सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो विरोधी गुटों के बीच पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर फैसला करने का निर्देश दिया।
TMC Name Symbol Dispute: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। अदालत ने चुनाव आयोग को दोनों विरोधी गुटों के बीच चल रहे विवाद पर तय समयसीमा के भीतर अंतिम फैसला करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह मामला अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रहेगा और दोनों पक्षों को अपनी दलीलें रखने के लिए भी स्पष्ट समय दिया गया है।
चार हफ्ते में पूरी करनी होंगी दलीलें
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने TMC के दोनों विरोधी गुटों को निर्देश दिया कि वे चुनाव आयोग के सामने चल रही कार्यवाही में अपनी दलीलें और जरूरी पक्ष चार सप्ताह के भीतर पूरा करें। अदालत ने इसके बाद चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के तीन महीने के भीतर इस विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जाए।
इस तरह अदालत ने मामले में पहले दोनों पक्षों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर देने और उसके बाद आयोग द्वारा निर्णय लेने की स्पष्ट समयसीमा निर्धारित कर दी है।
ममता बनर्जी की याचिका पर हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पूर्व पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को चुनौती दी थी। चुनाव आयोग ने TMC के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच पार्टी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।ममता बनर्जी की ओर से इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था।
अदालत में सुनवाई के दौरान विवाद को जल्द निपटाने की जरूरत पर जोर दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद चुनाव आयोग को दोनों गुटों की दलीलें पूरी होने के बाद निर्धारित अवधि में अपना फैसला देना होगा।
चुनाव आयोग ने क्यों फ्रीज किया था TMC का नाम और सिंबल?
चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों गुटों को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग का कहना था कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत किया जाना जरूरी है।
इसके बाद आगामी उपचुनावों को देखते हुए दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिह्न दिया गया, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया। यह व्यवस्था अंतरिम प्रकृति की है, जबकि मूल TMC नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम विवाद अभी चुनाव आयोग के सामने लंबित है।
अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद TMC के दोनों गुटों के सामने अब अपनी दलीलें, दस्तावेज और अन्य संबंधित पक्ष चुनाव आयोग के सामने निर्धारित समय में रखने की जिम्मेदारी है। चार सप्ताह की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर विवाद पर फैसला करना होगा। इस फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न किसी राजनीतिक संगठन की चुनावी पहचान से सीधे जुड़े होते हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है। अंतिम निर्णय चुनाव आयोग द्वारा दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध सामग्री देखने के बाद किया जाना है।











