TRAI ने भारत में Calling Name Presentation (CNAP) फीचर रोलआउट करना शुरू किया है, जो इनकमिंग कॉल पर कॉलर का वेरिफाइड नाम दिखाएगा। यह नेटवर्क-लेवल फीचर फर्जी कॉल और स्कैम से सुरक्षा देता है और Truecaller जैसी थर्ड-पार्टी ऐप्स पर निर्भर नहीं करता। मार्च या अप्रैल 2026 तक इसे सभी मोबाइल यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
CNAP फीचर भारत में लाइव: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने Calling Name Presentation यानी CNAP फीचर भारत में चरणबद्ध तरीके से लागू करना शुरू कर दिया है। इस फीचर के तहत हर इनकमिंग कॉल पर कॉल करने वाले का वेरिफाइड नाम स्क्रीन पर दिखेगा। अक्टूबर 2025 में मंजूरी मिलने के बाद पिछले महीने से लाइव ट्रायल शुरू हुआ और मार्च या अप्रैल 2026 तक इसे सभी 4G और 5G नेटवर्क यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह फीचर फर्जी कॉल और टेली-स्कैम से बचाव के लिए डिज़ाइन किया गया है।
CNAP से पहचान अब सीधे स्क्रीन पर
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने भारत में Calling Name Presentation यानी CNAP फीचर रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस फीचर के तहत अब हर इनकमिंग कॉल पर कॉल करने वाले का वेरिफाइड नाम स्क्रीन पर दिखाई देगा। अक्टूबर 2025 में इसके ढांचे को मंजूरी मिलने के बाद, पिछले महीने से इसका लाइव टेस्ट शुरू हुआ और मार्च या अप्रैल 2026 तक इसे सभी मोबाइल यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने की योजना है।
CNAP फीचर का उद्देश्य फर्जी कॉल और टेली-स्कैम के बढ़ते मामलों को रोकना है। अब यूजर्स अनजान नंबर से आने वाली कॉल को पहचानकर सही निर्णय ले सकेंगे, जिससे ठगी और फ्रॉड की संभावना कम होगी।
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डेटा सोर्स और Truecaller से अंतर
CNAP किसी थर्ड-पार्टी ऐप या क्राउडसोर्स्ड डेटा पर निर्भर नहीं करता। यह फीचर सीधे टेलीकॉम कंपनियों के KYC-वेरिफाइड रिकॉर्ड से कॉलर का नाम दिखाता है। यानी जो नाम कॉल पर दिखाई देगा, वह कानूनी रूप से उस नंबर से जुड़ा होगा।
इसके विपरीत Truecaller यूजर्स द्वारा सबमिट किए गए नामों पर निर्भर करता है, जिसमें गलत या भ्रामक जानकारी हो सकती है। CNAP नेटवर्क-लेवल फीचर है, इसलिए नकली पहचान बनाना मुश्किल हो जाता है।
फेज वाइज रोलआउट और सपोर्ट
टेलीकॉम कंपनियों ने पहले 4G और 5G नेटवर्क पर CNAP का ट्रायल शुरू किया है। पुराने नेटवर्क पर इसे बाद में जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को छह महीने के भीतर अपने डिवाइस में CNAP सपोर्ट देना होगा।
इस फीचर से कॉलर आईडी की विश्वसनीयता बढ़ेगी और यूजर्स को अनजान नंबर के जोखिम से सुरक्षा मिलेगी।









