नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने UNGA में भोटेकोशी बाढ़ को हिमालय और दुनिया के लिए चेतावनी बताया। उन्होंने भारत-चीन की मदद के लिए आभार जताते हुए साझा क्लाइमेट सिस्टम, सैटेलाइट डेटा और अर्ली वार्निंग नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा।
न्यूयोर्क: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ को हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी बताया। उन्होंने आपदा के बाद मदद के लिए भारत और चीन का आभार जताते हुए कहा कि हिमालय में बढ़ते जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए नेपाल, भारत और चीन को मिलकर काम करना होगा। शाह ने साझा सैटेलाइट डेटा, ग्लेशियर निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम के लिए क्षेत्रीय तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा।
बालेन शाह का UNGA में पहला संबोधन
मार्च 2026 में नेपाल के प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने गुरुवार को पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ और उसके बाद सामने आए मानवीय संकट को प्रमुखता से उठाया।
शाह ने कहा कि बाढ़ के बाद नेपाल की सहायता के लिए आगे आने वाले देशों में उसके पड़ोसी भारत और चीन भी शामिल रहे। उन्होंने दोनों देशों की तत्काल सहायता के लिए आभार जताया और हिमालयी क्षेत्र में जलवायु संबंधी आपदाओं के खिलाफ साझा तैयारी की जरूरत पर जोर दिया।
भारत-चीन के साथ हिमालयी क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म
शाह ने नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में Himalayan Climate Resilience Mechanism बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर पिघलने, ग्लेशियर झीलों, बाढ़ और भूस्खलन जैसे जोखिमों की निगरानी तथा आपदा से पहले तैयारी को मजबूत करना है।
प्रस्ताव के तहत तीनों देशों के बीच सैटेलाइट से हासिल डेटा और विशेषज्ञता साझा करने की बात कही गई। इसके साथ ही खतरनाक ग्लेशियर झीलों की निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने और आपदा के समय राहत एवं बचाव के लिए बेहतर समन्वय का सुझाव दिया गया।
शाह के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन सीमाओं को नहीं मानता। इसलिए हिमालय से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए केवल किसी एक देश की कोशिश पर्याप्त नहीं होगी।
भोटेकोशी बाढ़ को बताया पूरी दुनिया के लिए चेतावनी
नेपाल के प्रधानमंत्री ने भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा को केवल स्थानीय त्रासदी मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव बढ़ रहे हैं और इसका असर नेपाल के अलावा भारत, चीन तथा व्यापक दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर पड़ सकता है। हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र एशिया के लिए महत्वपूर्ण जल, कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा है। शाह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिमों को गंभीरता से लेने की अपील की।

उन्होंने कहा कि नेपाल ने ऐसे संकट के लिए बहुत कम योगदान दिया है, लेकिन जलवायु परिवर्तन की कीमत उसे भारी नुकसान के रूप में चुकानी पड़ रही है। शाह ने विकसित और अधिक संसाधन वाले देशों से जलवायु आपदाओं से प्रभावित देशों के लिए अधिक सहायता उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
26 अगस्त 2026 को नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में भीषण फ्लैश फ्लड आई। नेपाल सरकार के अनुसार इस आपदा ने घरों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया। शुरुआती दिनों में सरकार ने बड़ी संख्या में शव बरामद होने और सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी।
बाद की रिपोर्टों में नुकसान और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार अपडेट हुआ। Reuters ने 21 सितंबर की रिपोर्ट में 1,400 से अधिक मौतों और करीब 5,700 लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने 24 सितंबर को कहा कि आधिकारिक आंकड़ों में 1,411 मौतें और 5,875 लोग लापता थे तथा मृतकों की संख्या बढ़कर 10,000 तक पहुंचने की आशंका जताई थी।
इसलिए शाह के भाषण में बताए गए करीब 1,450 मृतकों और 6,000 से अधिक लापता लोगों के आंकड़े को भाषण के संदर्भ में प्रस्तुत करना उचित है, जबकि आधिकारिक स्थिति के आंकड़े समय के साथ बदलते रहे हैं।
नेपाल को GDP के करीब 10% के बराबर पुनर्निर्माण सहायता चाहिए
शाह ने कहा कि आपदा के बाद नेपाल को सड़क, पुल, घर और दूसरी जरूरी बुनियादी सुविधाओं को दोबारा खड़ा करने के लिए अपनी GDP के करीब 10% के बराबर संसाधनों की जरूरत है।
उन्होंने जलवायु आपदाओं से प्रभावित गरीब और विकासशील देशों को कर्ज के बजाय अनुदान यानी ऐसी वित्तीय सहायता देने की अपील की, जिसे वापस नहीं करना पड़े।
शाह ने राहत व्यवस्था की वैश्विक क्षमता पर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार दुनिया ने युद्ध के लिए सामान पहुंचाने की व्यवस्था को काफी मजबूत बनाया है, लेकिन जरूरतमंद लोगों तक भोजन और मानवीय राहत पहुंचाने की व्यवस्था अभी उतनी मजबूत नहीं है।
नेपाल ने लॉस एंड डैमेज फंड से मांगे 20 मिलियन डॉलर
नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के Loss and Damage Fund से 20 मिलियन डॉलर की सहायता मांगी है। मूल रिपोर्ट के मुताबिक यह उस फंड के तहत एक देश के लिए मांगी जा सकने वाली अधिकतम राशि है।
नेपाल सरकार के शुरुआती आकलन में बाढ़ से करीब 5 अरब डॉलर के नुकसान की बात कही गई थी। ऐसे में 20 मिलियन डॉलर की मांग संभावित पुनर्निर्माण जरूरतों की तुलना में काफी छोटी है।
जलवायु परिवर्तन से प्रभावित विकासशील देशों की सहायता के लिए Loss and Damage व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं में आगे बढ़ाया गया है। नेपाल की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब देश बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और राहत की चुनौती का सामना कर रहा है।
बांग्लादेश ने भी UNGA में उठाया 2024 का मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भी देश की राजनीतिक परिस्थितियों और रोहिंग्या संकट पर बात की।
रहमान ने अपने भाषण में जुलाई-अगस्त 2024 के जन आंदोलन में मारे गए लोगों और लोकतंत्र, न्याय तथा नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2024 में बांग्लादेश ने फासीवाद से मुक्ति हासिल की और अब उनकी सरकार देश को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। उनके भाषण के आधिकारिक पाठ में 2024 के छात्र-जन आंदोलन को “फासीवाद के खिलाफ” संघर्ष के रूप में संदर्भित किया गया है।
यह संदर्भ तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार से जुड़ा है, जो 2024 के आंदोलन के बाद सत्ता से बाहर हुई थीं।
रोहिंग्या संकट के समाधान पर बांग्लादेश का जोर
तारिक रहमान ने संयुक्त राष्ट्र में रोहिंग्या संकट भी उठाया। उन्होंने कहा कि संकट की शुरुआत म्यांमार से हुई है और इसका स्थायी समाधान भी वहीं होना चाहिए।
उन्होंने विस्थापित रोहिंग्या लोगों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी को समस्या के समाधान का प्रमुख रास्ता बताया। बांग्लादेश लंबे समय से म्यांमार से रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी की मांग करता रहा है।
इस तरह UNGA में नेपाल और बांग्लादेश के संबोधनों में अलग-अलग मुद्दे प्रमुख रहे—नेपाल ने हिमालयी जलवायु संकट, आपदा राहत और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता पर जोर दिया, जबकि बांग्लादेश ने 2024 के राजनीतिक बदलाव और रोहिंग्या संकट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा।












