झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू के लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच रेलवे अंडरपास का निर्माण चार महीने में पूरा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने बरसात में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा।
रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड में रेलवे लाइन पार करने के दौरान ग्रामीणों को होने वाली परेशानी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने रेलवे को लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच अंडरपास का निर्माण चार महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही बरसात में अंडरपास में पानी भरने की समस्या दूर करने को कहा, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को जोखिम उठाकर रेलवे ट्रैक पार न करना पड़े।
पलामू में चार महीने के भीतर पूरा करना होगा अंडरपास
झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड में रेलवे अंडरपास के निर्माण को लेकर रेलवे को समयसीमा निर्धारित की है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच रेलवे लाइन पार करने में ग्रामीणों को हो रही परेशानी पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
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अदालत ने कहा कि यदि अंडरपास का निर्माण अभी अधूरा है, तो इसे चार महीने के भीतर पूरा किया जाए। इसके साथ ही बरसात के दौरान अंडरपास में पानी जमा होने की समस्या का स्थायी समाधान निकालने का निर्देश भी दिया गया है।
इस मामले में लालगढ़ वेलफेयर सोसाइटी की ओर से जनहित याचिका दायर की गई थी। अदालत के निर्देशों के बाद खंडपीठ ने याचिका का निष्पादन कर दिया। हालांकि, रेलवे को आदेश के अनुपालन से संबंधित शपथपत्र दाखिल करना होगा।
रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग पर कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज या मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग बनाने की मांग उठाई गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि मौजूदा अंडरपास में बरसात के समय पानी भर जाने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है। स्कूली बच्चों समेत अन्य लोगों को या तो पानी से भरे अंडरपास से गुजरना पड़ता है या रेलवे ट्रैक पार करने का जोखिम उठाना पड़ता है।
हालांकि, हाई कोर्ट ने रेलवे ओवरब्रिज या मानवयुक्त क्रॉसिंग बनाने का सीधा आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह के निर्माण की जरूरत और तकनीकी उपयुक्तता का आकलन करना संबंधित विशेषज्ञों और विभागों का काम है।
रेलवे ने भी अदालत को बताया कि मौजूदा नीति के तहत नई रेलवे क्रॉसिंग खोलने का प्रावधान नहीं है। दुर्घटनाओं का खतरा कम करने के लिए पुरानी क्रॉसिंग को भी चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर उनकी जगह अंडरपास या ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं।
खर्च और तकनीकी मानकों का भी दिया गया हवाला
रेलवे की ओर से सुनवाई के दौरान कहा गया कि संबंधित स्थान पर ओवरब्रिज बनाने के लिए निर्धारित तकनीकी मानक पूरे नहीं होते। इसके अलावा, निर्माण लागत में हिस्सेदारी को लेकर राज्य सरकार की सहमति भी नहीं मिली है। इन परिस्थितियों के कारण ओवरब्रिज निर्माण की मांग पर आगे बढ़ना संभव नहीं बताया गया।
अदालत ने फिलहाल अंडरपास को पूरा करने और उसमें जलभराव की समस्या दूर करने पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है, ताकि उन्हें रेलवे ट्रैक पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
मार्च 2027 में होगी अनुपालन की समीक्षा
हाई कोर्ट ने रेलवे अधिकारियों को 12 मार्च 2027 तक अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में आगे की सुनवाई और आदेश के अनुपालन की समीक्षा के लिए 18 मार्च 2027 की तारीख तय की गई है।
अब रेलवे को निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने के साथ जलनिकासी की समस्या का प्रभावी समाधान भी करना होगा। इससे लालगढ़ बिहार और पांजरिकला के ग्रामीणों, विशेषकर स्कूली बच्चों, को सुरक्षित रास्ता मिलने की उम्मीद है।









