पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर विधानसभा में बेअदबी विरोधी विधेयक को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पीकर को विशेषाधिकार हनन का नोटिस देकर मामले की जांच और स्पष्टीकरण की मांग की है।
चंडीगढ़: पंजाब में बेअदबी विरोधी विधेयकों को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेता परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपा है। उनका आरोप है कि 13 अक्टूबर को पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने 2018 के विधेयक के बजाय 2016 के विधेयक का उल्लेख किया। परगट सिंह ने मामले में स्पष्टीकरण मांगने और आरोप सही पाए जाने पर इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजने की अपील की है।
बेअदबी विधेयक पर मुख्यमंत्री के जवाब को लेकर विवाद
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। 22 अक्टूबर को भेजे गए नोटिस में उन्होंने आरोप लगाया कि बेअदबी विरोधी विधेयक से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने सदन में सही जानकारी नहीं दी।
परगट सिंह के अनुसार, उन्होंने 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री से वर्ष 2018 के बेअदबी विरोधी विधेयक और इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक को लेकर सवाल पूछा था। उनका दावा है कि जवाब में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2016 के विधेयक और उस पर राष्ट्रपति की कार्रवाई का उल्लेख किया, जबकि सवाल वर्ष 2018 के विधेयक से संबंधित था।
कांग्रेस नेता ने विधानसभा अध्यक्ष से इस मामले में मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण मांगने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि सदन को गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है, तो मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाना चाहिए।
2016 और 2018 के विधेयकों में क्या है अंतर?
परगट सिंह ने अपने नोटिस में दोनों विधेयकों के बीच अंतर का मुद्दा उठाया है। उनके मुताबिक, वर्ष 2016 के विधेयक में सजा के प्रावधानों को लेकर संवैधानिक सवाल उठे थे। इसके बाद वर्ष 2018 में संशोधित विधेयक लाया गया, जिसमें सभी धर्मों के लिए समान सजा का प्रावधान करने की बात कही गई।
कांग्रेस नेता का कहना है कि दोनों विधेयकों के प्रावधानों में अंतर होने के कारण इनके बारे में सदन में सटीक जानकारी देना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 के विधेयक से संबंधित सवाल के जवाब में वर्ष 2016 के विधेयक का हवाला देने से महत्वपूर्ण विधायी तथ्यों को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
विशेषाधिकार समिति को मामला सौंपने की मांग
परगट सिंह ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री दिसंबर 2022 में केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात कर वर्ष 2018 के विधेयक को मंजूरी देने का मुद्दा उठा चुके हैं। ऐसे में, उनके अनुसार, दोनों विधेयकों के बीच अंतर की जानकारी को लेकर सवाल उठता है।
कांग्रेस नेता ने इस प्रकरण को केवल राजनीतिक मतभेद का विषय नहीं, बल्कि विधानसभा में तथ्यात्मक जानकारी देने की जिम्मेदारी से जुड़ा मामला बताया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से मुख्यमंत्री का पक्ष स्पष्ट कराने और आरोपों की पुष्टि होने पर मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का आग्रह किया है।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह मामला परगट सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों और उनके नोटिस पर आधारित है। आगे की कार्रवाई विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।










