरखपुर के इस मामले में भी शुरुआती तौर पर वीडियो देखने पर कहानी वास्तविक लग रही थी, लेकिन पुलिस सत्यापन के बाद दोनों किरदारों की पहचान ही अलग निकली।
वायरल वीडियो में सड़क का माहौल भी वास्तविक घटना जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी। बाइक, पुलिस जैसी वर्दी, अधिवक्ता जैसी पोशाक, बहस, गाली-गलौज और मारपीट के दृश्य शामिल होने के कारण वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जाने लगा। वीडियो में कुछ लोग बीच-बचाव करते हुए भी दिखाई देते हैं, जिससे इसकी विश्वसनीयता और बढ़ती हुई नजर आई। लेकिन पुलिस जांच में जब वीडियो में शामिल लोगों का सत्यापन हुआ तो पूरा घटनाक्रम फर्जी पाया गया।
पुलिस के मुताबिक, वीडियो करीब दो मिनट 55 सेकंड लंबा है। इसमें पहले कथित अधिवक्ता वर्दीधारी बाइक सवार को रोकता है। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत होती है और फिर मामला हाथापाई तक पहुंच जाता है। युवक जूते से वर्दीधारी व्यक्ति को मारता दिखाई देता है। वीडियो में आसपास के लोगों की मौजूदगी भी दिखाई गई है। इस पूरी स्क्रिप्ट को इस तरह तैयार किया गया कि देखने वाले इसे वास्तविक सड़क विवाद समझें। पुलिस ने जांच के बाद इसे बनावटी बताया है।
पुलिस अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। ऐसे वीडियो से किसी संस्था या पेशे की छवि प्रभावित हो सकती है। खासकर पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल करके नकली घटना तैयार करना गंभीर विषय माना जा रहा है। इसी कारण पुलिस ने वीडियो बनाने और प्रसारित करने वाले लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
गोरखपुर के शाहपुर क्षेत्र से सामने आए इस मामले में फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और वीडियो से जुड़े अन्य पहलुओं को भी देखा जा रहा है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि वीडियो में दिख रहा ‘दरोगा’ असली पुलिसकर्मी नहीं था और कथित ‘वकील’ भी वास्तविक अधिवक्ता नहीं था। यानी सोशल मीडिया पर जिस मारपीट को असली पुलिस-वकील विवाद समझकर देखा जा रहा था, वह दरअसल लाइक और व्यूज हासिल करने के लिए बनाया गया वीडियो था।
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी यह जरूरी हो जाता है कि किसी वायरल वीडियो को आगे शेयर करने से पहले उसकी पुष्टि करें। पुलिस ने जिस तेजी से वीडियो का सत्यापन किया, उससे फर्जी घटनाओं की पहचान करने में जांच की भूमिका सामने आती है। फिलहाल शाहपुर पुलिस पूरे मामले में शामिल युवकों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो को किस उद्देश्य से तैयार किया गया तथा इसके प्रसार में और कौन-कौन लोग शामिल थे।











