UP Panchayat Elections 2026: समय पर चुनाव होंगे या नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई

UP Panchayat Elections 2026 को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि चुनाव समय पर होंगे या टल सकते हैं। इस मामले पर Allahabad High Court में आज अहम सुनवाई हो रही है

उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। इस मुद्दे पर आज Allahabad High Court में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। अदालत यह तय करेगी कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव समय पर कराए जा सकते हैं या नहीं।

लखनऊ: Allahabad High Court में उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों को समय पर कराने की मांग वाली याचिका पर आज सुनवाई होनी है। इस मामले की सुनवाई पहले भी तीन बार 25 मार्च, 1 अप्रैल और 8 अप्रैल को स्थगित हो चुकी है, जिससे यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इससे पहले 13 मार्च को हुई सुनवाई में अदालत ने State Election Commission of Uttar Pradesh से जवाब मांगा था। 

अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पहली बैठक से पांच साल का होता है और इसे इससे अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।

तीन बार टली सुनवाई, अब बढ़ी अहमियत

पंचायत चुनाव से जुड़ी याचिका पर पहले 25 मार्च, 1 अप्रैल और 8 अप्रैल को सुनवाई होनी थी, लेकिन हर बार यह टल गई। अब 2026 की इस अहम सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह तय कर सकती है कि राज्य में पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर होंगे या देरी से। इससे पहले 13 मार्च को हुई सुनवाई में Allahabad High Court ने स्पष्ट टिप्पणी की थी कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243(E) के तहत पंचायतों का कार्यकाल पहली बैठक से पांच वर्षों तक सीमित होता है और इसे बढ़ाया नहीं जा सकता।

अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को यह बताने का निर्देश दिया था कि क्या 15 अप्रैल तक मतदाता सूची प्रकाशित करने के बाद 26 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी की जा सकती है या नहीं।

चुनाव आयोग से मांगा गया जवाब

अदालत ने State Election Commission Uttar Pradesh से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि चुनाव निर्धारित समयसीमा में संभव हैं या नहीं। जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह याचिका अधिवक्ता Imtiyaz Hussain द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश में समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही चुनाव कराना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। उनका कहना है कि देरी होने पर स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

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