त्रिपुरा के दूरदराज और आदिवासी इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी की मांग, प्रतिमा भौमिक ने सिंधिया को लिखा पत्र

त्रिपुरा के दूरदराज और आदिवासी इलाकों में मोबाइल नेटवर्क सुधार की मांग उठी है। प्रतिमा भौमिक ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से 8 शेष बस्तियों में कनेक्टिविटी की मांग

त्रिपुरा की पूर्व सांसद प्रतिमा भौमिक ने दूरदराज, आदिवासी और सीमावर्ती बस्तियों में मोबाइल कनेक्टिविटी सुधारने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखकर PM-JANMAN के तहत शेष आठ बस्तियों को जल्द कवर करने और कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों का सर्वे कराने का अनुरोध किया।

अगरतला: त्रिपुरा के दूरदराज, आदिवासी और सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या को लेकर पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और त्रिपुरा पश्चिम की पूर्व लोकसभा सांसद प्रतिमा भौमिक ने केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (DoNER) मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने खास तौर पर सिपाहीजाला जिले के मोहनभोग ब्लॉक में मोबाइल कनेक्टिविटी की स्थिति की नए सिरे से समीक्षा कराने और नेटवर्क सुविधाओं में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है।

भौमिक ने 1 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा कि दूरस्थ बस्तियों में रहने वाले परिवारों के लिए भरोसेमंद मोबाइल कनेक्टिविटी केवल संचार की सुविधा नहीं, बल्कि आपातकालीन और चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से उन इलाकों की पहचान करने को कहा जहां सरकारी रिकॉर्ड में कनेक्टिविटी उपलब्ध बताई गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर नेटवर्क कमजोर, अनियमित या पूरी तरह अनुपलब्ध है।

PM-JANMAN के तहत 65 में से 57 बस्तियों में पहुंचा मोबाइल कवरेज

भौमिक ने अपने पत्र में PM-JANMAN के तहत त्रिपुरा में मोबाइल कवरेज की प्रगति का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 30 जून 2026 तक मोबाइल कवरेज के लिए चिन्हित 65 habitations में से 57 को कवर किया जा चुका था, जबकि 8 बस्तियां अभी भी कनेक्टिविटी का इंतजार कर रही थीं। केंद्र सरकार के उपलब्ध प्रगति आंकड़ों में भी त्रिपुरा के लिए 65 चिन्हित habitations में 57 के कवर होने का विवरण दर्ज है।

पूर्व सांसद ने अब तक हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए शेष आठ बस्तियों में भी जल्द मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए संबंधित मंत्रालय के स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है।

उनका कहना है कि दूरदराज की इन बस्तियों में नेटवर्क सुविधा पहुंचने से स्थानीय परिवारों को आपात स्थिति में सहायता प्राप्त करने और आवश्यक सेवाओं से संपर्क करने में आसानी हो सकती है।

मोहनभोग ब्लॉक में नए सिरे से सर्वे की मांग

प्रतिमा भौमिक ने सिपाहीजाला जिले के मोहनभोग ब्लॉक के कई इलाकों में habitation और para स्तर पर मोबाइल कनेक्टिविटी का ताजा आकलन कराने का भी अनुरोध किया है।

पत्र में जिन क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है, उनमें चंदुल VC, जगतराम पारा VC, तैबंदल VC के अंतर्गत उलुखाला, कालिखोला VC, निडाया GP और भबानीपुर GP शामिल हैं।

भौमिक के अनुसार, किसी गांव को आधिकारिक रूप से ‘कवर्ड’ घोषित किए जाने के बावजूद उसके अंतर्गत आने वाली छोटी बस्तियों या पाराओं में नेटवर्क की स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल सिग्नल कमजोर होने, बीच-बीच में नेटवर्क चले जाने या पूरी तरह नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने की समस्या बनी रह सकती है।

इसी वजह से उन्होंने केवल गांव स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के बजाय habitation और para स्तर पर वास्तविक स्थिति का आकलन करने की मांग की है।

नए मोबाइल टावर और नेटवर्क सुधार की मांग

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री ने कमजोर या अनुपलब्ध मोबाइल नेटवर्क वाले इलाकों में जरूरत के अनुसार मोबाइल टावर स्थापित करने और मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे कार्यों को PM-JANMAN और अन्य पात्र सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। PM-JANMAN का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) से संबंधित बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं और आवश्यक सेवाओं की पहुंच को बेहतर करना है।

मोबाइल कनेक्टिविटी भी दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं और आपातकालीन सहायता तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। ऐसे में नेटवर्क के ‘कवरेज’ और वास्तविक उपयोगिता के बीच मौजूद अंतर की पहचान करना स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकता है।

जिला स्तर पर कार्ययोजना बनाने की मांग

भौमिक ने मोबाइल कनेक्टिविटी से जुड़े लंबित कार्यों के लिए जिला-वार कार्ययोजना तैयार करने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि इस योजना में काम पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा होनी चाहिए।

उनके अनुसार, समयबद्ध कार्ययोजना से दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि नेटवर्क से जुड़ी उनकी समस्याओं के समाधान के लिए किस स्तर पर और कब तक कार्रवाई की जानी है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से उन स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित करने का आग्रह किया जहां आबादी दूरस्थ है और मौजूदा संचार सुविधाएं अपर्याप्त हैं।

आपातकालीन और चिकित्सा सेवाओं के लिए कनेक्टिविटी अहम

भौमिक ने अपने पत्र में मोबाइल नेटवर्क की जरूरत को केवल डिजिटल सुविधा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने दूरदराज के परिवारों के लिए आपातकालीन और चिकित्सा सेवाओं तक संपर्क के महत्व को भी रेखांकित किया।

दुर्गम इलाकों में किसी स्वास्थ्य आपात स्थिति, दुर्घटना या अन्य तत्काल आवश्यकता के दौरान फोन और मोबाइल नेटवर्क से स्थानीय लोगों को सहायता एजेंसियों, स्वास्थ्य सेवाओं या परिवार के सदस्यों से संपर्क करने में मदद मिल सकती है।

इसी तरह बेहतर नेटवर्क से सरकारी योजनाओं, डिजिटल सेवाओं और सूचना तक पहुंच भी आसान हो सकती है। भौमिक ने इसी व्यापक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मोबाइल कनेक्टिविटी में मौजूद कमियों को दूर करने की मांग की है।

सिंधिया के पास संचार और DoNER दोनों मंत्रालय

भौमिक ने अपनी मांग केंद्रीय संचार एवं DoNER मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के समक्ष रखी है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, सिंधिया 2026 में केंद्रीय संचार तथा विकासोत्तर क्षेत्र (DoNER) से संबंधित जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

संचार मंत्रालय देश में दूरसंचार से जुड़े मामलों के लिए जिम्मेदार है, जबकि DoNER पूर्वोत्तर राज्यों के विकास से संबंधित केंद्र सरकार की नीतियों और पहलों से जुड़ा है। ऐसे में त्रिपुरा के दूरस्थ क्षेत्रों में दूरसंचार सुविधाओं को लेकर उठाई गई मांग दोनों क्षेत्रों से संबंधित है।

दूरस्थ बस्तियों तक नेटवर्क पहुंचाने पर जोर

प्रतिमा भौमिक की मांग का मुख्य केंद्र उन बस्तियों तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना है जिन्हें भौगोलिक दूरी, कम आबादी या दुर्गम स्थिति के कारण पर्याप्त कनेक्टिविटी नहीं मिल पा रही है।

उन्होंने कहा है कि आधिकारिक कवरेज आंकड़ों के साथ-साथ जमीनी स्थिति का आकलन भी जरूरी है, क्योंकि किसी बड़े गांव में नेटवर्क उपलब्ध होने के बावजूद उससे जुड़ी छोटी बस्तियों में सेवा की गुणवत्ता अलग हो सकती है।

अब उनकी मांग में शेष आठ PM-JANMAN habitations को कवर करने के साथ-साथ मोहनभोग ब्लॉक के चिन्हित क्षेत्रों में habitation और para स्तर पर नेटवर्क का ताजा आकलन शामिल है।

सरकारी आंकड़ों में त्रिपुरा के लिए 65 चिन्हित habitations में 57 के कवर होने की स्थिति दर्ज है, जबकि शेष आठ के लिए कवरेज लंबित है।

भौमिक ने इन लंबित क्षेत्रों को जल्द कवर करने, कमजोर नेटवर्क वाले स्थानों की पहचान करने और आवश्यकतानुसार नए टावर या नेटवर्क सुधार करने के साथ जिला-वार समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का अनुरोध किया है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में उनके पत्र पर केंद्र सरकार की ओर से किसी विशेष समयसीमा या कार्रवाई की घोषणा का उल्लेख नहीं है।

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