हम अक्सर अपनी कमियों को लेकर दुखी रहते हैं और खुद को दूसरों से कम समझने लगते हैं। लेकिन यह कहानी हमें एक नया नजरिया देती है। यह बताती है कि जिसे हम अपनी कमजोरी या 'खोट' समझते हैं, वह दरअसल दूसरों के लिए वरदान भी हो सकती है। हर कमी में एक खूबी छिपी होती है, बस उसे पहचानने की देर है।
कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक किसान था जो रोज नदी से पानी भरकर अपने मालिक के घर ले जाता था। उसके पास पानी ले जाने के लिए दो बड़े घड़े थे, जिन्हें वह एक डंडे के दोनों सिरों पर बांधकर अपने कंधे पर लटका लेता था।
इनमें से एक घड़ा एकदम सही सलामत था, जबकि दूसरे घड़े में एक छोटी सी 'दरार' (Crack) थी। जो सही घड़ा था, वह हमेशा पूरा पानी लेकर पहुंचता था। उसे अपनी पूर्णता पर बहुत घमंड था। लेकिन जो टूटा हुआ घड़ा था, उसमें से पानी रिसता रहता था और घर पहुंचते-पहुंचते वह आधा ही रह जाता था। इस वजह से टूटा हुआ घड़ा खुद को बहुत ही बेकार और हीन समझता था।
यह सिलसिला पूरे दो साल तक चलता रहा। सही घड़ा हमेशा टूटे हुए घड़े को चिढ़ाता कि 'देख, मैं कितना समर्थ हूँ और तू कितना नकारा है। तेरी मेहनत तो बेकार चली जाती है।' टूटा हुआ घड़ा यह सुनकर अंदर ही अंदर बहुत रोता था।
एक दिन, नदी के किनारे टूटे हुए घड़े से रहा नहीं गया। उसने दुखी होकर किसान से कहा, 'मालिक, मैं आपसे माफी मांगना चाहता हूँ। मैं शर्मिंदा हूँ क्योंकि मेरे अंदर एक छेद है और उससे पानी टपकता रहता है। आप इतनी मेहनत करते हैं, लेकिन मेरी इस कमी की वजह से आपको मेरी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता।'
किसान ने उस घड़े की बात सुनी और बड़ी कोमलता से मुस्कुराया। उसने कहा, 'तुम दुखी मत हो। आज जब हम वापस मालिक के घर जाएंगे, तो मैं चाहता हूँ कि तुम रास्ते के किनारे खिले हुए सुंदर फूलों को ध्यान से देखो।'
घड़े ने वैसा ही किया। जब वे वापस जा रहे थे, तो उसने देखा कि रास्ते के एक तरफ बेहद खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे, जो धूप में चमक रहे थे। यह देखकर उसका मन थोड़ा बहला। लेकिन घर पहुंचते ही उसे फिर दुख हुआ क्योंकि उसका आधा पानी गिर चुका था। उसने फिर से किसान से माफी मांगी।
इस पर किसान ने कहा, 'शायद तुमने ध्यान नहीं दिया कि फूल केवल 'तुम्हारी तरफ' वाले रास्ते पर ही खिले थे, दूसरे घड़े की तरफ नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं तुम्हारी इस कमी को जानता था और मैंने उसका फायदा उठाया।'
किसान ने आगे समझाया, 'मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर फूलों के बीज बो दिए थे। रोज जब हम नदी से लौटते थे, तो तुम्हारे छेद से गिरने वाले पानी से उन बीजों को सींचा जाता था। दो साल से मैं इन्हीं सुंदर फूलों को तोड़कर अपने मालिक के घर को सजा रहा हूँ। अगर तुम ऐसे न होते जैसे तुम हो, तो यह सुंदरता कभी पैदा ही नहीं हो पाती। तुम्हारी जिसे तुम 'कमी' समझते हो, उसने ही इस रास्ते को इतना खूबसूरत बनाया है।'
टूटे हुए घड़े की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसे समझ आ गया कि वह बेकार नहीं है, बल्कि वह भी खास है।
सीख
हम सभी के अंदर कोई न कोई कमी या कमजोरी जरूर होती है। हममें से कोई भी 'परफेक्ट' नहीं है। लेकिन हमारी यही कमियां हमें एक-दूसरे से अलग और खास बनाती हैं। अपनी कमियों से नफरत करने के बजाय, उन्हें स्वीकार करें और देखें कि आप उनका उपयोग अच्छाई के लिए कैसे कर सकते हैं। जैसा आप हैं, वैसे ही आप अनमोल हैं।













