KANPUR : देशभर में आज से टोल टैक्स को लेकर बड़े बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों पर पड़ेगा। नए नियमों के तहत अब टोल प्लाजा पर कैश लेनदेन को लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और डिजिटल भुगतान को अनिवार्य बना दिया गया है, जिससे टोल कलेक्शन सिस्टम को तेज, पारदर्शी और आधुनिक बनाया जा सके।
सरकार और National Highways Authority of India के निर्देशों के अनुसार अब वाहन चालकों को टोल चुकाने के लिए FASTag या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करना होगा। जिन वाहनों में FASTag नहीं होगा या बैलेंस पर्याप्त नहीं होगा, उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है, जिसमें कई मामलों में दोगुना टोल भी शामिल है।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करना और वाहनों की आवाजाही को सुचारू बनाना है। पहले जहां कैश पेमेंट के कारण वाहनों को रुकना पड़ता था, वहीं अब डिजिटल सिस्टम के जरिए बिना रुके टोल कट जाएगा, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
इसके साथ ही नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ टोल दरों में भी बढ़ोतरी की गई है। विभिन्न हाईवे और एक्सप्रेसवे पर औसतन 5 प्रतिशत तक टोल महंगा हुआ है, जिससे नियमित यात्रा करने वाले लोगों की जेब पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क सुविधाएं और तेज सफर इस बढ़ोतरी को संतुलित करेंगे।
नए नियमों के तहत सख्ती भी बढ़ाई गई है। यदि कोई वाहन चालक टोल का भुगतान नहीं करता या डिजिटल सिस्टम में गड़बड़ी के कारण भुगतान नहीं हो पाता, तो उसे बाद में दोगुना शुल्क चुकाना पड़ सकता है। इसके अलावा, टोल बकाया होने पर वाहन से जुड़े अन्य कार्य जैसे फिटनेस सर्टिफिकेट या वाहन ट्रांसफर भी प्रभावित हो सकते हैं।
इस फैसले को डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे नकद लेनदेन में कमी आएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। हालांकि, जिन लोगों के पास अभी तक FASTag नहीं है या जो डिजिटल पेमेंट से परिचित नहीं हैं, उन्हें शुरुआत में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, नए नियमों के बाद हाईवे पर सफर का अनुभव पहले से अधिक तेज और डिजिटल हो जाएगा, लेकिन टोल दरों में बढ़ोतरी के कारण आम लोगों के खर्च में इजाफा होना तय है।









