टी20 वर्ल्ड कप 2026: टेबल टॉपर होने के बावजूद दो टीमें नहीं खेल पाएंगी सेमीफाइनल, ICC के फैसले पर विवाद

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में चौंकाने वाला मोड़—टेबल टॉपर होने के बावजूद दो टीमें सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाईं। ICC के नियमों और नेट रन रेट पर उठे सवाल। जानें

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सुपर-8 चरण शुरू होने वाला है, लेकिन टूर्नामेंट को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) पर पहले ही आलोचना शुरू हो गई है। विवाद का कारण है कि लीग स्टेज में ग्रुप टॉप करने वाली सभी टीमें सुपर-8 में एक ही ग्रुप में शामिल की गई हैं।

स्पोर्ट्स न्यूज़: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सुपर-8 के मुकाबले शनिवार, 21 फरवरी से शुरू हो रहे हैं। हालांकि, इस बार इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, लीग स्टेज में अपने-अपने ग्रुप में टॉप करने वाली सभी टीमों को सुपर-8 में एक ही ग्रुप में रखा गया है, जिसे लेकर अब आईसीसी पर सवाल उठ रहे हैं।

अक्सर टूर्नामेंट में यह ध्यान रखा जाता है कि अंक तालिका में पहले स्थान पर रहने वाली टीम को सुपर-8 में फायदा मिले। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, और सभी टॉपर टीमों को एक ग्रुप में डाल दिया गया है। इसका परिणाम यह है कि इस ग्रुप से कम से कम दो टीमों का सेमीफाइनल से बाहर होना तय है। इसी फैसले को लेकर अब आईसीसी की व्यापक आलोचना हो रही है।

सुपर-8 का फॉर्मेट और आलोचना

सुपर-8 के फेज़ में सभी टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया है। लेकिन ICC का यह फॉर्मेट अब सवालों के घेरे में है। आम तौर पर टूर्नामेंट में लीग स्टेज में टॉप करने वाली टीमों को सेमीफाइनल में आसानी से जगह मिलती है, ताकि अंक तालिका में बेहतर प्रदर्शन का फायदा सुनिश्चित हो। हालांकि, इस बार ऐसा नहीं हुआ। सुपर-8 के पहले ग्रुप में सभी टेबल टॉपर को एक साथ रखा गया है। इसका मतलब यह हुआ कि इस ग्रुप की चार टीमों में से केवल दो ही सेमीफाइनल में पहुंच पाएंगी, जबकि दूसरे ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें शामिल हैं, जहां से सेमीफाइनल में पहुंचना आसान होगा।

इस फैसले से क्रिकेट विशेषज्ञ, पूर्व खिलाड़ियों और फैंस में नाराजगी है। आलोचना का मुख्य कारण यह है कि लीग में बेहतर प्रदर्शन करने का कोई वास्तविक फायदा नहीं मिल रहा।

सुपर-8 में टीमों का विभाजन

टी20 वर्ल्ड कप 2026: टेबल टॉपर होने के बावजूद दो टीमें नहीं खेल पाएंगी सेमीफाइनल, ICC के फैसले पर विवाद

पहला ग्रुप

  • भारत
  • जिम्बाब्वे
  • वेस्टइंडीज
  • साउथ अफ्रीका

इन चारों टीमों ने अपने-अपने ग्रुप में पहला स्थान हासिल किया था।

दूसरा ग्रुप

  • पाकिस्तान
  • न्यूजीलैंड
  • श्रीलंका
  • इंग्लैंड

ये टीमें लीग स्टेज में दूसरे स्थान पर रही थीं। इस फॉर्मेट में एक ही ग्रुप में टेबल टॉपर को रखना विवादास्पद माना जा रहा है, क्योंकि इसका परिणाम यह हुआ कि दो टीमें अपने अच्छे प्रदर्शन के बावजूद सेमीफाइनल से बाहर हो जाएंगी।

ICC के इस फैसले का कारण

ICC का कहना है कि यह फॉर्मेट भारत और श्रीलंका में होने वाले टूर्नामेंट की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। पहले ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया शामिल होने वाला था, लेकिन उनकी जगह जिम्बाब्वे ने क्वालीफाई किया। जिम्बाब्वे ने श्रीलंका को हराकर ग्रुप टॉप किया। ऐसे में अगर श्रीलंका ने मुकाबला जीत भी लिया होता, तो भी भारत के ग्रुप में जिम्बाब्वे पहले स्थान पर बनी रहती और दूसरे नंबर की टीम सेमीफाइनल के लिए संघर्ष करती।

ICC का दावा है कि यह स्थिति अनजाने में पैदा हुई और इसका उद्देश्य टूर्नामेंट के संतुलन को बनाए रखना था। हालांकि, क्रिकेट फैंस और विश्लेषकों का मानना है कि इस फॉर्मेट से टेबल टॉप करने का कोई वास्तविक फायदा नहीं मिल रहा, और इससे टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

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