टूर डी फ्रांस फेम्स 2026: मैकेनिकल खराबी और गिरने के बावजूद किम्बर्ली ले कोर्ट ने जीता छठा चरण

टूर डी फ्रांस फेम्स के छठे चरण में किम्बर्ली ले कोर्ट ने मैकेनिकल खराबी और दुर्घटना के बावजूद शानदार जीत दर्ज की, जबकि मार्लेन रॉयसर ने येलो जर्सी बरकरार रखी।

टूर डी फ्रांस फेम्स 2026 के छठे चरण में किम्बर्ली ले कोर्ट ने मैकेनिकल खराबी और दुर्घटना के बावजूद शानदार वापसी करते हुए जीत हासिल की। वहीं मार्लेन रॉयसर ने कुल बढ़त बनाए रखते हुए येलो जर्सी अपने नाम बरकरार रखी।

स्पोर्ट्स न्यूज़: महिला साइक्लिंग की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में शामिल टूर डी फ्रांस फेम्स 2026 के छठे चरण में मॉरीशस की स्टार साइकिलिस्ट किम्बर्ली ले कोर्ट ने अद्भुत जुझारूपन का प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। रेस के दौरान पहले दुर्घटना और फिर साइकिल में तकनीकी खराबी जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने अंतिम स्प्रिंट में शानदार प्रदर्शन कर स्टेज अपने नाम कर ली। इस जीत ने उन्हें एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय महिला साइक्लिंग के शीर्ष खिलाड़ियों की सूची में मजबूती से स्थापित कर दिया। वहीं, कुल समय (जनरल क्लासिफिकेशन) में स्विट्जरलैंड की मार्लेन रॉयसर ने अपनी बढ़त कायम रखते हुए येलो जर्सी अपने पास बरकरार रखी। अब प्रतियोगिता निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है और आगामी पर्वतीय चरण पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर बदल सकते हैं।

153.4 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण रेस

छठा चरण मोंटब्रिसन से टूर्नोन-सुर-रोन तक कुल 153.4 किलोमीटर लंबा था। इस मार्ग में कई कठिन चढ़ाइयां, तेज ढलान और तकनीकी मोड़ शामिल थे, जिससे यह चरण प्रतियोगिता के सबसे चुनौतीपूर्ण स्टेजों में गिना गया। रेस की शुरुआत तेज गति से हुई और शुरुआती किलोमीटरों में कई टीमों ने आक्रमण करने की कोशिश की। इसी दौरान किम्बर्ली ले कोर्ट एक हल्की दुर्घटना का शिकार हो गईं, लेकिन उन्होंने तुरंत खुद को संभालते हुए दौड़ जारी रखी।

साइकिल खराब होने के बाद भी नहीं मानी हार

रेस खत्म होने से लगभग 15 किलोमीटर पहले ले कोर्ट की साइकिल में मैकेनिकल खराबी आ गई। उन्हें मजबूरन बाइक बदलनी पड़ी, जिससे वे मुख्य समूह से पीछे रह गईं। सामान्य परिस्थितियों में इस तरह की घटना किसी भी खिलाड़ी की जीत की उम्मीद लगभग खत्म कर देती है, लेकिन ले कोर्ट ने अपनी टीम के सहयोग और शानदार फिटनेस की बदौलत तेजी से वापसी की। उनकी टीम ने उन्हें व्यवस्थित तरीके से मुख्य समूह तक पहुंचाया और अंतिम चढ़ाई से पहले वे दोबारा मुकाबले में शामिल हो गईं। यही वापसी उनकी जीत की सबसे बड़ी कहानी बन गई।

अंतिम 10 किलोमीटर में बदला मुकाबले का रुख

रेस के अंतिम 10 किलोमीटर में आठ साइकिलिस्टों का एक छोटा अग्रणी समूह बन गया। इसी समूह में ले कोर्ट भी शामिल थीं। जैसे-जैसे फिनिश लाइन नजदीक आती गई, सभी खिलाड़ी सही समय पर आक्रमण करने की रणनीति बनाते रहे। अंतिम 300 मीटर में ले कोर्ट ने जबरदस्त स्प्रिंट शुरू किया और अपनी पूरी ताकत झोंक दी। फ्रांस की सेड्रिन केरबाओल ने उन्हें कड़ी चुनौती दी, जबकि नीदरलैंड की पक पीटर्से भी मुकाबले में बनी रहीं। हालांकि ले कोर्ट ने शानदार गति बनाए रखते हुए सबसे पहले फिनिश लाइन पार की और स्टेज जीत ली।

दूसरी बार जीता टूर डी फ्रांस फेम्स का चरण

यह किम्बर्ली ले कोर्ट के करियर की टूर डी फ्रांस फेम्स में दूसरी स्टेज जीत है। उन्होंने इससे पहले पिछले संस्करण में भी एक चरण अपने नाम किया था। लगातार दूसरे वर्ष स्टेज जीतने से उनकी निरंतरता और बड़े मुकाबलों में प्रदर्शन करने की क्षमता साबित हुई है। महिला साइक्लिंग में यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लगातार दो वर्षों तक टूर डी फ्रांस फेम्स में स्टेज जीतना आसान नहीं होता।

जीत के बाद क्या बोलीं ले कोर्ट?

रेस जीतने के बाद किम्बर्ली ले कोर्ट ने अपनी टीम की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि बाइक बदलने के बाद टीम ने उन्हें धीरे-धीरे मुख्य समूह तक पहुंचाया। अंतिम चढ़ाई तक पहुंचने में काफी ऊर्जा खर्च हुई थी और उन्हें लगा था कि अब जीत मुश्किल होगी। उन्होंने कहा कि अंतिम स्प्रिंट के लिए उनके पास कितनी ताकत बची है, इसका उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था, लेकिन सही समय पर आक्रमण करने की रणनीति सफल रही।

मार्लेन रॉयसर ने बचाई येलो जर्सी

हालांकि छठे चरण की विजेता ले कोर्ट रहीं, लेकिन कुल समय में मार्लेन रॉयसर ने अपनी बढ़त कायम रखी। रॉयसर फिलहाल प्रतियोगिता की समग्र लीडर बनी हुई हैं और उनके पास येलो जर्सी बरकरार है। उनके और दूसरे स्थान पर मौजूद डेमी वोलरिंग के बीच केवल 12 सेकंड का अंतर है। इतना कम अंतर दर्शाता है कि आगामी चरणों में मामूली गलती भी समग्र विजेता की तस्वीर बदल सकती है।

सातवां चरण होगा सबसे कठिन

अब सभी की निगाहें सातवें चरण पर हैं, जिसे प्रतियोगिता का क्वीन स्टेज माना जा रहा है। यह चरण ला वूल्त-सुर-रोन से शुरू होकर प्रसिद्ध मोंट वेंटू की चोटी पर समाप्त होगा। लगभग 146.8 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में लगातार कठिन चढ़ाइयां शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यही चरण तय करेगा कि येलो जर्सी किसके पास रहती है और अंतिम दो चरणों में कौन बढ़त लेकर प्रवेश करेगा।

महिला साइक्लिंग की बढ़ती लोकप्रियता

पिछले कुछ वर्षों में महिला साइक्लिंग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। टूर डी फ्रांस फेम्स में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ साइकिलिस्ट भाग ले रही हैं और प्रतियोगिता को लाखों दर्शक लाइव देख रहे हैं। बेहतर आयोजन, अधिक पुरस्कार राशि और बढ़ते प्रसारण ने महिला खिलाड़ियों को बड़ा मंच दिया है। इससे नई प्रतिभाओं को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का अवसर मिल रहा है।

टीमवर्क बना जीत की सबसे बड़ी वजह

साइक्लिंग व्यक्तिगत खेल जरूर है, लेकिन इसमें टीमवर्क की भूमिका बेहद अहम होती है। ले कोर्ट की जीत इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थिति में टीम का सही सहयोग किसी खिलाड़ी को फिर से मुकाबले में ला सकता है। बाइक बदलने के बाद जिस तरह टीम ने उन्हें मुख्य समूह तक पहुंचाया, उसने जीत की नींव रखी।

आगे क्या?

अब प्रतियोगिता अपने निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। पर्वतीय चरणों में खिलाड़ियों की सहनशक्ति, रणनीति और टीम सहयोग की असली परीक्षा होगी। मार्लेन रॉयसर अपनी बढ़त बचाने की कोशिश करेंगी, जबकि डेमी वोलरिंग और अन्य दावेदार येलो जर्सी छीनने के लिए पूरा जोर लगाएंगे। वहीं किम्बर्ली ले कोर्ट अपनी ताजा जीत के बाद आत्मविश्वास से भरी हुई हैं और आने वाले चरणों में भी मजबूत चुनौती पेश कर सकती हैं।

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