ट्रंप बोले- ईरान के खिलाफ युद्ध जल्द जीतेंगे, तेल की कीमतें गिरने का दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध जल्द जीतने का दावा किया। उन्होंने तेल कीमतों में गिरावट की बात कही और मिडटर्म से पहले नए हमले की संभावना से इनकार नहीं किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध जल्द जीतने का दावा किया और संघर्ष खत्म होने पर तेल कीमतें गिरने की बात कही। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नए हमले की स्थिति में जवाब देने की चेतावनी दी।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ जारी युद्ध को जल्द जीत सकता है और संघर्ष खत्म होने के बाद वैश्विक तेल कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी। ट्रंप ने साथ ही ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की क्षमता को रोकना अमेरिकी अभियान का प्रमुख लक्ष्य बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

ट्रंप का दावा- युद्ध जल्द खत्म होगा

ट्रंप ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर कहा कि अमेरिका युद्ध में जल्द जीत हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही युद्ध समाप्त होगा, तेल की कीमतें काफी नीचे जा सकती हैं।

ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अमेरिकी कार्रवाई का केंद्रीय मुद्दा बताते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इस पूरे अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। उनके मुताबिक, ईरान को परमाणु हथियार से लैस होने से रोकना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

ट्रंप ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी ईरान के साथ समझौते की संभावना और संघर्ष समाप्त करने को लेकर अपनी स्थिति रखी थी। उन्होंने संकेत दिया था कि ईरान के साथ किसी समझौते से ऊर्जा बाजार पर दबाव कम हो सकता है।

मिडटर्म चुनाव से पहले फिर हमले की संभावना

ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर फिर सैन्य हमले हो सकते हैं, तो उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया।

उन्होंने कहा कि ऐसा संभव है, लेकिन इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से उन्होंने इनकार किया। उनके इस बयान ने उन रिपोर्टों के बीच नई चर्चा पैदा कर दी है, जिनमें कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प को अभी भी खुला रखे हुए है।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने की संभावना पर चर्चा की है। हालांकि, यह एक मीडिया रिपोर्ट है और इसे अमेरिकी प्रशासन की घोषित अंतिम नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सैन्य कार्रवाई के साथ आर्थिक दबाव भी जारी

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई के साथ आर्थिक दबाव भी बना रहा है। उनके अनुसार, प्रतिबंधों और अन्य आर्थिक कदमों का असर ईरानी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।

उन्होंने ईरान की मुद्रा में गिरावट और महंगाई बढ़ने का दावा किया। ट्रंप ने ईरान में महंगाई दर करीब 300 प्रतिशत होने की बात कही, हालांकि यह आंकड़ा उनके बयान के रूप में देखा जाना चाहिए और स्वतंत्र आर्थिक आंकड़ों से इसकी पुष्टि आवश्यक है।

अमेरिकी प्रशासन की रणनीति में सैन्य दबाव के साथ आर्थिक प्रतिबंधों को भी महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक दबाव का उद्देश्य तेहरान पर बातचीत के लिए दबाव बढ़ाना है।

ईरान ने कहा- नए हमले के लिए तैयार

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनका देश किसी नए सैन्य हमले का सामना करने के लिए तैयार है।

NBC के कार्यक्रम ‘Meet the Press’ में अराघची ने कहा कि ईरान कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन अगर अमेरिका दोबारा हमला करता है तो उसका जवाब देने के लिए भी तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि नया संघर्ष बेहद विनाशकारी हो सकता है।

अराघची ने साथ ही यह संकेत दिया कि तेहरान बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। उनका कहना है कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा, लेकिन शांति की संभावना को भी गंवाना नहीं चाहता।

इस तरह दोनों पक्षों के बयानों में एक तरफ सैन्य दबाव और दूसरी तरफ बातचीत की संभावना एक साथ दिखाई दे रही है।

ईरान का सात दिन का प्रस्ताव क्या है?

ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिन की एक कूटनीतिक योजना रखी है। प्रस्ताव के अनुसार, कुछ अमेरिकी कदम उठाए जाने की स्थिति में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और इसके बाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है।

ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, अमेरिका को सैन्य दबाव कम करना, ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटाना और ईरानी तेल की बिक्री पर लगी पाबंदियों में राहत जैसे कदम उठाने होंगे। इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और बातचीत शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

अराघची ने कहा है कि प्रस्ताव को मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के तहत जलडमरूमध्य को छठे दिन खोला जा सकता है और सातवें दिन बातचीत शुरू हो सकती है।

ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया

ईरान की सात दिन की योजना पर ट्रंप ने सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ईरान की ओर से रखी गई शर्तें स्वीकार नहीं हैं।

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि तेहरान की ओर से बातचीत की पेशकश के साथ ऐसी शर्तें रखी गई हैं, जिनसे पहले ईरान को आर्थिक और सैन्य दबाव से राहत मिल जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी प्रस्ताव की शर्तों पर असहमति जताई है।

वहीं, ईरान का कहना है कि उसकी पेशकश का उद्देश्य संघर्ष को रोकने और कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तैयार करना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस परिवहन के लिए प्रमुख रास्तों में शामिल है।

यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है। हाल में ईरान की ओर से इसे फिर खोलने की संभावना के संकेतों के बाद तेल कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई थी।

ट्रंप का कहना है कि युद्ध खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। हालांकि, कीमतों पर वास्तविक प्रभाव संघर्ष की अवधि, होर्मुज में समुद्री यातायात, उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।

क्या युद्ध फिर लंबा खिंच सकता है?

मौजूदा बयानों से यह स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य और कूटनीतिक दोनों रास्ते अभी खुले हुए हैं। ट्रंप एक तरफ जल्द जीत और समझौते की संभावना की बात कर रहे हैं, वहीं ईरान ने किसी नए हमले की स्थिति में जवाब देने की तैयारी की बात कही है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में मिडटर्म चुनाव के बाद संभावित अमेरिकी बमबारी का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में ट्रंप के ईरान के साथ समझौते की संभावना पर भी बात करने का जिक्र है। इन दोनों पहलुओं से पता चलता है कि अमेरिकी नीति में सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों पर चर्चा जारी है।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि क्या दोनों पक्ष सात दिन की प्रस्तावित प्रक्रिया या किसी संशोधित समझौते के जरिए बातचीत की मेज पर लौटते हैं। अगर ऐसा होता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर तनाव कम हो सकता है। अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं, तो आगे की सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी रह सकती है।

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