ब्रिटेन में भारतीय छात्रों की संख्या घटने की आशंका, वीजा नियमों में बदलाव से बढ़ी चिंता

ब्रिटेन में भारतीय छात्रों को जारी Sponsored Study visas जून 2026 तक के साल में 16% घटकर 82,523 रहे। 2027 से अधिकांश Graduate visa की अवधि 18 महीने होगी।

ब्रिटेन में भारतीय छात्रों को जारी Sponsored Study visas जून 2026 तक के साल में 16% घटकर 82,523 रहे। 2027 से अधिकांश Graduate visa की अवधि 18 महीने होगी। Student dependants पर भी पहले से सख्त नियम लागू हैं।

लंदन: ब्रिटेन में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में आगे कमी आने की आशंका के बीच देश की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा नीति और वीजा नियम फिर चर्चा में हैं। ब्रिटेन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक के एक साल में भारतीय नागरिकों को 82,523 Sponsored Study visas जारी किए गए, जो एक साल पहले की तुलना में 16% कम थे। चीन के बाद भारत ब्रिटेन में Sponsored Study visas पाने वाला दूसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय समूह रहा।

भारतीय छात्रों के लिए ब्रिटेन अभी भी प्रमुख विदेशी शिक्षा गंतव्यों में शामिल है, लेकिन Graduate visa की अवधि में कटौती और छात्र आश्रितों (dependants) से जुड़े नियमों में बदलाव ने वहां पढ़ाई के बाद रहने और परिवार को साथ ले जाने की संभावनाओं को प्रभावित किया है।

भारतीय छात्रों के वीजा में पहले ही आई कमी

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक के 12 महीनों में भारतीय छात्रों को 82,523 Sponsored Study visas मिले। यह संख्या पिछले साल की तुलना में 16% कम है। इसी अवधि में चीन के नागरिकों को 86,368 Sponsored Study visas मिले। दोनों देशों के नागरिकों ने मिलकर कुल Sponsored Study visas में करीब 46% हिस्सेदारी दर्ज की।

यह आंकड़ा बताता है कि ब्रिटेन में भारतीय छात्रों की मांग बनी हुई है, लेकिन वीजा जारी होने की संख्या में गिरावट आई है। इसका असर ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षा संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, किसी स्वतंत्र अध्ययन के अनुमान को वास्तविक भविष्य की संख्या मानना उचित नहीं होगा। किसी विशेष वर्ष में कितने भारतीय छात्र ब्रिटेन जाएंगे, यह वीजा नीति, आवेदन संख्या, विश्वविद्यालयों में प्रवेश, फीस और वैश्विक शिक्षा बाजार जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

Graduate visa की अवधि 2027 से घटकर 18 महीने होगी

ब्रिटेन में पढ़ाई पूरी करने के बाद पात्र अंतरराष्ट्रीय छात्रों को काम करने या नौकरी तलाशने की अनुमति देने वाला Graduate visa भी बदल रहा है।

ब्रिटेन सरकार के अनुसार, यदि Graduate visa के लिए आवेदन 31 दिसंबर 2026 तक किया जाता है तो सामान्यतः यह दो साल के लिए वैध होगा। लेकिन 1 जनवरी 2027 या उसके बाद आवेदन करने वाले अधिकांश पात्र स्नातकों को यह वीजा 18 महीने के लिए मिलेगा। डॉक्टरेट या अन्य doctoral qualification हासिल करने वालों के लिए अवधि तीन साल रहेगी।

इस बदलाव का अर्थ है कि 2027 से ब्रिटेन में पढ़ाई पूरी करने वाले अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्नातकों के पास नौकरी खोजने या ब्रिटेन में काम शुरू करने के लिए मौजूदा व्यवस्था की तुलना में छह महीने कम समय होगा।

Graduate visa में बदलाव का भारतीय छात्रों पर क्या असर?

Graduate route को अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद ब्रिटेन में शुरुआती करियर बनाने का एक रास्ता माना जाता है। इस रास्ते के तहत किसी पात्र छात्र को डिग्री पूरी करने के बाद बिना किसी प्रायोजक के काम करने या नौकरी तलाशने की अनुमति मिलती है।

अब इसकी अवधि घटने से भारतीय छात्रों के लिए नौकरी तलाशने और बाद में Skilled Worker जैसे दूसरे वीजा मार्ग पर जाने के लिए उपलब्ध समय कम हो जाएगा।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 18 महीने के बाद सभी Graduate visa धारकों को ब्रिटेन छोड़ना ही होगा। पात्र व्यक्ति अन्य वीजा श्रेणियों, जैसे Skilled Worker route, के लिए आवेदन कर सकते हैं, यदि वे संबंधित शर्तें पूरी करते हैं।

छात्रों के Dependants पर भी बदले नियम

ब्रिटेन ने छात्रों के परिवार के सदस्यों को साथ लाने के नियम भी कड़े किए हैं। 1 जनवरी 2024 से शुरू होने वाले अधिकांश अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने partner या children को dependant के रूप में ब्रिटेन लाने की अनुमति नहीं है।

वर्तमान नियमों के तहत मुख्य अपवादों में सरकार द्वारा प्रायोजित कुछ छात्र और कुछ postgraduate research programmes शामिल हैं। पात्र research-based higher degree या doctoral programme में पढ़ने वाले कुछ छात्रों को dependants लाने की अनुमति मिल सकती है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ब्रिटेन में सभी छात्र और professionals अपने परिवार को साथ नहीं ला सकते। नियम व्यक्ति के वीजा रूट और कोर्स की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग हैं।

Dependants में बड़ी गिरावट के आंकड़े

ब्रिटेन के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि छात्र dependants पर नीति बदलाव का असर काफी बड़ा रहा है। 2024 में Student dependants के लिए 21,978 visas जारी हुए, जो पिछले साल की तुलना में 85% कम थे। सरकार ने इस गिरावट को 1 जनवरी 2024 से लागू हुए नए नियमों से जोड़ा है।

जून 2026 तक के साल में Graduate route के extensions में भी गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में कुल Graduate route extensions 157,356 रहे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 39% कम थे। सरकार के अनुसार, इसमें dependants को दिए गए extensions में 81% की गिरावट की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

ब्रिटेन की वीजा नीति में सख्ती क्यों हुई?

ब्रिटेन ने हाल के वर्षों में migration को नियंत्रित करने के लिए Student और अन्य immigration routes में कई बदलाव किए हैं। सरकार ने छात्र वीजा के जरिए परिवार के सदस्यों के आने और immigration system के दुरुपयोग को सीमित करने को इन बदलावों के प्रमुख कारणों में बताया है।

इसका असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के फैसलों पर पड़ सकता है। छात्र केवल विश्वविद्यालय की रैंकिंग या फीस नहीं देखते, बल्कि पढ़ाई के बाद नौकरी, वीजा की अवधि, परिवार को साथ ले जाने की संभावना और स्थायी करियर विकल्पों को भी ध्यान में रखते हैं।

क्या जर्मनी, फ्रांस और आयरलैंड बन सकते हैं विकल्प?

ब्रिटेन की नीतियों में बदलाव के बीच भारतीय छात्रों के लिए दूसरे यूरोपीय शिक्षा बाजारों की प्रासंगिकता बढ़ सकती है। जर्मनी, फ्रांस और आयरलैंड पहले से अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने वाले प्रमुख यूरोपीय गंतव्यों में हैं।

हालांकि, किसी देश को भारतीय छात्रों के लिए निश्चित रूप से बेहतर विकल्प बताने से पहले फीस, भाषा, वीजा स्वीकृति, रोजगार नियम, विश्वविद्यालय की गुणवत्ता, रहने की लागत और पढ़ाई के बाद उपलब्ध अवसरों की अलग-अलग तुलना करना जरूरी है।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि विभिन्न देशों की वीजा स्वीकृति दरें वर्ष, आवेदक की प्रोफाइल और वीजा श्रेणी के अनुसार बदलती हैं। इसलिए किसी एक निश्चित approval rate को सभी भारतीय छात्रों पर लागू करना उचित नहीं होगा।

भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों की मौजूदगी बढ़ रही

भारतीय छात्रों के लिए एक अन्य विकल्प देश के भीतर विदेशी विश्वविद्यालयों के कार्यक्रमों का विस्तार है। भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों को कैंपस स्थापित करने की अनुमति देने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने भारतीय बाजार में रुचि दिखाई है।

इससे उन छात्रों को अपने देश में रहकर विदेशी विश्वविद्यालय की डिग्री या अंतरराष्ट्रीय अकादमिक अनुभव हासिल करने के विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, प्रत्येक संस्थान के कार्यक्रम, फीस, डिग्री की मान्यता और कैंपस की वास्तविक स्थिति अलग-अलग होती है।

UK-India FTA में क्या है?

भारत और ब्रिटेन के बीच Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ। ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, समझौते में business mobility से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इनका उद्देश्य कुछ श्रेणियों के professionals और businesspeople के अस्थायी आवागमन को आसान बनाना है।

हालांकि, ब्रिटेन सरकार स्पष्ट करती है कि इस समझौते ने कोई नया सामान्य visa route नहीं बनाया है और यह Student visa व्यवस्था को बदलने वाला समझौता नहीं है। Business mobility के तहत भी संबंधित salary, qualification, sponsorship और अन्य शर्तें लागू रहती हैं।

इसलिए यह कहना कि FTA के तहत भारतीय छात्रों के लिए विशेष सामान्य वीजा रियायत लागू हो गई है, आधिकारिक दस्तावेजों से समर्थित नहीं है।

ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों के सामने चुनौती

अंतरराष्ट्रीय छात्र ब्रिटेन के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारतीय छात्रों की संख्या में लगातार कमी आती है तो इसका असर केवल विश्वविद्यालयों के enrolment पर ही नहीं, बल्कि accommodation, retail, transport और अन्य स्थानीय सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, भारतीय छात्रों की संख्या में किसी संभावित कमी से ब्रिटेन को ₹10,000 करोड़ सालाना का निश्चित नुकसान होगा, यह आंकड़ा उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं होता। ऐसे आर्थिक अनुमान के लिए फीस, रहने का खर्च, स्थानीय अर्थव्यवस्था में छात्रों के योगदान और विश्वविद्यालयों की आय सहित कई कारकों का विश्लेषण आवश्यक होगा।

आगे क्या देखना होगा?

भारतीय छात्रों के लिए ब्रिटेन का आकर्षण आने वाले वर्षों में कई नीतिगत और आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगा। इनमें Graduate visa की 18 महीने की अवधि, Student dependant नियम, विश्वविद्यालयों की फीस, नौकरी का बाजार और अन्य देशों की शिक्षा एवं immigration policies प्रमुख हैं।

ब्रिटेन के आधिकारिक आंकड़ों में भारतीय छात्रों के Sponsored Study visas में पहले ही गिरावट दिखाई दे रही है। साथ ही, 2027 से Graduate route की अवधि कम होने वाली है। इन बदलावों का वास्तविक प्रभाव अगले कुछ admission cycles के आंकड़ों से अधिक स्पष्ट होगा।

Leave a comment