UP के 4 हिस्सों में बंटवारे के बयान पर बृजभूषण सिंह की प्रतिक्रिया, बोले- बिना सोचे समझे नहीं होनी चाहिए ऐसी बातc

UP News: उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने के ओम प्रकाश राजभर के बयान पर बृजभूषण शरण सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े मुद्दे पर बिना

उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाए जाने की स्थिति में राजभर समाज से मुख्यमंत्री बनाए जाने के ओम प्रकाश राजभर के बयान पर पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान पर पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। राजभर ने हाल ही में एक जनसभा में दावा किया था कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बंट सकता है और पूर्वांचल के अलग राज्य बनने पर राजभर समाज से मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।

बृजभूषण शरण सिंह ने इस बयान को गंभीर राजनीतिक प्रस्ताव के बजाय चुनावी बयान बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उसकी 80 लोकसभा सीटें हैं। उनके मुताबिक, इसी वजह से राष्ट्रीय राजनीति में उत्तर प्रदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजनीतिक ताकत को कमजोर करने वाले किसी भी प्रस्ताव पर सोच-समझकर चर्चा होनी चाहिए।

बृजभूषण बोले- केंद्र और राज्य सरकार की ऐसी मंशा नहीं

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि फिलहाल केंद्र सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने को लेकर कोई ऐसी मंशा या आधिकारिक पहल सामने नहीं आई है। उनका कहना था कि अगर इस तरह के प्रस्ताव को गंभीरता से आगे बढ़ाना है तो पहले सरकार के स्तर पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि ओम प्रकाश राजभर के बयान के पीछे कोई ठोस प्रस्ताव या योजना होती, तो इस विषय पर मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के संबंधित स्तरों पर बातचीत की जाती। उनके अनुसार, केवल सार्वजनिक मंच से बयान देने के बजाय राज्य के पुनर्गठन जैसे बड़े मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है।

'बंटवारे के फैसले पर गंभीरता से विचार जरूरी'

उत्तर प्रदेश के विभाजन की चर्चा के बीच बृजभूषण शरण सिंह ने देश के विभाजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही विभाजन का दर्द झेल चुका है और इसलिए किसी भी नए विभाजन की बात को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मंचों पर भाषण के दौरान कई तरह की बातें कही जाती हैं। 

ऐसे में संभव है कि राजभर ने भी अपनी बात राजनीतिक संदर्भ में रखी हो और उसका उद्देश्य तत्काल किसी औपचारिक प्रक्रिया की घोषणा करना न हो। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के पुनर्गठन से जुड़ा कोई भी प्रस्ताव व्यापक चर्चा और गंभीर विचार के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए।

ओम प्रकाश राजभर ने क्या कहा था?

ओम प्रकाश राजभर ने 20 सितंबर को देवरिया में आयोजित एक जनसभा में उत्तर प्रदेश के संभावित विभाजन को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा जा सकता है। उनके बयान के मुताबिक, इन हिस्सों में पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश शामिल होंगे।

राजभर ने यह भी कहा कि यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो वहां पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होना चाहिए। उन्होंने इसके पीछे पूर्वांचल में राजभर समुदाय की आबादी और राजनीतिक भागीदारी को आधार बताया। बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए भी कहा कि उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग लंबे समय से अलग-अलग क्षेत्रों में उठती रही है।

क्या है उत्तर प्रदेश के विभाजन की पुरानी बहस?

उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में बांटने की मांग नई नहीं है। इससे पहले भी राज्य के अलग-अलग हिस्सों को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। 2011 में तत्कालीन मायावती सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित हुआ था, लेकिन यह प्रक्रिया आगे बढ़कर नए राज्यों के गठन तक नहीं पहुंची।

फिलहाल उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में विभाजन को लेकर कोई नया आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में ओम प्रकाश राजभर का बयान राजनीतिक बहस और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है, जबकि बृजभूषण शरण सिंह ने इस विचार पर सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति दर्ज कराई है।

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