यूपी के पांच ऊर्जा निगम निदेशकों को तीन महीने का सेवा विस्तार, नए चयन में देरी बनी वजह

उत्तर प्रदेश सरकार ने ऊर्जा निगमों के पांच निदेशकों का कार्यकाल तीन महीने बढ़ाया। नियमित नियुक्तियों में देरी के कारण अधिकारियों को सेवा विस्तार मिला है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने ऊर्जा निगमों के पांच निदेशकों का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है। यह विस्तार नियमित निदेशकों के चयन में देरी के कारण दिया गया है। आदेश के अनुसार, अवधि पूरी होने या नए निदेशकों की नियुक्ति तक वे पद पर बने रहेंगे।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के ऊर्जा निगमों में कार्यरत पांच निदेशकों को तीन महीने का सेवा विस्तार दिया है। इस फैसले से वितरण, वाणिज्य, वित्त और तकनीकी विभागों में काम कर रहे अधिकारियों को राहत मिली है। नियमित निदेशकों के चयन के लिए 30 जुलाई को बैठक हो चुकी है, लेकिन अब तक नियुक्ति संबंधी आदेश जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में मौजूदा अधिकारियों को नए चयन या निर्धारित अवधि तक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पांच निदेशकों को मिला तीन महीने का सेवा विस्तार

राज्य सरकार की ओर से जारी निर्णय के तहत ऊर्जा निगमों के पांच अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाया गया है। इनमें निदेशक (वितरण) ज्ञानेन्द्र धर द्विवेदी, केस्को कानपुर के निदेशक (वाणिज्य) राकेश वाष्र्णेय, पश्चिमांचल डिस्कॉम के निदेशक (वित्त) स्वतंत्र कुमार तोमर, निदेशक (तकनीकी) नन्द किशोर मिश्र और निदेशक (वाणिज्य) संजय जैन शामिल हैं।

इन अधिकारियों को तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। हालांकि, यदि इस अवधि के भीतर नियमित निदेशकों का चयन और नियुक्ति हो जाती है, तो सेवा विस्तार की व्यवस्था उसी के अनुसार प्रभावी रहेगी। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब ऊर्जा निगमों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर नियमित नियुक्तियों का इंतजार किया जा रहा है।

निदेशकों की जिम्मेदारी निगमों के अलग-अलग विभागों के संचालन और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी होती है। ऐसे में पदों पर अधिकारियों की निरंतर उपलब्धता जरूरी मानी जाती है, ताकि नियमित नियुक्तियां होने तक कामकाज में किसी तरह की बाधा न आए।

चयन प्रक्रिया पूरी होने में क्यों हुई देरी?

ऊर्जा निगमों में नियमित निदेशकों की नियुक्ति के लिए 30 जुलाई को बैठक हो चुकी है। इसके बावजूद चयनित अधिकारियों के नामों से संबंधित नियुक्ति आदेश अब तक जारी नहीं हुए हैं। इसी देरी के कारण मौजूदा निदेशकों को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया गया है।

नियमित चयन प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपे रखने से विभागीय कामकाज में निरंतरता बनी रह सकती है। हालांकि, नियुक्ति आदेश जारी होने में देरी के विस्तृत कारणों को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

ऊर्जा निगमों में आगे क्या होगा?

पांच निदेशकों को दिया गया सेवा विस्तार फिलहाल अस्थायी व्यवस्था है। अब आगे की प्रक्रिया नियमित निदेशकों के चयन और उनकी नियुक्ति के आदेश जारी होने पर निर्भर करेगी। यदि निर्धारित अवधि में चयन पूरा हो जाता है, तो संबंधित पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकेगी।

ऊर्जा निगमों में वितरण, वित्त, वाणिज्य और तकनीकी विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इन विभागों के सुचारु संचालन का असर बिजली आपूर्ति व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और उपभोक्ताओं से जुड़ी सेवाओं पर भी पड़ता है। इसलिए नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी होने तक अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी पर बनाए रखना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

फिलहाल सरकार के इस निर्णय से पांचों निदेशकों को अतिरिक्त समय मिला है। अब निगाहें नियमित नियुक्तियों के आदेश पर रहेंगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इन पदों पर आगे कौन जिम्मेदारी संभालेगा।

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