आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 100 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी है। अदालत ने नामांकन से वंचित उम्मीदवारों की शिकायतों की जांच कर समयसीमा पर फैसला लेने को कहा है।
नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच राज्य चुनाव आयोग ने सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों में आगे की चुनाव प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है। अदालत ने उन उम्मीदवारों की शिकायतों की जांच करने को कहा था, जो कथित तौर पर हिंसा, धमकी और कानून-व्यवस्था की समस्याओं के कारण नामांकन पत्र दाखिल नहीं कर पाए। राज्य चुनाव आयोग (APSEC) के इस फैसले से 13 नगर निगमों और 87 नगरपालिकाओं तथा नगर पंचायतों की चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है। आयोग ने कहा कि जिला कलेक्टरों, जिला चुनाव अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को अंतिम उम्मीदवार सूची जारी करने की प्रक्रिया टालने और नामांकन की समयसीमा बढ़ाने की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समयसीमा बढ़ाई जाती है, तो संबंधित उम्मीदवारों को निर्णय घोषित होने के बाद कम से कम 48 घंटे का अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन विवाद पर क्या कहा?
21 अक्टूबर को जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने युवाजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की याचिका पर सुनवाई की। पार्टी ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें नामांकन की समयसीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।
YSRCP ने आरोप लगाया कि राज्य के कई इलाकों में उसके उम्मीदवारों को हिंसा, धमकी और अन्य बाधाओं के कारण नामांकन दाखिल करने से रोका गया। पार्टी ने अदालत के सामने शिकायतों, दस्तावेजों और कथित घटनाओं से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी रखे।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि शिकायतों की जांच जरूरी है। अदालत ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह पार्टी और संबंधित उम्मीदवारों की ओर से दिए गए अभ्यावेदनों, सहायक दस्तावेजों और वीडियो सहित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की समीक्षा करे।
पीठ ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संवैधानिक लोकतंत्र के लिए बुनियादी महत्व रखते हैं। उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकना चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप सामान्यतः सीमित रहता है, लेकिन स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों में अदालतें हस्तक्षेप कर सकती हैं।
अंतिम उम्मीदवार सूची जारी करने पर लगाई गई रोक
आयोग को पहले 21 अक्टूबर को अंतिम उम्मीदवार सूची जारी करनी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस प्रक्रिया को आगे के लिए टाल दिया गया।
अदालत ने आयोग को 22 अक्टूबर तक यह निर्णय लेने को कहा कि क्या उन शहरी निकायों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए, जहां उम्मीदवार कथित तौर पर कानून-व्यवस्था की समस्याओं के कारण अपने दस्तावेज जमा नहीं कर पाए।
यदि आयोग समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लेता है, तो उम्मीदवारों को कम से कम 48 घंटे का अतिरिक्त अवसर देना होगा। इसके लिए चुनाव अधिसूचना में आवश्यक संशोधन भी करना होगा।
अदालत ने राज्य चुनाव आयोग और प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने से रोकने वाली परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों।
100 शहरी निकायों में चुनाव प्रक्रिया क्यों रुकी?
राज्य चुनाव आयोग ने बुधवार देर शाम जारी आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सभी 100 शहरी निकायों में आगे की चुनावी गतिविधियां तत्काल प्रभाव से रोक दी गई हैं।
चुनाव प्रक्रिया में नामांकन दाखिल करना, दस्तावेजों की जांच और अंतिम उम्मीदवार सूची जारी करना जैसे महत्वपूर्ण चरण शामिल हैं। आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस से संबंधित क्षेत्रों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है, ताकि शिकायतों की तथ्यात्मक जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जा सके।
यह रोक चुनाव रद्द किए जाने के समान नहीं है। फिलहाल इसका उद्देश्य नामांकन से संबंधित शिकायतों की समीक्षा करना और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। आगे का कार्यक्रम आयोग के अगले आदेश और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगा।
YSRCP ने किन इलाकों में हिंसा और धमकी के आरोप लगाए?
YSRCP ने पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति सहित कई स्थानों पर अपने उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने का आरोप लगाया। पार्टी के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों के साथ मारपीट की गई, उन्हें धमकाया गया और नामांकन केंद्रों तक पहुंचने में बाधाएं पैदा की गईं।
पार्टी ने दावा किया कि इन घटनाओं के कारण कई वार्डों में उसके उम्मीदवार चुनावी प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके। याचिका में यह आशंका भी जताई गई कि विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल नहीं कर पाने से सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि, ये आरोप YSRCP की ओर से लगाए गए हैं। उनकी स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक घटना में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकता है।
पार्टी ने अदालत से उम्मीदवारों को पुलिस सुरक्षा देने, नामांकन की अवधि बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त नामांकन केंद्र स्थापित करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन शिकायतों पर विचार करते हुए चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
पुलिवेंदुला में भी सामने आई थी झड़प
स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला में भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबर सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार, तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनसेना और YSRCP से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच नामांकन केंद्र के पास विवाद हुआ।
घटना के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। मीडिया रिपोर्टों में हवा में छह राउंड फायरिंग और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है।
इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और उम्मीदवारों की पहुंच से जुड़े सवालों को और गंभीर बना दिया। हालांकि, किसी भी घटना में जिम्मेदारी तय करने के लिए पुलिस रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
उम्मीदवारों की सुरक्षा के लिए पुलिस और CCTV व्यवस्था के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने नामांकन केंद्रों पर उचित पुलिस बल तैनात करने और CCTV निगरानी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
इन निर्देशों का उद्देश्य उम्मीदवारों को बिना दबाव या भय के नामांकन दाखिल करने का अवसर देना है। CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कथित घटनाओं की जांच में भी मदद कर सकते हैं। आयोग को संबंधित शिकायतों की समीक्षा करते समय उम्मीदवारों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और अन्य सबूतों पर विचार करना है। जिला प्रशासन और पुलिस की रिपोर्ट भी इस निर्णय का आधार बनेंगी।










