राजस्थान के सवाई माधोपुर में रणथंभौर से सटे दूमोदा गांव में तेंदुआ तीन साल के बच्चे दिलखुश को घर से उठा ले गया। जंगल में बच्चा घायल मिला और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन चौकी पर प्रदर्शन किया।
सवाई माधौपुर: राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में रणथंभौर टाइगर रिजर्व से सटे दूमोदा गांव में एक दर्दनाक वन्यजीव घटना सामने आई है। घर के बाहर खेल रहे तीन साल के बच्चे को कथित तौर पर तेंदुआ उठाकर जंगल की ओर ले गया। परिवार और ग्रामीणों ने बच्चे को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। बाद में पहाड़ी इलाके में बच्चा गंभीर रूप से घायल मिला और अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए फलोदी रेंज चौकी पर प्रदर्शन किया। इसी दौरान चौकी के बाहर खड़ी वनकर्मी की बाइक में आग लगा दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
घर में खेल रहा था तीन साल का दिलखुश
जानकारी के अनुसार, दूमोदा गांव निवासी संजय बैरवा का तीन वर्षीय बेटा दिलखुश घर में खेल रहा था। इसी दौरान एक तेंदुआ वहां पहुंचा और बच्चे को उठाकर जंगल की तरफ ले गया।
बच्चे को तेंदुए के साथ जाते देखकर उसकी मां ने उसके पीछे दौड़कर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वह बच्चे को बचाने में सफल नहीं हो सकी। घटना के सदमे में मां बेहोश हो गई।
दिलखुश परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी चार बहनें हैं। घटना की जानकारी फैलते ही परिवार और गांव में मातम छा गया।
वन चौकी को सूचना देने के बाद ग्रामीणों ने खुद शुरू की तलाश
घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग की चौकी पर पहुंचकर वनकर्मियों को बच्चे को तेंदुए द्वारा उठाकर ले जाने की जानकारी दी। ग्रामीणों के मुताबिक, वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचने का आश्वासन दिया था, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी टीम वहां नहीं पहुंची।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब ढाई घंटे तक इंतजार करने के बाद उन्होंने खुद जंगल में बच्चे की तलाश शुरू कर दी। लोगों ने अलग-अलग समूह बनाए और आसपास के जंगल तथा पहाड़ी इलाकों में खोजबीन की।
तलाशी के दौरान ग्रामीणों को पहाड़ी इलाके में बच्चा गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल में जुटी भीड़, परिवार में मचा कोहराम
बच्चे की मौत की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण सवाई माधोपुर जिला अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ जमा हो गई। बच्चे के पिता संजय बैरवा का रो-रोकर बुरा हाल था।
घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि अगर वन विभाग की टीम समय पर पहुंच जाती तो शायद बच्चे को बचाने का मौका मिल सकता था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
घटना की सूचना मिलने पर मानटाउन और कोतवाली थाना पुलिस की टीमें भी अस्पताल पहुंचीं। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति संभालने की कोशिश की।
वन चौकी पर ग्रामीणों का प्रदर्शन
बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। बड़ी संख्या में लोग फलोदी रेंज वन चौकी पहुंचे और वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आक्रोशित लोगों ने वन चौकी के बाहर खड़ी एक बाइक में आग लगा दी। घटना की जानकारी मिलने पर रवांजना डूंगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने भीड़ को शांत कराने और इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया। घटना के बाद वन विभाग और पुलिस अधिकारियों ने मौके की स्थिति का जायजा लिया।
वन विभाग ने ग्रामीणों के आरोपों पर अलग दावा किया
रणथंभौर टाइगर रिजर्व के DFO मानस सिंह ने ग्रामीणों के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। उनके मुताबिक, वन विभाग की टीम गांव के बाहर मौजूद थी और घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
DFO का कहना है कि पुलिस टीम के पहुंचने के बाद वन विभाग की टीम भी घटनास्थल तक पहुंची। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौके पर मौजूद भीड़ वनकर्मियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही थी।
वन विभाग के अधिकारी ने घटना में खनन माफिया के शामिल होने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक, हाल ही में वन विभाग ने अवैध खनन से जुड़े कुछ ट्रैक्टर पकड़े थे। विभाग को आशंका है कि इस कार्रवाई से नाराज लोगों ने भीड़ में शामिल होकर वन चौकी में तोड़फोड़ की और बाइक को आग लगा दी।
हालांकि, खनन माफिया की कथित भूमिका और आगजनी में उनकी संलिप्तता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रणथंभौर के आसपास मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती
सवाई माधोपुर का रणथंभौर क्षेत्र देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में शामिल है। जंगल के आसपास बसे गांवों में लोगों और वन्यजीवों के बीच संपर्क की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं।
तेंदुए जैसे शिकारी जानवर जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंच सकते हैं। खासकर जंगल की सीमा से लगे गांवों में बच्चों और पशुओं की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी रहती है।
ऐसी घटनाओं के बाद वन विभाग के सामने एक साथ कई जिम्मेदारियां होती हैं। इनमें प्रभावित क्षेत्र की निगरानी, वन्यजीव की पहचान और गतिविधियों पर नजर रखना, स्थानीय लोगों को सुरक्षित रखना तथा संभावित हमले की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना शामिल है।
ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
दूमोदा गांव में हुई घटना के बाद स्थानीय लोगों में जंगल के आसपास सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाए और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखे।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि किसी वन्यजीव के आबादी क्षेत्र में आने की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध होने चाहिए।
ऐसी घटनाओं में ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है। वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल बच्चे की मौत के बाद हुई आगजनी और प्रदर्शन की घटना ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि वन चौकी पर आगजनी और तोड़फोड़ में कौन लोग शामिल थे।
दूसरी ओर, बच्चे की मौत से जुड़े घटनाक्रम में वन विभाग की प्रतिक्रिया और मौके पर पहुंचने में कथित देरी को लेकर ग्रामीणों के आरोपों की भी जांच की जरूरत है।
घटना ने एक बार फिर रणथंभौर के आसपास मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव तथा जंगल की सीमा से लगे गांवों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। तीन वर्षीय दिलखुश की मौत ने उसके परिवार और पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।











