यूपी विधानसभा सत्र में सत्ता-विपक्ष आमने-सामने, महिला आरक्षण पर बहस

यूपी विधानमंडल का विशेष सत्र आज महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए होगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच निंदा प्रस्ताव को लेकर तीखी बहस के आसार हैं।

उत्तर प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए बुलाया गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच निंदा प्रस्ताव को लेकर टकराव के आसार हैं, जिससे सदन में तीखी बहस की संभावना है।

Lucknow: महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए उत्तर प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र गुरुवार सुबह 11 बजे से शुरू होगा। इस दौरान विधानसभा और विधान परिषद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच निंदा प्रस्ताव को लेकर जोरदार बहस होने के आसार हैं। सत्र का उद्देश्य विधेयक के पारित न हो पाने के प्रभावों और महिला सशक्तिकरण पर सरकार के रुख को स्पष्ट करना है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बता रहा है।

उत्तर प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र आज, महिला आरक्षण पर होगी चर्चा

उत्तर प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र गुरुवार को बुलाया गया है, जिसमें महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी। सुबह 11 बजे से शुरू होने वाले इस सत्र में विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।

सत्र के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा, जबकि विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, ने अति निंदा प्रस्ताव पेश करने की घोषणा की है। इस मुद्दे को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।

महिला सशक्तिकरण बनाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

माना जा रहा है कि इस विशेष सत्र का उद्देश्य विधेयक के पारित न हो पाने के परिणामों पर चर्चा करना और महिला सशक्तिकरण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराना है। सत्तारूढ़ दल ने विपक्षी पार्टियों पर महिला आरक्षण के विरोध का आरोप लगाया है।

वहीं विपक्ष ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा है कि महिला आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिससे सदन में गरमागरमी की स्थिति बन सकती है।

संसद में बहुमत न मिलने से अटका विधेयक

महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है। हालांकि हाल ही में यह विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है।

वोटिंग के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े, जो आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से कम थे। इसके चलते यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया और अब विभिन्न राज्यों में इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है।

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