अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार पर फिर दावा जताते हुए कहा कि उन्होंने आठ युद्ध खत्म कराए और दुनिया को तबाही से बचाया। पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को नॉर्वेजियन नोबेल समिति करेगी।
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार पर अपनी दावेदारी जताई है। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से आठ युद्ध खत्म हुए और उन्होंने दुनिया को संभावित तबाही से बचाया। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को नॉर्वे में होगी।
ट्रंप ने कहा- ‘मैंने आठ युद्ध खत्म कराए’
ट्रंप ने बुधवार को अपने कूटनीतिक प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में आठ युद्धों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे अपनी तारीफ नहीं, बल्कि तथ्य बताया और दावा किया कि शायद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने इतने संघर्षों को सुलझाने में भूमिका नहीं निभाई। ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए खुद को योग्य बताते रहे हैं। इस बार भी पुरस्कार की घोषणा से ठीक पहले उन्होंने अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि उनके प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए।
हालांकि, उनके दावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस भी है। कुछ संघर्षों में ट्रंप प्रशासन ने युद्धविराम या समझौतों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है, लेकिन कई मामलों में संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कुछ संबंधित पक्ष ट्रंप की भूमिका को भी उनके दावे से कम महत्व देते हैं।
9 अक्टूबर को होगा नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान
2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार, 9 अक्टूबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की जाएगी। नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट के अनुसार, घोषणा स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजे होगी। पुरस्कार का फैसला नॉर्वेजियन नोबेल समिति करती है।
इस साल ट्रंप के साथ कई अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाएं, मानवीय संगठन और शांति प्रयासों से जुड़े लोग शामिल हैं। विशेषज्ञों के बीच ट्रंप की संभावनाओं को लेकर एक राय नहीं है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने आठ संघर्षों को सुलझाने में अपनी भूमिका का दावा किया है, लेकिन इनमें से कुछ जगहों पर हिंसा दोबारा शुरू हो चुकी है। ईरान से जुड़ा संघर्ष भी उनके दावे को लेकर सवाल खड़े करता है।
ट्रंप पहले भी कई बार जता चुके हैं दावेदारी
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप का दावा नया नहीं है। अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक प्रयासों को अपनी उपलब्धियों के तौर पर पेश किया था। 2018 में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ ट्रंप की बैठक के बाद नॉर्वे के दो सांसदों ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की इच्छा जाहिर की थी।
2019 में ट्रंप ने दावा किया था कि जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें पुरस्कार के लिए नामित किया है। हालांकि, आबे ने सार्वजनिक रूप से इस नामांकन की पुष्टि नहीं की थी।
2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ट्रंप ने पुरस्कार को लेकर अपनी दावेदारी दोहराई थी। उन्होंने तत्कालीन पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से तुलना करते हुए कहा था कि अगर ओबामा को नोबेल मिल सकता है तो उन्हें भी मिलना चाहिए। ओबामा को 2009 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।
नॉर्वे से नोबेल को लेकर ट्रंप का विवाद
नोबेल पुरस्कार को लेकर ट्रंप की नाराजगी जनवरी 2026 में नॉर्वे के साथ एक कूटनीतिक विवाद का हिस्सा भी बनी थी। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच तनाव के बीच ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे को संदेश भेजा था। इसमें उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने का मुद्दा उठाया और कहा था कि उन्होंने आठ युद्धों को रोकने में भूमिका निभाई है। स्टोरे ने स्पष्ट किया था कि नोबेल शांति पुरस्कार का फैसला नॉर्वे की सरकार नहीं करती। यह निर्णय स्वतंत्र नॉर्वेजियन नोबेल समिति का अधिकार है।
ट्रंप के दावे को लेकर फैक्ट-चेक में भी कहा गया कि उनके द्वारा बताए गए आठ युद्धों को पूरी तरह समाप्त हुआ मानना अतिशयोक्ति हो सकता है। कुछ मामलों में युद्धविराम हुए हैं या तनाव कम हुआ है, लेकिन स्थायी शांति स्थापित होने का दावा सभी मामलों में सही नहीं माना जा सकता।

आठ युद्ध खत्म कराने के दावे पर क्यों उठते हैं सवाल?
ट्रंप प्रशासन ने जिन संघर्षों में अपनी भूमिका का दावा किया है, उनमें भारत-पाकिस्तान, इजराइल-ईरान, आर्मेनिया-अजरबैजान, कंबोडिया-थाईलैंड, रवांडा-कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मिस्र-इथियोपिया और कोसोवो-सर्बिया से जुड़े विवाद शामिल हैं।
हालांकि, इन सभी मामलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। कहीं युद्धविराम हुआ, कहीं बातचीत आगे बढ़ी और कहीं तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। यही वजह है कि ट्रंप के “आठ युद्ध खत्म कराने” के दावे पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और फैक्ट-चेकर्स ने सवाल उठाए हैं।
ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में भी अपनी भूमिका का दावा किया है। हालांकि, भारत ने कई मौकों पर इस बात पर जोर दिया है कि दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव कम करने से जुड़े फैसले द्विपक्षीय स्तर पर लिए गए थे।
2025 में मारिया कोरीना मचाडो को मिला था पुरस्कार
नोबेल शांति पुरस्कार के पिछले विजेता के रूप में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो का नाम महत्वपूर्ण है। उन्हें 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और वेनेजुएला में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक बदलाव के प्रयासों के लिए दिया गया था।
मचाडो बाद में ट्रंप से मिली थीं और उनके प्रति अपना समर्थन भी जताया था। उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल मेडल भी दिया था। इस घटना ने उस समय काफी राजनीतिक चर्चा पैदा की थी। लेकिन मचाडो का मेडल ट्रंप को दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि पुरस्कार भी उन्हें हस्तांतरित हो गया। नोबेल व्यवस्था के अनुसार पुरस्कार को किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर या साझा नहीं किया जा सकता।
नोबेल समिति पर राजनीतिक दबाव का सवाल
ट्रंप की लगातार सार्वजनिक दावेदारी ने नोबेल शांति पुरस्कार के चयन को लेकर राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। पुरस्कार का उद्देश्य उन व्यक्तियों या संस्थाओं को सम्मानित करना है जिन्होंने शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए महत्वपूर्ण काम किया हो।
नॉर्वेजियन नोबेल समिति के सचिव क्रिस्टियन बर्ग हार्पविकेन ने इस साल कहा है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में शांति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रयासों का महत्व और बढ़ गया है। समिति ऐसे कार्यों पर ध्यान दे रही है जो अल्फ्रेड नोबेल की मूल भावना से मेल खाते हों।
ट्रंप की उम्मीदवारी ऐसे समय सामने आई है जब दुनिया कई बड़े संघर्षों से जूझ रही है। यूक्रेन, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई हिस्सों में जारी अस्थिरता ने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार को पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है।
ट्रंप के लिए 9 अक्टूबर का दिन अहम
अब सभी की नजरें 9 अक्टूबर को होने वाली घोषणा पर हैं। ट्रंप ने खुद को पुरस्कार का मजबूत दावेदार बताया है, लेकिन अंतिम फैसला नॉर्वेजियन नोबेल समिति करेगी। अगर ट्रंप को यह पुरस्कार मिलता है, तो यह उनके अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल होगा। अगर ऐसा नहीं होता, तो नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर उनकी लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक दावेदारी एक बार फिर चर्चा में रहेगी।
फिलहाल, उनका “आठ युद्ध खत्म कराने” का दावा चुनावी और कूटनीतिक राजनीति से आगे बढ़कर नोबेल पुरस्कार की बहस का प्रमुख हिस्सा बन गया है। असली तस्वीर शुक्रवार को समिति के फैसले के बाद ही साफ होगी।










