ठंड के साथ बढ़ सकता है RSV का खतरा, जानें शुरुआती लक्षण

ठंड के साथ बढ़ सकता है RSV का खतरा, जानें शुरुआती लक्षण

देश में ठंड बढ़ने के साथ बच्चों में रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) के केस बढ़ रहे हैं। यह वायरस फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और 12 महीने से कम उम्र के शिशुओं, समय से पहले जन्मे बच्चों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है। बचाव के लिए ठंडी हवा, साफ-सफाई और भीड़भाड़ से बचना जरूरी है।

RSV Virus Danger: देश के कई राज्यों में तापमान गिरने के साथ रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली AIIMS के पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार यह वायरस बच्चों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में फेफड़ों और श्वसन तंत्र में संक्रमण पैदा कर सकता है। सर्दियों में हवा में नमी कम होने और विटामिन डी की कमी के कारण यह संक्रमण अधिक फैलता है। माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा और शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज संभव हो सके।

सर्दियों में क्यों बढ़ते हैं RSV के केस

RSV सालभर देखे जाते हैं, लेकिन सर्दियों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. भदानी बताते हैं कि ठंड में हवा में नमी कम होने और शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण वायरस तेजी से फैलता है। इस मौसम में संक्रमण का जोखिम अधिक होता है, खासकर बच्चों में, और गंभीर लक्षण जैसे तेज सांस लेना, लगातार खांसी और सीने में घरघराहट नजर आ सकती है।

RSV के शुरुआती लक्षण और बचाव

आरएसवी के शुरुआती लक्षणों में ठंड लगना, शरीर में तेज दर्द, गले में खराश, नाक बहना, हल्का बुखार और तेज सांस लेना शामिल हैं। अगर लक्षण गंभीर हों तो तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है।

बचाव के लिए बच्चों को ठंडी हवा से बचाना, हाथों को बार-बार धोना और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रखना जरूरी है। घर में अच्छे वेंटिलेशन के साथ साफ-सफाई बनाए रखना भी संक्रमण कम करने में मदद करता है।

RSV वायरस बच्चों के लिए ठंड के मौसम में गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, इसलिए समय पर सावधानी और शुरुआती लक्षणों की पहचान बहुत जरूरी है। माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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