बहुत समय पहले की बात है, सुदूर किसी गांव में एक मेहनती किसान रहता था। उसका नाम रामदीन था। रामदीन का जीवन सादा था और उसका मुख्य काम नदी से पानी भरकर लाना था, जो उसके घर से काफी दूर थी। उसके पास पानी लाने के लिए दो बड़े मिट्टी के घड़े थे। वह रोज़ सुबह उठता, अपने कंधे पर एक मजबूत डंडा रखता, और उसके दोनों सिरों पर उन दोनों घड़ों को बांधकर नदी की ओर चल पड़ता।
इन दोनों घड़ों में एक बड़ा अंतर था। एक घड़ा एकदम नया और बेदाग था। उसकी बनावट इतनी सटीक थी कि उसमें से पानी की एक बूंद भी बाहर नहीं छलकती थी। वह हमेशा नदी से घर तक पूरा पानी लेकर पहुँचता था। वहीं, दूसरा घड़ा थोड़ा पुराना था और उसमें एक तरफ एक बारीक सी दरार (छेद) थी। इस दरार के कारण, जब भी रामदीन नदी से पानी भरकर घर के लिए निकलता, तो रास्ते भर उस घड़े से पानी टपकता रहता था। घर पहुँचते-पहुँचते वह घड़ा सिर्फ आधा ही भरा रह जाता था।
यह सिलसिला पूरे दो साल तक बिना रुके चलता रहा। सही और बेदाग घड़े को अपनी पूर्णता पर बहुत घमंड था। उसे लगता था कि वह अपने मालिक की मेहनत का पूरा फल दे रहा है। वह अक्सर अपनी चमक और क्षमता पर इतराता था। दूसरी ओर, टूटा हुआ घड़ा अपनी इस कमी को लेकर अंदर ही अंदर बहुत शर्मिंदा और दुखी रहता था। उसे हर रोज़ यह एहसास कचोटता था कि उसकी वजह से रामदीन की आधी मेहनत बेकार चली जाती है। वह खुद को अपूर्ण और किसी काम का नहीं समझता था। ग्लानि और हीनभावना ने उसे पूरी तरह घेर लिया था।
एक दिन, जब रामदीन नदी किनारे घड़ों में पानी भर रहा था, तो टूटे हुए घड़े का सब्र का बांध टूट गया। उसने अपनी हिम्मत जुटाई और दुखी स्वर में रामदीन से बोला, 'मालिक, मैं आपसे हाथ जोड़कर माफ़ी मांगना चाहता हूँ।'
रामदीन ने हैरानी से उसकी ओर देखा और पूछा, 'अरे भाई, तुम किस बात की माफ़ी मांग रहे हो? तुमने ऐसा क्या किया है?'
घड़े ने रुंधे गले से कहा, 'मालिक, आप शायद नहीं जानते, लेकिन पिछले दो सालों से मेरे अंदर की इस दरार की वजह से मैं आपको पूरा पानी नहीं दे पा रहा हूँ। आप इतनी दूर से मेहनत करके मुझे भरकर लाते हैं, लेकिन घर पहुँचते-पहुँचते मेरा आधा पानी रास्ते में ही गिर जाता है। मेरी इस कमी के कारण आपकी मेहनत बर्बाद हो जाती है। मुझे खुद पर बहुत शर्म आती है।'
रामदीन ने उसकी बातें सुनीं और उसके चेहरे पर एक शांत, समझदार मुस्कान तैर गई। उसने बड़े प्यार से घड़े से कहा, 'अच्छा, ऐसी बात है। आज जब हम वापस घर चलें, तो मैं चाहता हूँ कि तुम रास्ते के किनारे पर ध्यान देना, खासकर अपनी तरफ वाले हिस्से पर।'
घड़े को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन उसने हामी भर दी। जैसे ही वे नदी से घर की ओर चले, घड़े ने रामदीन के कहे अनुसार रास्ते के किनारे देखना शुरू किया। उसकी नज़र अपनी तरफ वाले रास्ते पर पड़ी और वह हैरान रह गया। रास्ते के उस किनारे पर, जहाँ से वह गुज़र रहा था, रंग-बिरंगे, सुंदर जंगली फूलों की एक लंबी कतार लगी हुई थी। लाल, पीले, नीले फूल सूरज की रोशनी में चमक रहे थे और हवा में झूम रहे थे। यह नज़ारा देखकर घड़े का मन कुछ पलों के लिए खिल उठा, लेकिन फिर उसे अपनी कमी याद आ गई और वह फिर से उदास हो गया कि अंत में तो वह आधा खाली ही है।
घर पहुँचकर रामदीन ने घड़े को जमीन पर रखा और उसके पास बैठकर बोला, "क्या तुमने देखा कि रास्ते के किनारे कितने सुंदर फूल खिले थे? लेकिन क्या तुमने यह गौर किया कि वे फूल सिर्फ तुम्हारी तरफ ही थे, दूसरे सही घड़े की तरफ नहीं?"
घड़ा चुपचाप सुनता रहा। रामदीन ने आगे समझाया, 'मेरे प्यारे दोस्त, मैं तुम्हारी इस कमी के बारे में पहले दिन से ही जानता था। लेकिन मैंने इसे तुम्हारी कमजोरी नहीं, बल्कि एक अवसर समझा। मैंने इसका फायदा उठाने का फैसला किया और रास्ते में तुम्हारी तरफ फूलों के बीज बो दिए। पिछले दो सालों से, जब हम रोज़ नदी से लौटते थे, तो तुम्हारे अंदर से रिसने वाला पानी उन बीजों को सींचता रहा। आज उन्हीं की वजह से यह रास्ता इतना खूबसूरत और सुगंधित हो गया है। मैं इन्हीं फूलों को तोड़कर अपने घर के मंदिर में सजाता हूँ, जिससे मेरा घर महक उठता है। जरा सोचो, अगर तुम ऐसे न होते, अगर तुममें वह दरार न होती, तो क्या यह सुंदरता कभी पैदा हो पाती?'
यह सुनकर टूटे हुए घड़े की आँखों से आंसू छलक आए, लेकिन इस बार वे दुख के नहीं, बल्कि खुशी और राहत के आंसू थे। उसे एहसास हुआ कि उसकी जिस खामी को वह अपनी सबसे बड़ी कमजोरी समझता था, असल में वही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। उस दिन के बाद से, उसने कभी खुद को दूसरों से कम नहीं समझा।
सीख
हम में से हर कोई उस टूटे हुए घड़े की तरह है। हम सब में कोई न कोई कमी, कोई न कोई दोष जरूर होता है। लेकिन यही कमियां हमें एक-दूसरे से अलग और अनोखा बनाती हैं। हमें अपनी इन खामियों से शर्मिंदा होने के बजाय उन्हें स्वीकार करना चाहिए। अगर हम अपनी कमजोरियों को सही नजरिए से देखें, तो वे हमारी सबसे बड़ी ताकत बन सकती हैं और दुनिया में सुंदरता बिखेरने का जरिया बन सकती हैं। इसलिए, खुद को स्वीकार करें और जैसे हैं, वैसे ही खुद से प्यार करें।













