अमेरिका की मैरीलैंड फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 6 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी, जो कुछ मामलों में जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करता था। अदालत ने कहा कि आदेश संविधान और सुप्रीम कोर्ट की हालिया व्याख्या से टकरा सकता
वॉशिंगटन: अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता यानी Birthright Citizenship को सीमित करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नई कोशिश को अदालत से झटका लगा है। मैरीलैंड की फेडरल जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को ट्रम्प प्रशासन के 6 अगस्त के कार्यकारी आदेश पर प्रारंभिक रोक लगा दी। यह आदेश कुछ श्रेणियों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता देने से रोकने की कोशिश करता था।
अदालत का यह फैसला प्रवासी परिवारों और अधिकार संगठनों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। जज ने कहा कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट की हालिया व्याख्या के तहत संबंधित बच्चों को जन्म के समय नागरिक माना जाता है। मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आगे की कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।
6 अगस्त के आदेश में क्या था?
ट्रम्प ने 6 अगस्त 2026 को अमेरिकी नागरिकता से जुड़े दो कार्यकारी आदेश जारी किए थे। इनमें से एक आदेश का उद्देश्य उन कुछ श्रेणियों की पहचान करना था, जिन्हें प्रशासन के अनुसार जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। दूसरे आदेश में तथाकथित Birth Tourism पर रोक लगाने के लिए विदेश विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
Birth Tourism का मतलब ऐसे मामलों से है, जिनमें कोई व्यक्ति अमेरिका में मुख्य रूप से इस उद्देश्य से आता है कि यहां बच्चे के जन्म के बाद उसे अमेरिकी नागरिकता मिल सके। ट्रम्प प्रशासन लंबे समय से इस प्रथा को नागरिकता व्यवस्था के दुरुपयोग के रूप में देखता रहा है।
नए आदेश में विदेशी सरकारों से जुड़े कुछ लोगों के बच्चों, कथित रूप से अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए व्यावसायिक लेन-देन करने वाले मामलों और कुछ अन्य विशेष श्रेणियों को भी शामिल किया गया था। हालांकि, अदालत ने माना कि कार्यकारी आदेश के जरिए इन बच्चों की नागरिकता रोकना गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है।
मैरीलैंड की अदालत ने क्यों लगाई रोक?
यूएस डिस्ट्रिक्ट जज डेबोरा बोर्डमैन ने आदेश पर प्रारंभिक रोक लगाते हुए कहा कि संबंधित बच्चों को जन्म से नागरिकता प्राप्त है और राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश इस संवैधानिक व्यवस्था से टकरा सकता है। अदालत ने यह भी माना कि मामले में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है।
अदालत के फैसले के बाद संघीय एजेंसियां इस मुकदमे में शामिल बच्चों की नागरिकता को आदेश के आधार पर रोक या चुनौती नहीं दे सकतीं। हालांकि, एजेंसियों को आदेश लागू करने से संबंधित प्रशासनिक दिशानिर्देश तैयार करने की अनुमति बनी हुई है।
जज ने प्रशासन के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि अभी आदेश को लागू करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तैयार नहीं हुए हैं, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। अदालत के अनुसार, आदेश की भाषा अपने आप में नागरिकता दस्तावेजों को रोकने का निर्देश देती है।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुका है बड़ा फैसला
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में 30 जून 2026 का अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने ट्रम्प के 20 जनवरी 2025 वाले उस कार्यकारी आदेश को चुनौती देने वाले मामले में फैसला सुनाया, जिसमें अमेरिका में अवैध या अस्थायी रूप से रह रहे माता-पिता के बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता से बाहर करने की कोशिश की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में ट्रम्प की उस व्यापक कोशिश को खारिज कर दिया। कोर्ट ने 14वें संविधान संशोधन की Citizenship Clause की मौजूदा व्याख्या को बरकरार रखा। इसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले और अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाले लोग आम तौर पर जन्म से अमेरिकी नागरिक होते हैं।
यही फैसला ट्रम्प प्रशासन के अगस्त वाले नए आदेश के खिलाफ कानूनी चुनौती का अहम आधार बना।
14वां संविधान संशोधन क्या कहता है?
अमेरिका में Birthright Citizenship का संवैधानिक आधार 14वां संशोधन है। इसे 1868 में गृहयुद्ध के बाद अपनाया गया था। इसके Citizenship Clause के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने या वहां नागरिकता प्राप्त करने और अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन रहने वाले व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होते हैं।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 1898 के United States v. Wong Kim Ark मामले में भी जन्मसिद्ध नागरिकता की व्यापक व्याख्या की थी। यही न्यायिक परंपरा इस विवाद में लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
ट्रम्प प्रशासन हालांकि इस व्यवस्था की कुछ सीमाओं की अलग व्याख्या करता है। अगस्त के आदेश में सरकार ने उन परिस्थितियों को लक्षित करने की कोशिश की, जिन्हें वह मौजूदा संवैधानिक नियमों के अपवाद के रूप में देखती है।
जनवरी 2025 और अगस्त 2026 के आदेश में अंतर
ट्रम्प के जनवरी 2025 के आदेश का दायरा काफी व्यापक था। उसमें उन बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता से बाहर करने की कोशिश की गई थी, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी नहीं थे। इसका संभावित प्रभाव अवैध रूप से रह रहे लोगों के अलावा कुछ अस्थायी वीजा धारकों के बच्चों पर भी पड़ सकता था।
अगस्त 2026 का नया आदेश अपेक्षाकृत सीमित श्रेणियों पर केंद्रित था। इसमें कथित Birth Tourism, कुछ विदेशी सरकारी अधिकारियों से जुड़े मामले, तथाकथित Alien Enemy श्रेणियां और नागरिकता हासिल करने के लिए व्यावसायिक लेन-देन जैसे मामलों को निशाना बनाया गया।
यानी ट्रम्प प्रशासन ने जून में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी रणनीति को बदलते हुए जन्मसिद्ध नागरिकता को पूरी तरह खत्म करने के बजाय कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे सीमित करने का प्रयास किया।
सरकार ने अदालत के फैसले का विरोध किया
ट्रम्प प्रशासन के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि नई नीति को चुनौती देने वाली याचिका समय से पहले दाखिल की गई है। सरकार का कहना था कि संबंधित संघीय एजेंसियों ने अभी आदेश को लागू करने के लिए विस्तृत नियम और दिशानिर्देश तैयार नहीं किए हैं।
लेकिन जज बोर्डमैन ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि आदेश में कई व्यापक श्रेणियों के बच्चों के लिए नागरिकता से जुड़े दस्तावेज रोकने का निर्देश मौजूद है। इसलिए प्रभावित परिवारों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए अदालत की तत्काल कार्रवाई जरूरी थी।
व्हाइट हाउस की ओर से अदालत के ताजा फैसले पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
प्रवासी संगठनों ने अदालत में दी चुनौती
ट्रम्प के नए आदेश को प्रवासी परिवारों और नागरिक अधिकार संगठनों ने अदालत में चुनौती दी। मुकदमे में उन बच्चों और परिवारों की ओर से दलील दी गई कि राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश संविधान और सुप्रीम कोर्ट की स्थापित व्याख्या के खिलाफ है।
इन संगठनों में We Are CASA, Asylum Seeker Advocacy Project और Institute for Constitutional Advocacy and Protection शामिल हैं। उनका कहना था कि आदेश की व्यापक भाषा से ऐसे परिवार भी प्रभावित हो सकते हैं जिनका किसी कथित Birth Tourism गतिविधि से सीधा संबंध नहीं है।
Birth Tourism पर सरकार का फोकस
ट्रम्प प्रशासन ने Birth Tourism को अपनी नागरिकता और आव्रजन नीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, 6 अगस्त के आदेश का एक उद्देश्य अमेरिकी नागरिकता के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकना था।
हालांकि, Birth Tourism से जुड़े वास्तविक मामलों की संख्या अमेरिका में कुल जन्मों की तुलना में काफी कम मानी जाती है। Migration Policy Institute के अनुमानों के अनुसार, हर साल हजारों लोग अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आ सकते हैं, लेकिन यह कुल अमेरिकी जन्मों का छोटा हिस्सा है।
यही कारण है कि विवाद केवल Birth Tourism तक सीमित नहीं है। असली कानूनी सवाल यह है कि राष्ट्रपति और संघीय एजेंसियां संविधान में मान्यता प्राप्त नागरिकता के अधिकार की सीमा को कार्यकारी आदेश के जरिए कितना बदल सकती हैं।
आगे क्या होगा?
मैरीलैंड की अदालत का फैसला ट्रम्प प्रशासन के नए आदेश को फिलहाल लागू होने से रोकता है, लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं है। व्यापक कानूनी चुनौती अभी जारी है और मामले में आगे अपील या अन्य अदालतों में सुनवाई हो सकती है।
इस विवाद का अंतिम परिणाम अमेरिकी आव्रजन नीति और नागरिकता कानून पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। एक तरफ ट्रम्प प्रशासन Birth Tourism और नागरिकता के कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई चाहता है, वहीं प्रवासी अधिकार संगठन 14वें संशोधन में मिले जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार की रक्षा की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल अदालत का संदेश स्पष्ट है कि कार्यकारी आदेश के जरिए जन्मसिद्ध नागरिकता की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश को न्यायिक समीक्षा का सामना करना पड़ेगा। जून में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अब मैरीलैंड की अदालत के आदेश के बाद यह मुद्दा अमेरिका की आव्रजन राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण कानूनी विवादों में बना हुआ है।









